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सूरत स्टेशन पर मिले 194 बच्चों में से 160 का हुआ परिवार से मिलन

लापता बच्चों के मामलों में उपयोगी साबित हुई सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद और राजकोट की हेल्प डेस्क  

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सूरत स्टेशन पर मिले 194 बच्चों में से 160 का हुआ परिवार से मिलन

सूरत.

सूरत रेलवे स्टेशन पर जून 2018 से कार्यरत चाइल्ड हेल्प डेस्क को अब तक 194 बच्चे मिले। इनमें से 160 बच्चों का नवसर्जन ट्रस्ट ने परिवार से मिलन कराया। कुछ बच्चों को परिजनों से मिलाने का कार्य अंडर प्रोसेस है। स्टेशन परिसर से मिले लावारिस बच्चों में सबसे अधिक सूरत तथा अहमदाबाद क्षेत्र के निवासी हैं। इनमें से ज्यादातर की उम्र 11 से 14 साल के बीच है।


केन्द्र सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय की ओर से चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से लावारिस बच्चों को उनके घर या शेल्टर होम पहुंचाने का कार्य शुरू किया गया। इसके तहत देश के सभी प्रमुख स्टेशनों पर 1098 चाइल्ड हेल्प डेस्क बनाने की शुरूआत की गई। गुजरात में सूरत के अलावा वडोदरा, अहमदाबाद, राजकेट में भी 1098 हेल्प डेस्क सेवा शुरू की गई। सूरत स्टेशन पर प्लेटफॉर्म संख्या एक पर रेलवे पुलिस चौकी तथा रेलवे सुरक्षा बल हेल्प डेस्क के नजदीक 1098 चाइल्ड हेल्प डेस्क का बूथ है। यह बूथ नवसर्जन ट्रस्ट ने जून 2018 से शुरू किया था। जून से अब तक स्टेशन पर 194 लावारिस बच्चे मिले। इनमें 142 लडक़े और 52 लड़कियां शामिल हैं।

सेंटर कॉर्डिनेटर कृष्णा एस. मांडविया ने बताया कि 11 से 14 साल के उम्र में सबसे अधिक 65 बच्चे स्टेशन परिसर से मिले। 15 से 18 साल के 42 लडक़े और 27 लड़कियां लावारिस हालत में मिलीं, जबकि छह से दस साल के 28 लडक़े और 13 लड़कियां मिलीं। रेलवे स्टेशन से बच्चे मिलने के बाद उन्हें चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्लूसी) को सौंपा जाता है। इसके अध्यक्ष शहर के महापौर डॉ. जगदीश पटेल हैं। सीडब्लूसी द्वारा बच्चों के पुनर्वास का कार्य किया जाता है।

सूरत में ऐसे बच्चों को रखने के लिए दो जगह व्यवस्था है। लडक़ों को कतारगाम वी.आर. पोपावाला आश्रम में, जबकि लड़कियों को रामनगर के चिल्ड्रन होम में रखा जाता है। कृष्णा ने बताया कि चाइल्ड हेल्प डेस्क को मिले 194 बच्चों में से 160 बच्चों को उनके परिवार से मिलाने का कार्य पूरा हो गया है। कुछ बच्चों के परिजनों से बातचीत कर उन्हें भी घर पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।

लावारिस मिले बच्चों में 55 सूरत के

नवसर्जन ट्रस्ट ने बताया कि गुजरात में अलग-अलग राज्यों से आकर रहने वाले प्रवासी लोगों की संख्या अधिक है। सूरत स्टेशन से मिले लावारिस बच्चों में गुजरात के ८६ बच्चे शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा 55 बच्चे सूरत के निवासी हैं। अहमदाबाद के पांच बच्चे हैं। बाकी बच्चे वडोदरा, भरुच, वलसाड, वापी, दाहोद, कच्छ, खेडा, जूनागढ़, पोरबंदर, अमरेली क्षेत्र के हैं।

