18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

श्रम प्रवर्तन विभाग मात्र एक निरीक्षक के भरोसे

दानह प्रदेश में तीन हजार औद्योगिक इकाइयों में दो लाख श्रमिक कार्यरत

2 min read
Google source verification
patrika

प्रोपर्टी टैक्स की बढ़ोतरी से नाराजगी

सिलवासा. यह विडम्बना ही कही जा सकती है कि बुधवार को पूरे दानह प्रदेश में मजदूरों के हितों की बातें मजदूर दिवस पर की जाएगी, लेकिन असल सच्चाई यह है कि मजदूरों का हितैषी श्रम प्रवर्तन विभाग मात्र एक निरीक्षक के भरोसे ही चल रहा है। प्रदेश में तीन हजार औद्योगिक इकाइयां है और यहां पर दो लाख से ज्यादा श्रमिक कार्यरत है।
सरकारी आंकड़ों की मानें तो प्रदेश के श्रम प्रर्वतन विभाग में औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत सिर्फ 80 हजार मजदूर पंजीकृत हैं। हकीकत में यह संख्या दो लाख के पार है। प्रदेश में उद्योग, होटल, इमारत निर्माण, सरकारी कार्य, ईंट भट्टा, सुरक्षा एजेंसी, प्राइवेट संस्थान, बागान आदि में मजदूर ठेके पर रखने की परम्परा है। श्रम ठेकेदारों के पास मजदूरों से काम के घंटे का कोई मापदंड नहीं हैं। उद्योगों में श्रमिक, ऑपरेटर, गार्ड, ड्राइवर आदि ठेकेदारों के मार्फत काम कर रहे हैं। उद्योगों में मिक्सिंग, प्रोसेस, फिनिशिंग और पैकिंग के कार्यों पर श्रमिक ठेकेदारों का कब्जा है। ज्यादातर ठेकेदार पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त किए बिना खुलेआम मजदूरों का सौदा करते हैं। कुशल और ऑपरेटरों को छोडक़र अन्य मजदूरो को श्रम ठेकेदार न न्यूनतम मजदूरी देते हैं और न ही कोई सुविधा। अधिकांश उद्योगों में गार्डों की नियुक्ति ठेकेदारों के मार्फत की गई है। कंपनियों में लोडिंग और अनलोडिंग कार्य पर ठेकेदारों का शिकंजा है, ठेकेदारों के पास लगे अधिकांश मजदूर पंजीकृत नहीं हैं।


कुल चार कर्मचारी


श्रम प्रवर्तन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब एक हजार श्रमिक ठेकेदार रजिस्टर्ड हैं। श्रमिक और उद्योग प्रबंधन के बीच विवाद सुनवाई के लिए प्रशासन की ओर से मात्र एक छोटा सा श्रम प्रवर्तन कार्यालय हैं। यह कार्यालय एक निरीक्षक व तीन कर्मचारियों की जिम्मेदारी पर चल रहा है। श्रम विभाग में विवाद आने पर ज्यादातर मामले नियोक्ता के इशारे पर सुलझाए जाते हैं।


ओवरटाइम का ठिकाना नहीं


प्रदेश के ज्यादातर उद्योगों में 12-12 घंटे की दो पारी में काम होता है और आठ घंटे से अधिक काम का ओवरटाइम मेहनताना सिर्फ रजिस्टरों में दिखाया जाता हंै, लेकिन वास्तवित तौर पर मजदूरों को ओवर टाइम का अतिरिक्त मेहताना नहीं मिलता है। इसके अलावा मजदूरों को बुनियादी सुविधाएं भी नियोक्ता अथवा ठेकेदार की ओर से मुहैया नहीं कराई जाती है।


दिहाड़ी मजदूरों की हालत खराब


सिलवासा में एचडीएफसी बैंक, जामा मस्जिद आदि के पास मौजूद श्रमिक बलबीर सुतार, मनजीव पाऊ, शंकर लोहार आदि ने बताया कि वे रोजाना सुबह यहां इकठ्ठा होते है। यहां से लोग उन्हें काम के लिए ले जाते है और शाम को पैसा देकर रवाना कर देते है। कई बार उन्हें दिनभर काम नहीं भी मिलता है।


कोई सुविधा नहीं


मसाट इंडस्ट्रीयल एस्टेट में कार्यरत महिला श्रमिक सरला पाटिल, मनीषा रधिया, धाजी मिसाल आदि ने बताया कि उद्योगों में महिला मजदूरों की स्थिति ज्यादा खराब है। ठेकेदार महिलाओं को 150 से 170 रुपए प्रतिदिन के अलावा प्रसुति अवकाश, ग्रेच्यूटी, पीएफ जैसी कोई सुविधा नहीं देते।