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NAVRATRI PARV: मिट्टी के फैंसी गरबा तैयार, घर-घर में होंगे स्थापित

समुद्र तटीय इलाके में घर-घर में होगा गरबा पूजन, लोकपर्व मनाने की तैयारियां

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NAVRATRI PARV: मिट्टी के फैंसी गरबा तैयार, घर-घर में होंगे स्थापित

NAVRATRI PARV: मिट्टी के फैंसी गरबा तैयार, घर-घर में होंगे स्थापित

सूरत. गुजरात के लोकपर्व नवरात्र के अवसर पर इस बार ढोल की संगत के साथ लोकनृत्य गरबा की रंगत तो देखने को नहीं मिलेगी, लेकिन घर-घर में मां भगवती की आराधना अवश्य की जाएगी। घरों में मातारानी के प्रतीक रूप गरबा की स्थापना होगी और इसके लिए इस बार आकर्षक डिजाइन के मिट्टी के गरबा तैयार किए गए हैं।
गुजरात की परम्परागत नवरात्रि में मां भगवती की प्रतिमा के चारों तरफ गोल घेरे में देर रात तक गरबा नृत्य करते लोग दिखाई देते हैं। वहीं, गांव-देहात व कस्बे में तथा शहरों की गली-सोसायटी में मातारानी के प्रतीक रूप में गरबा स्थापित किया जाता है और फिर रात्रि में उसमें दीप प्रज्ज्वलित कर गरबा नृत्य करते हुए मां शक्ति की आराधना की जाती है। कोरोना महामारी की वजह से इस बार नवरात्रि पर्व के अधिकांश आयोजन स्थगित कर दिए गए हैं और आयोजनों के स्थगित होने का असर गरबा 'मटकीÓ बनाने वालों पर भी पड़ा है।


समुद्र तटीय गांवों में ज्यादा चलन


सूरत समेत दक्षिण गुजरात के समुद्र तटीय गांवों में नवरात्रि पर्व के दौरान गरबा स्थापना का प्रचलन है और यहां छोटे-बड़े गांवों में लोग घर-घर में नवरात्र पर्व के अवसर पर शक्तिस्वरूपा मातारानी को गरबा के रूप में स्थापित करते हैं और फिर रात्रि में गरबा नृत्य के साथ उनकी आराधना की जाती है। समुद्र तटीय इलाके के अलावा शहर की गलियों और सोसायटियों में घरों में भी कई लोग गरबा की स्थापना करेंगे।

लाइटिंग भी की है इस बार


सादे गरबे मुंबई, मोरबी समेत अन्य शहरों से मंगवाकर उन्हें आकर्षक रूप दिए जाने का काम सूरत में कई कारीगर कर रहे हैं। इन्हीं में शामिल जय पटेल ने बताया कि आकर्षक फैंसी गरबा तैयार करने का काम वे परिवार समेत पिछले डेढ़-दो माह से कर रहे हैं। इसमें लेस, स्टोन, कांच, कलर समेत अन्य कई फैंसी आयटमों के उपयोग के साथ-साथ इस बार लाइटिंग गरबा भी तैयार किए गए हैं।


इस पर भी कोरोना का है असर


परवत पाटिया क्षेत्र में मिट्टी के बरतन समेत अन्य सामग्री के विक्रेता विनोद प्रजापति ने बताया कि गतवर्ष मुंबई से पंद्रह सौ गरबा मंगवाए थे जबकि इस बार कोरोना की वजह से यह संख्या उन्होंने आधी ही रखी है। 50 से 500 रुपए तक के गरबा कलश वे रखते हैं, लेकिन इस बार कोरोना महामारी की वजह से गरबा कलश खरीदने में लोगों ने ज्यादा रुचि नहीं दिखाई है अन्यथा पहले बुकिंग भी होती थी।