सूरत. हस्तशिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम योजना ‘समर्थ’ के अंतर्गत सूरत में आयोजित 45 दिवसीय पारंपरिक हाथ कढ़ाई कार्यशाला जारी है। माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आह्वान पर, नगरसेविका श्रीमती सोनलबेन देसाई और अमी चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से कार्यशाला आयोजित की गई है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से सूरत की महिलाओं को एक नए व्यवसाय में सशक्त बनाना उद्देश्य है।
शहर में योजना के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया गया है। एक केंद्र में 6 शिक्षकों द्वारा 60 महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण और आजीविका के अवसर प्रदान करके सशक्त बनाया। सूरत की महिलाओं को रोजगार दिलाने के लिए कपड़ा मंत्री दर्शना जरदोश ने हरसंभव प्रयास किए हैं। इस अवसर पर उन्होंने खुद वहां पहुंच महिलाओं से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी और सुविधाओं का जायजा लिया। यह योजना सूरत के 8 अलग-अलग जोन में शुरू की गई है। महिलाओं द्वारा तैयार किये गये हाथ के काम और जरदोशी के काम को देश-विदेश के हवाई अड्डों पर प्रदर्शित किया जाएगा । सामग्री बेचने से जो पैसा आएगा वह भी महिलाओं को ही दिया जाएगा।
‘समर्थ’ य़ोजना क्या है ?
यह एक प्रमुख कौशल विकास योजना है। इसका आरंभ 20 दिसंबर 2017 को किया गया था। जिसका उद्देश्य संगठित कपड़ा उद्योग और संबंधित क्षेत्रों में प्रोत्साहन प्रदान करना और रोजगार सृजित करना है।
-कपड़ा और परिधान भारत में सबसे पहले विकसित उद्योगों में से एक है।
-भारत की जीडीपी में कपड़ा क्षेत्र का योगदान लगभग 2% है।
-कपड़ा मंत्रालय की समर्थ योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में 13,235 से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षित किया गया है।
इसलिए यह देश की प्रगति की ओर बेहद महत्वपूर्ण कदम है।ऐसे में इसके अलावा देश की महिलाएं जितनी सशक्त होंगी, विकास उतनी ही तेजी से होगा। क्योंकि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लघु और कुटीर उद्योग में बड़ी संख्या में महिलाएं काम कर रही है। उन्हें प्रशिक्षित करने और कला को बढ़ाने से बहुमुखी विकास होगा। वे अधिक आत्मविश्वासी और सशक्त होंगी। अपने परिवारों का समर्थन करने और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने में सक्षम होंगी। वे अपने समुदायों में सकारात्मक बदलाव ला पाऐंगी।
उद्योग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से भारत को कई आर्थिक लाभ भी होंगे।
भारत को एक मजबूत और समृद्ध देश बनाने के लिए महिलाओं की भागीदारी आवश्यक है।