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नई सिविल अस्पताल : जबड़े से 100 ग्राम का ट्यूमर निकाला

- महाराष्ट्र के किशोर को असहनीय दर्द से मिली राहत - डेंटल, ईएनटी और एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों ने किया नि:शुल्क ऑपरेशन

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नई सिविल अस्पताल : जबड़े से 100 ग्राम का ट्यूमर निकाला

नई सिविल अस्पताल : जबड़े से 100 ग्राम का ट्यूमर निकाला

सूरत. सरकारी नई सिविल अस्पताल के डेंटल, ईएनटी और एनेस्थीसिया विभाग की 'मल्टी डिसिप्लिनरी टीम' के डॉक्टरों ने महाराष्ट्र के नंदूरबार निवासी 16 वर्षीय किशोर के जबड़े से 100 ग्राम का ट्यूमर निकाल कर नया जीवन दिया। निजी अस्पतालों में ऐसे ऑपरेशन का खर्च 80 हजार रुपए आता है। वहीं, सरकारी अस्पताल में नि:शुल्क सर्जरी से किशोर को दर्द छूटकारा मिलने से पूरा परिवार खुश है और डॉक्टरों का आभार जताया।

जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के शाहदा तहसील के वैजली गांव के दुर्गेश भरत पाटिल 11वीं विज्ञान विषय का छात्र है। पिछले डेढ़ माह से दुर्गेश मुंह के बाए जबड़े में सूजन और दर्द से परेशान था। उसे सांस लेने, बोलने और खाने समेत दैनिक गतिविधियों में दिक्कत हो रही थी। दुर्गेश के पिता भरत खेती कर परिवार चलाते हैं। उन्होंने बेटे का निजी अस्पताल में जांच करवाई तो 80 हजार रुपए खर्च होने की बात कही गई। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण उन्होंने करीबी रिश्तेदार को बीमारी और माली हालत के बारे में बताया। इसके बाद वह दो अक्टूबर को नई सिविल अस्पताल आए, जहां डॉक्टरों ने दुर्गेश को भर्ती कर लिया। एमआरआई रिपोर्ट में जबड़े के आगे के हिस्से में गांठ होना पता चला। कैंसर व जान जाने का था खतरा : दंत विभाग के डॉ. गुणवंत परमार, ईएनटी विभाग के डॉ. जैमिन कॉन्ट्रेक्टर और सीनियर रेजिडेंट डॉ. प्राची रॉय ने पांच घंटे का सफल ऑपरेशन कर ट्यूमर निकाल दिया। सर्जरी के दौरान नर्सिंग स्टाफ के साथ मेडिकल टीम को भी मशक्कत करनी पड़ी। डेंटल विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. गुणवंत परमार ने कहा ??कि पूरी टीम इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को पूरा कर बहुत खुश है। अगर समय रहते इस ट्यूमर को जबड़े से नहीं हटाया जाता तो मरीज को कैंसर होने और जान जाने का भी खतरा था। असहनीय दर्द के कारण नींद और भोजन की कमी के कारण दुर्गेश का वजन कम हो गया था। जब वे सिविल आए तो उनके शरीर में खून की मात्रा भी बहुत कम थी। ऑपरेशन के बाद दुर्गेश को लंबे समय के दर्द से मुक्ति मिल गई है। अब दुर्गेश पूरी तरह स्वस्थ है, ऑपरेशन के बाद उनका हिमोग्लोबिन लेवल बढक़र 9.00 हो गया है। अब वे बिना किसी डर के सामान्य जीवन जी सकता है।