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INNOVATION : विकलांगों के लिए एसवीएनआइटी के 2 छात्रों ने बनाई इ-ट्राइसिकल

- संस्थान ने दिया 37 हजार का अनुदान, 35 हजार में बना दी

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INNOVATION : विकलांगों के लिए एसवीएनआइटी के 2 छात्रों ने बनाई इ-ट्राइसिकल

INNOVATION : विकलांगों के लिए एसवीएनआइटी के 2 छात्रों ने बनाई इ-ट्राइसिकल

सूरत.

पीपलोद के सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी (एसवीएनआइटी) के बी.टेक मेकेनिकल इंजीनियरिंग के दो छात्रों ने विकलांगों के लिए इ-ट्राइसिकल बनाई है। संस्थान के ही एक विकलांग छात्र के लिए यह अनोखी इ-ट्राइसिकल बनाई गई, जिसे देख कर दूसरे विकलांग विद्यार्थी भी ऐसी ट्राइसिकल बनाने की गुजारिश लेकर संस्थान आ रहे हैं। छात्रों को संस्थान की रिसर्च ग्रांट से इ-ट्राइसिकल बनाने के लिए 37 हजार रुपए का अनुदान मिला था। उन्होंने 35 हजार रुपए में ही इ-ट्राइसिकल बना दी।

एसवीएनआइटी के बी.टेक मेकेनिकल इंजीनियरिंग के फाइनल इयर के उर्विल सिद्धपुरा और हेनिल बारवलिया ने संस्थान की ग्रांट का उपयोग कर समाज को इ-ट्राइसिकल की भेंट दी है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह इ-ट्राइसिकल उनके प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं है। संंस्थान में पढऩे वाला उनका साथी सत्यम मिश्रा विकलांग है। सत्यम ने उर्विल और हेनिल से उसके आने-जाने के लिए ऐसा वाहन बनाने की गुजारिश की थी, जिस पर ईंधन और रख-रखाव का अतिरिक्त खर्च न आए। साथ ही जो प्रदूषण न फैलाए। दोनों ने संस्थान के समक्ष विकलांगों के लिए इ-ट्राइसिकल बनाने का प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया। संस्थान को प्रोजेक्ट पसंद आया। इसके लिए 37 हजार रुपए का अनुदान मंजूर किया। इ-ट्राइसिकल बनाने में दोनों की इलेक्ट्रिक्ल साइकल एक्सपर्ट अमीतेज सिंह ने सहायता की। तीनों ने 35 हजार रुपए में इ-ट्राइसिलकल बना दी।

एक घंटे के चार्ज में 30 किमी
उर्विल और हेनिल ने इ-ट्राइसिकल में लिथियम बेटरी का उपयोग किया है। एक घंटे की चार्जिंग में यह 30 किमी तक चलती है। इसमें 14 किलो का सामान ढोने की जगह भी दी गई है। इसमें 250 वोल्ट की वाटरप्रूफ बीएलडीसी मोटर भी लगाई गई है। इ-ट्राइसिकल की-लैस है। इसमें एंटी थीफ अर्लाम सिस्टम डाला गया है। उर्विल और हेनिल ने अमीतेज की सहायता से अगस्त 2018 में इसे बनाना शुरू किया। मार्च 2019 में यह तैयार हो गई। यह सत्यम मिश्रा को चलाने के लिए दी गई। अब तक यह 1200 किमी से अधिक चल चुकी है। इसमें किसी तरह की खराबी नहीं आई है।

अन्य साथियों ने भी मांगी
उर्विल और हेनिल का कहना है कि इ-ट्राइसिकल को देख संस्थान के तीन और विकलांग विद्यार्थियों ने इ-ट्राइसिकल की गुजारिश की है। इनके लिए अनुदान एकत्रित किया जा रहा है। अब दोनों छात्रों ने बिजली का बिल बचाने के लिए इ-ट्राइसिकल को सौर ऊर्जा से चलाने की योजना बनाई है। इ-ट्राइसिकल के पीछे जो सामान ढोने की जगह है, उसके ऊपर सौर सिस्टम लगाने का प्रयास किया जा रहा है।