हेल्पलाइन का डेमो देकर करते हैं जागरूक

सूरत स्टेशन की चाइल्ड हेल्पलाइन डेस्क के सदस्य यात्रियों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर अभियान चलाते हैं। इसमें एक या दो सदस्य यात्रियों को चाइल्ड हेल्प डेस्क का कार्य बताते हैं। यात्री से उसके मोबाइल से हेल्पलाइन नम्बर 1098 डायल करवा कर डेमो भी किया जाता है। रेलवे स्टेशन या ट्रेनों में घूमने वाले लावारिस बच्चों की जानकारी यात्रियों द्वारा हेल्प डेस्क को पहुंचाई जाती है।

सूरत स्टेशन पर कार्य करने वाले रेलकर्मी, कुली, स्टॉल संचालक, कर्मचारी, टिकट चैकिंग स्टाफ, रेलवे सुरक्षा बल तथा रेलवे पुलिस समेत अन्य लोग भी चाइल्ड हेल्प डेस्क को लावारिस बच्चों की जानकारी देते हैं। ट्रेन में घूमने वाले लावारिस बच्चों की जानकारी पेन्ट्रीकार के स्टाफ द्वारा भी दी जाती है। सूचना मिलने पर चाइल्ड हेल्प डेस्क के सदस्य बच्चे की काउंसलिंग शुरू करते हैं। नाम, पता और अभिभावक का मोबाइल नम्बर बताने पर उनसे सम्पर्क किया जाता है। इस दौरान कई बच्चे झूठी कहानी भी बताते हैं। परिजनों से सम्पर्क होने पर बच्चे को सौंपने की कार्रवाई की जाती है। जिनके अभिभावक नहीं मिलते, उन बच्चों को शेल्टर होम पहुंचा दिया जाता है।

स्टेशन पर इसलिए मिलते हैं बच्चे

- ट्रेन में सफर के दौरान अभिभावकों से अलग हो जाना।
- परिवार से दूर होस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाले कई बच्चे होस्टल से भाग आते है।
- परिवार के सदस्यों द्वारा डांटने पर नाराज होकर घर छोड़ देना।
- किशोरावस्था में प्रेम संबंध।
- नौकरी की तलाश में घर छोडऩा।

कब कितने मिले
माह बच्चे
जून 09
जुलाई 22
अगस्त 14
सितम्बर 33
अक्टूबर 39
नवम्बर 28
दिसम्बर 21
जनवरी 17
फरवरी 11
कुल 194

किस राज्य के कितने
राज्य बच्चे
गुजरात 86
उत्तरप्रदेश 27
महाराष्ट्र 18
मध्यप्रदेश 14
बिहार 11
झारखंड 09
पश्चिम बंगाल 06
छत्तीसगढ़ 06
राजस्थान 05
ओडिशा 03
हरियाणा 03
दिल्ली 02
आंध्र प्रदेश 02
दीव-दमण 02

आणंद और भरुच में भी सेंटर शुरू होगा

नवसर्जन ट्रस्ट द्वारा स्टेशन पर चाइल्ड हेल्प डेस्क चलाने के साथ-साथ शहर की ३७ झोपड़पट्टियों में पुनर्वास का कार्य भी किया जाता है। सूरत स्टेशन पर सेंटर कॉर्डिनेटर के साथ बारह स्टाफ सदस्य तैनात किए गए हैं। आगामी दिनों में आणंद तथा भरुच में भी चाइल्ड हेल्प डेस्क शुरू करने का प्रोसेस करीब-करीब पूरा हो गया है।

समीर मेकवान, प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर, नवसर्जन ट्रस्ट, सूरत

ज्यादातर बच्चों को परिवार से मिलवाया

पिछले कुछ महीने में सूरत स्टेशन पर करीब दो सौ लावारिस बच्चों की जानकारी डेस्क को मिली। ज्यादातर बच्चों को परिजनों से मिलवा दिया गया है। सूरत स्टेशन परिसर में डेस्क के सदस्यों को कोई दिक्कत नहीं हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाता है।

सी.आर. गरूड़ा, निदेशक, सूरत स्टेशन