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हत्या के दो मामलों में दो जनों को उम्र कैद

अठवा और उनगांव में हुई थीं वारदातें

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हत्या के दो मामलों में दो जनों को उम्र कैद

सूरत.

अठवा और उनगांव क्षेत्र में हुईं हत्या की दो अलग-अलग वारदातों में सेशन कोर्ट ने दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी।

अठवा रेल राहत कॉलोनी निवासी जिगर किरीट गायकवाड़ और उसके भाई विशाल गायकवाड़ पर हत्या का आरोप था। उनके पड़ोस में रहने वाले राजेश कटारकर नाम के युवक ने दोनों भाइयों के खिलाफ अठवा थाने में मारपीट की शिकायत दर्ज करवाई थी। पुलिस ने दोनों भाइयों को तड़ीपार किया था। मारपीट के मामले को लेकर 3 जून, 2015 को कोर्ट में मुद्दत थी और राजेश के बयान दर्ज किए जाने थे।

राजेश सुबह घर से कोर्ट जाने के लिए निकल रहा था, तभी जिगर और विशाल ने तलवार से वार कर उसकी हत्या कर दी थी। राजेश की मां की शिकायत पर अठवा पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया था। चार्जशीट पेश होने के बाद मामले की सुनवाई सेशन कोर्ट में चल रही थी। इस दौरान विशाल पैरोल जम्प कर फरार हो गया और सिर्फ जिगर के खिलाफ सुनवाई जारी रही। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने जिगर गायवकवाड़ को हत्या के आरोप में दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

दूसरे मामले में उनगांव जलारामनगर सोसायटी निवासी कलीम सलीम शेख और उसके पिता मोहम्मद सलीम शाहबुद्दीन शेख पर हत्या का आरोप था। आरोप के मुताबिक जोर-जोर से बातचीत करने को लेकर उनका पड़ोसी मोहम्मद अहमद और उसके भाई गुलाम मुस्तफा से विवाद हो गया था। दोनों परिवार 7 दिसम्बर, 2014 को समझौते के लिए इकठ्ठे हुए, लेकिन मामला बिगड़ गया और मारपीट शुरू हो गई। पिता-पुत्र ने मोहम्मद अहमद के पिता मोहम्मद सलीम पठान पर चाकू से वार कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर लिया था। चार्जशीट पेश होने के बाद मामले की सुनवाई सेशन कोर्ट में चल रही थी। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने कलीम शेख को हत्या के आरोप में दोषी मानते हुए उम्रकैद और पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि मोहम्मद सलीम शेख को संदेह का लाभ देते हुए आरोपों से बरी कर दिया।


हत्या की अभियुक्त की जमानत अर्जी नामंजूर
सूरत. अमरोली थाना क्षेत्र में युवक की हत्या के आरोप में गिरफ्तार महिला अभियुक्त की नियमित जमानत याचिका सेशन कोर्ट ने नामंजूर कर दी। अमरोली गणेशपुरा क्षेत्र में 20 मई को दिनेश कालू कछावा नाम के युवक से बिशन खिंची का विवाद हो गया था। आरोप है कि बिशन खिंची तथा उसके परिजनों ने दिनेश कछावा की बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने अंतरसिंह कछावा की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज कर बिशन ङ्क्षखची, मुकेश खिंची, राकेश खिंची और दुर्गा प्रकाश बगाडा को गिरफ्तार कर लिया था। दुर्गा बगाड़ा ने चार्जशीट पेश होने के बाद कोर्ट में नियमित जमानत के लिए गुहार लगाई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता भावेश कुलकर्णी और लोकअभियोजक वर्षा पंचाल ने दलीलें पेश करते हुए महिला अभियुक्त की वारदात में सक्रिय भूमिका का जिक्र किया। कोर्ट ने दलीलों को ध्यान में रखते हुए जमानत याचिका नामंजूर कर दी।