
सूरत मनपा आयुक्त समेत केंद्र और राज्य को नोटिस
सूरत. देश की सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में से एक तापी को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) गंभीर हुआ है। एक एनजीओ की पहल पर एनजीटी ने सूरत मनपा आयुक्त समेत केंद्र और राज्य सरकार के आला अधिकारियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। इस मामले पर १७ अगस्त को सुनवाई होगी। उससे पहले संबंधित अधिकारियों को एनजीटी के समक्ष जवाब सौंपना होगा। तापी नदी के प्रदूषण को लेकर राजस्थान पत्रिका समय-समय पर समाचार प्रकाशित करता रहा है।
करीब चार साल पहले एक निजी संस्था ने देश की सभी महत्वपूर्ण नदियों का सर्वे किया था, जिसमें अधिकांश नदियों का पानी आचमन के लायक भी नहीं बचा था। उस रिपोर्ट में तापी उन्हीं नदियों में से एक थी, जिसका पानी पीना तो दूर, स्नान के लायक भी नहीं रहा है। इस रिपोर्ट को न राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया और न स्थानीय प्रशासन तथा नहर विभाग ने। समय के साथ तापी में प्रदूषण लगातार बढ़ता रहा। स्वच्छता के नाम पर चलाए गए अभियान भी तापी पर बेअसर रहे। मनपा प्रशासन ने पिछले दिनों तापी शुद्धिकरण के लिए 922.18 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान तैयार किया है, जो फिलहाल फाइलों में ही घूम रहा है।
इससे पहले कि मास्टर प्लान पर केंद्र की हरी झंडी मिलती, एक एनजीओ नव युवा संगठन ने तापी में बढ़ रहे प्रदूषण की शिकायत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में की। एनजीटी की पुणे बैंच के जज एसपी वांगड़ी और डॉ. नगीन नंदा ने इसे गंभीरता से लिया। एनजीओ को पर्यावरण हित याचिका (एन्वायरमेंट इंटरेस्ट लिटिगेशन) दाखिल करने की सलाह दी। एनजीओ की इआइएल पर संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने राज्य सरकार में नर्मदा जल संपत्ति विभाग के सचिव, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सचिव, प्रदेश में शहरी विकास के अग्र सचिव, जीपीसीबी, प्रदेश सरकार के वन एवं पर्यावरण सचिव, सूरत कलक्टर और सूरत मनपा आयुक्त को नोटिस जारी कर 17 अगस्त को हाजिर होने के आदेश दिए हैं। इससे पहले संबंधित सभी पक्षों को एनजीटी के समक्ष जवाब पेश करना होगा।
इआइएल में मांग
एनजीओ ने एनजीटी में दाखिल इआइएल में नदी के पट का नक्शा बनाने, नदी के पट क्षेत्र में हो रहे अवैध कामों को रोकने, नदी में छोड़े जा रहे गंदे पानी को रोकने, नदी के प्रदूषण को लेकर स्टेटस रिपोर्ट तैयार कर सार्वजनिक किए जाने की मांग की है।
एनजीओ ने यह मुद्दे उठाए
- तापी में जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। सूरत मनपा की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
- मनपा पर पर्यावरण संरक्षण के कानून के उल्लंघन का आरोप।
- तापी नदी में और आस-पास पानी को प्रदूषित करने वाले कारकों को रोकने में मनपा विफल।नदी के पट की क्षमता कम हो रही है। जलीय वनस्पतियां उग रही हैं। इससे पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है। मच्छरों की उत्पत्ति हो रही है, जिससे तापी किनारे रह रहे लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है।
- गटर का पानी सीधे तापी में छोड़ा जा रहा है।
- प्रदूषण और वनस्पति के कारण कछुआ, मछली और अन्य जलचरों का अस्तित्व संकट में।
Published on:
31 Jul 2018 09:53 pm
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