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9 टैंक को भारत की पिछली बोफार्स तोप से अधिक एडवांस

के-9 टैंक की अहम बातें

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9 टैंक को भारत की पिछली बोफार्स तोप से अधिक एडवांस

सूरत
एलएंडटी के सीनियर इवीपी(डिफेन्स) जेडी पाटिल ने टैंक की खासियतों के बारे में बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से के-9 टैंक को भारत की पिछली बोफार्स तोप से अधिक एडवांस माना जाता है। बोफार्स तोप को एक्शन में आने से पहले पीछे आना पड़ता था, जबकि के-9 टैंक अपने स्थान से एक्शन में आ सकता है। के-9 वज्र टैंक में थर्ड जनरेशन की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की गई है। इस बनाने में सेना के सुझाव लिए गए हैं, इसलिए यह सुरक्षा दृष्टिकोण से बहुत एडवांस हैं। तीन-चार मिनट में यह 16-17 राउण्ड फायरिंग कर सकता है। इस टैंक को सेल्फ प्रोपल्ड होवरक्राफ्ट गन भी कहा जाता है। साढ़े तीन साल से टैंक का ट्रायल चल रहा है। हाल में ही कुछ महीनों पहले पुन: इस टैंक को ट्रायल के लिए भारतीय सेना को दिया गया था, इसके बाद सेना के सुझाए सुधार कर दिए गए हैं। एलएंडटी ने इसके लिए नया प्लान्ट बनाया है। फिलहाल अभी तक 10 टैंक भारतीय सेना को दिए जा चुके हैं और वर्ष 2020 तक अन्य 90 टैंक भी सेना को सौंप दिए जाएंगे। इस टंैक की विशेषता यह है कि यह रण और ऊंचे टेकरे पर भी चढ सकता है। इसमें एक ओटोमेटिक कैनल बैज्ड आर्टिलरी सिस्टम है, जिसकी क्षमता 40 से 52 किलोमीटर तक है और ऑपरेशनल रेंज 480 किलोमीटर है। केन्द्र सरकार ने पहली बार किसी निजी कंपनी को इतना बड़ा ऑर्डर दिया है। बताया जा रहा है कि के-10 एमिशन रिसप्लाय व्हीकल(एआरवी) के-9 सिस्टम के-10 के साथ आता है यह एक ओटोमेटिक डिस्पले व्हीकल है जो के-9की डायनामिक्स को बनाए रखता है और रियर मैन आर्टिलरी बैटरी को फॉलो करता है। गोले की अधिकतम ट्रांसफर रेट 12 राउंड प्रति मिनट है। अधिकतम गोले की क्षमता 104 राउंड फायर की है।