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छूना बस मुझे प्यार से ही….

अग्रवाल विकास ट्रस्ट एवं राजस्थान पत्रिका का सहमे नहीं बिटिया कार्यक्रम का हुआ आयोजन, आइपीएस सरोज कुमारी ने समझ स्पर्श की...अभियान दल के साथ समझाया गुड टच-बेड टच

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छूना बस मुझे प्यार से ही....

सूरत. छूना बस मुझे प्यार से ही, बच्चे है पर बच्चे ना समझना, हम सब समझते है...यही गीत गुनगुनाते हुए सैकड़ों बच्चें आत्मविश्वास से तब लबरेज हो गए, जब आइपीएस सरोजकुमारी ने उन्हें गुड टच और बेड टच के बारे में बताया। अग्रवाल विकास ट्रस्ट एवं राजस्थान पत्रिका के संयुक्त प्रयास से शनिवार को आयोजित सहमे नहीं बिटियां कार्यक्रम के अंतर्गत सरोजकुमारी और समझ स्पर्श की... अभियान टीम ने बच्चें और अभिभावकों को सही और गलत स्पर्श के बारे में समझाते हुए बच्चों से होने वाले अपराध को पहले ही किस तरह रोका जा सकता है, उसके बारे में जानकारी दी।
सिटीलाइट में महाराजा अग्रसेन भवन के द्वारका हॉल में दोपहर दो से शाम पांच बजे तक आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गई। इस दौरान वड़ोदरा से आई आइपीएस सरोजकुमारी, पैनल में शामिल वक्ता हेली राव, डॉ. तृप्ति, मनपा ट्रांसपोर्ट कमेटी चेयरमैन हेमाली बोघावाला, ट्रस्ट के विनोद अग्रवाल. अग्रसेन महिला शाखा की अध्यक्ष रेणु गुप्ता, सचिव सुनीता कानोडिय़ा, युवा शाखा अध्यक्ष राहुल अग्रवाल के अलावा राजस्थान पत्रिका के स्टेट हैड सुरेंद्र मिश्रा, यूनिट हैड संदीप जैन, संपादकीय प्रभारी राजेश कसेरा आदि मौजूद थे।
इसके बाद प्रासंगिक उद्बोधन और आमंत्रित महेमानों ने अपने विचार सभी के समक्ष रखे। हॉल बच्चों और अभिभावकों से भरा हुआ था। इसके बाद वड़ोदरा की डीसीपी और आइपीएस सरोजकुमारी ने तकनीकी सेशन में बच्चे और अभिभावकों को अच्छे और बुरे स्पर्श के बारे में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि हर किसी को अच्छे और बुरे स्पर्श का अनुभव होता है, लेकिन बच्चे यह नहीं समझ पाते। ऐसे में मां-बाप को इस तरह का माहौल बनाने की जरूरत है कि बच्चें सभी बातें उन्हें खुलकर बता सकें। बच्चों के लिए मां को सबसे भरोसेमंद व्यक्ति बताते हुए सरोजकुमारी ने अभिभावक और बच्चों के बीच के संवाद को जरूरी बताया। उन्होंने बच्चों से हुए अपराध और यौन शोषण के कई किस्से बताते हुए इस तरह के मामलों को किस तरह रोका जा सकता है इस पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यदि हम बच्चों से खुल कर संवाद करें और बच्चे हर तरह की बात बता सकें, ऐसा माहौल बनाया जाए तो अपराध होने से पहले ही रोका जा सकता है। उन्होंने इसके लिए समाज को भी सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए अपील की। उन्होंनें बच्चों को प्रेक्टिकल तरीके से भी अपने शरीर के प्राइवेट अंगों के बारे में बताते हुए बेड टच और गुड टच की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान शहर में अडाजण के संस्कार भारती स्कूल की छात्रा आस्था सोलंकी ने भी गुड टच-बेड टच के बारे में जरूरी बातें द्वारका हॉल में मौजूद बच्चों व अभिभावकों समेत अन्य लोगों को बताई।
हर स्कूल में स्पर्श पर विषय शामिल करना जरूरी
आइपीएस सरोजकुमारी ने बताया कि स्कूल में बच्चों के लिए आज स्वच्छता जैसे विषयों को अध्ययन में शामिल किया गया है। सभी स्कूलों में इसके बारे में बच्चों को बताया जाता है। इसी तरह सभी बच्चों को बेड टच और गुड टच की जानकारी भी स्कूल से ही मिले, इसके लिए स्कूलों में अध्ययन के लिए इस विषय को भी शामिल करना जरूरी बन गया है।
महिला वर्ग ने दिखाई जागरुकता
आइपीएस सरोजकुमारी के अच्छे-बुरे स्पर्श को सीखने-समझने वाले अभियान समझ स्पर्श की...आयोजन में भाग लेने के लिए शनिवार को सिटीलाइट में महाराजा अग्रसेन भवन के द्वारका हॉल में आयोजक अग्रवाल विकास ट्रस्ट महिला शाखा व युवा शाखा के अलावा अन्य समाज व संगठन से जुड़ी महिलाएं भी मौजूद थी। इनमें जाट समाज, सीरवी समाज, सोनीपत पंजाबी समाज, अनाविल देसाई समाज, ऋषिविहार सोसायटी, किड्जी प्री स्कूल आदि से जुड़ी महिला सदस्य शामिल थी।
प्रशिक्षित युवतियां उतरेगी मैदान में
समझ स्पर्श की...अभियान की जानकार होने के बाद अग्रवाल विकास ट्रस्ट युवा शाखा की सदस्य युवतियां जल्द ही शहर के विभिन्न क्षेत्रों की स्कूलों में बच्चों के बीच यह सीख लेकर जाएगी। शनिवार को शाखा की 40 से ज्यादा सदस्य युवतियों ने गुड टच-बेड टच के बारे में भली-भांति जाना और फिर अभियान की प्रणेता आइपीएस सरोजकुमारी के साथ बच्चों व अभिभावकों को सिखाने-समझाने का संकल्प भी किया।
ऐसे समझे बेड टच और इसे रोकने के लिए यह करें
- प्राइवेट पाट्र्स को यदि कोई छूता है तो यह बेड टच समझे
- कोई चॉकलेट या किसी चीज का लालच देकर बुलाए तो नहीं जाना चाहिए
- स्कूल, मोहल्ले या अड़ोस-पड़ोस में कोई बेड टच करें तो मां-बाप को बताए
- स्कूल में इस तरह की हरकत होती हो तो शिक्षक या आचार्य को बताए
- चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर संपर्क कर जानकारी दे
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अभिभावक यह करें
- बच्चों से कुछ भी जरूरी नहीं यह समझे
- बच्चों से संवाद बनाए रखना चाहिए
- बच्चा हर कोई बात बताए ऐसा माहौल बनाए
- बच्चों को प्राइवेट पाट्र्स के बारे में जानकारी दे
- गुड टच बेड टच के बार में उन्हें बताए
- बच्चे से इस तरह की बात सुनने के बाद उसे चुप ना करे और खुद भी चुप ना बैठे
- बच्चों से इस तरह की हरकत का पता चलने पर पुलिस को जानकारी दे
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