
Surat News; जानिए कहां प्लास्टिक का विकल्प तलाशने लगे कारोबारी
सिलवासा. पतले प्लास्टिक (plastic) पर प्रतिबंध से इस धंधे से जुड़े कारोबारियों का धंधा बंद होने लगा है। प्रशासन ने एक अक्टूबर से पतले प्लास्टिक उत्पादक, स्टॉक होल्डर, निर्माता, रिसाइक्लिंग, आयातकों को प्लास्टिक बैन का नोटिस जारी कर दिया है। उत्पादन करने वाले उद्यमियों एवं कारोबारियों ने दूसरे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। कइयों ने प्लास्टिक की जगह कपड़ा, कागज, जूट बैग का उत्पादन आरम्भ कर दिया है। इधर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सिंगल यूज प्लास्टिक (Single use plastic) का उपयोग बंद करने का आह्वान किया है।
प्रदेश में पतले प्लास्टिक का उत्पादन करने वाले उद्योग लीज पर चलते हैं। इनकी संख्या 300 से अधिक है। इनमें प्रतिवर्ष करोड़ों का कारोबार होता है। प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग सब्जी मार्केट के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, आभूषण, कपड़े, बर्तन, कटलरी, गिफ्ट व खिलौने, रेडिमेड कपड़े, फर्नीचर, कांच सामान की दुकानों में चलता रहा है। प्लास्टिक बंद होने से प्लास्टिक बैैग की जगह कपड़े, कागज, जूट के बैग बाजार में आ गए हैं। ग्राम पंचायतों के माध्यम से लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक से होने वाले खतरे के बारे में जागरूक किया जा रहा है। नरोली, खानवेल ग्राम पंचायत के सदस्यों ने लोगों को कपड़े के बैग देना शुरू कर दिया है।
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पकड़े जाने पर जुर्माना
सिंगल यूज प्लास्टिक (single use plastic) का कारोबार दंडनीय श्रेणी में आ गया है। एसएमसी के अधिकारी मौलिक दवे ने बताया कि सिंगल यूज प्लास्टिक के पकड़े जाने पर पहली बार 100 रुपए, इसके बाद 5000 रुपए तक दंड वसूला जा सकता है। सिंगल यूज प्लास्टिक को पकडऩे के लिए सिलवासा नगर परिषद ने बाकायदा टीम गठित कर दी है।
उद्योगों में उपयोग:-प्लास्टिक प्रतिबंध कानून के उपरांत बाजार, दुकान एवं घरों में पतली प्लास्टिक के उपयोग पर काफी हद तक अंकुश लगा है, परंतु औद्योगिक इकाइयों में सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग जारी है। उद्योगों में तैयार माल, रखरखाव के सामान एवं पैंकिग मैटेरियल में पतली प्लास्टिक की थैलियां प्रयोग हो रही हैं। टैक्सटाइल व टेक्सॉराइज इंडस्ट्रीज में यार्न के कोन एवं तैयार कपड़ा पतली प्लास्टिक की थैलियों में पैंकिंग किया जाता हैं। प्लास्टिक, बर्तन, कांच के उपकरण, इलेक्ट्रिक सामान, केमिकल की फैक्ट्रियों में पैकिंग प्लास्टिक की थैलियों में हो रहा है। प्रोसेसिंग व मैन्यूफैक्चिरिंग के लिए आने वाला रॉ-मैटेरियल भी प्लास्टिक की थैलियों में बंधा रहता है। प्लास्टिक कचरा बेहद जटिल होता है जो कभी नष्ट नहीं होता। डॉ. प्रताप मून ने बताया कि आज हमारे फल, सब्जियां, बच्चों के दूध की बोतलें, कोल्ड ड्रिंक की पैकिंग एवं अन्य खाद्य पदार्थ पूरी तरह प्लास्टिक पर निर्भर हो गया है। समय के साथ इन प्लास्टिक वस्तुओं से बिसफिनोल रिसने लगता है जिसका अंश हमारे शरीर में पहुंच जाता है। प्लास्टिक कचरा को रोकने के लिए सभी को उत्तरदायित्व निभाना है।
अन्य विकल्प तलाशें
सिंगल यूज प्लास्टिक की जगह उद्यमियों एवं कारोबारियों को दूसरा विकल्प तलाशने की जरूरत है। परिस्थितियों के अनुसार उद्यमियों को मैन्यूफैक्चरिंग में बदलाव लाने की जरूरत है।
अतुल शाह, सचिव, सिलवासा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
Published on:
03 Oct 2019 10:01 pm
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