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सूरत. वेटिंग पीरियड की गलत व्याख्या कर बीमाधारक का क्लेम नामंजूर करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। ग्राहक कोर्ट ने शिकायत याचिका मंजूर करते हुए बीमा कंपनी को क्लेम की राशि ब्याज समेत चुकाने का आदेश दिया।
अभियोजन पक्ष की अधिवक्ता मोना कपूर ने बताया कि पुणागाम राधे पार्क सोसायटी निवासी कीर्ति वालजी बरवालिया ने बजाज अलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से मेडिक्लेम पॉलिसी खरीदी थी। पॉलिसी की लागू अवधि के दौरान कीर्ति के पुत्र की तबियत अचानक बिगड़ गई और उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। उपचार पर खर्च हुए 47,410 रुपए का क्लेम उन्होंने बीमा कंपनी के समक्ष पेश किया था, लेकिन बीमा कंपनी ने यह कारण देते हुए क्लेम नामंजूर कर दिया कि बीमा धारक के पुत्र को बीमारी पॉलिसी खरीदने के 30 दिन में हुई है और शर्त के मुताबिक 30 बाद ही बीमारी का क्लेम मंजूर किया जा सकता है। अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता मोना कपूर ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि बीमाधारक का पुत्र भले ही 30 दिन पूरे होने से तीन दिन पहले बीमार हुआ हो, लेकिन अस्पताल में भर्ती 30 दिन पूरे होने के बाद हुआ था। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को ध्यान में रखते हुए बीमा कंपनी के खिलाफ की शिकायत याचिका मंजूर कर ली और बीमा कंपनी को क्लेम की राशि ब्याज समेत चुकाने का आदेश दिया।
Published on:
21 Sept 2023 08:53 pm
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