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फुटपाथ पर बनाई लाइब्रेरी, नि:शुल्क पढ़ने के लिए देते हैं पुस्तक

सरकारी स्कूल के शिक्षकों की पहल 'पुस्तक परब' प्रत्येक रविवार को गार्डन के अंश पुस्तक मेला, एक महीने में लौटाते हैं

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सूरत

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Pradeep Joshi

Mar 14, 2023

फुटपाथ पर बनाई लाइब्रेरी, नि:शुल्क पढ़ने के लिए देते हैं पुस्तक

फुटपाथ पर बनाई लाइब्रेरी, नि:शुल्क पढ़ने के लिए देते हैं पुस्तक

संदीप पाटिल. सूरत। मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया ने लोगों को किताबों से दूर कर दिया है। ऐसे लोगों में किताबों के प्रति प्रेम दुनिया और लोगों के विचार से समृद्ध हो सकते हैं, इसलिए सरकार के सरकारी स्कूलों के तीन शिक्षकों ने मिलकर एक पहल की है। तीनों शिक्षकों ने 'पुस्तक परब' (परब यानी प्याऊ) के नाम से किताब लगाने की शुरुआत की है, जिसके माध्यम से वे लोगों को पढ़ने के लिए नि: प्रतिबंधित पुस्तकें प्रतिबंधित करवा रहे हैं।

शिक्षक जितेन्द्र मकवाना कथन हैं कि किताबों से मिले विचार व्यक्ति को विचार से धनवान बनाते हैं। राष्ट्र निर्माण के लिए अच्छे विचार नागरिकों में जरूरी हैं, जो किताबों से ही मिल सकते हैं, लेकिन मोबाइल और इंटरनेट के उपयोग के बीच नई पीढ़ी की किताबों से दूर हो रहा है। ऐसे में उन्हें लगा कि नई पीढ़ी को किताबों की जरूरत है और इसी विचार से 'पुस्तक परब' की शुरुआत तीन महीने पहले की गई। इसमें उन्हें शिक्षक राघव दाभी और किशोर परमार का सहयोग मिला। त्रो ने साथ मिलकर अपने पास की कुछ किताबें इकठ्ठी की और मोटा वराछा ऑक्सीजन पार्क गार्डन की नई किताब मिलने की शुरुआत की।

- पत्नियां महीने के पहले रविवार को बुक फेयर :शिक्षक मकवाना ने बताया कि वे प्रत्येक महीने के पहले रविवार को बगीचे के सबसे रहस्य पर सुबह नौ से दोपहर 12 बजे तक तीनों एक साथ रहते हैं। यहां से कोई भी व्यक्ति अपना नाम, पता और मोबाइल नंबर लिखकर मनपसंद खाता नि:शुल्क ले जा सकता है और एक महीने में लौटा सकता है।

- तीन महीने में 750 लोगों ने लिया फायदा :शिक्षक द्वारा शुरू की गई 'पुस्तक परब' को देखकर लोग किताबों के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। शिक्षकों ने बताया कि तीन महीने पहले उन्होंने शुरुआत की और अब तक 750 से अधिक लोगों का लाभ ले चुके हैं।

- किताबें दान करने की अपील :शिक्षकों ने बताया कि समाज में बदलाव के लिए किताबों में लिखी गई सोच नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। 'पुस्तक परब' एक छोटा सा प्रयास है, इसे बड़ा रूप दिया जा सकता है। शिक्षकों ने लोगों से किताबें दान करने की अपील की है। अब तक शिक्षकों के इस प्रयास को राज्य के शिक्षा मंत्री प्रफूल्ल पानशेरिया और लेखक संजय रावल का सहयोग मिला है। दोनों ने मिलकर 151 पुस्तकें 'पुस्तक परब' को दान में दी हैं।