
वापी. वापी से सटे शहरी व ग्रामीण स्तर पर एपीएमसी मार्केट के अलावा हाईवे किनारे भी तंबू लगाकर कच्चे पके आम की बिक्री हो रही है। वापी में स्थिति इससे उलट है। यहां एमपीएमसी मार्केट तो है, लेकिन वहां आम नहीं है। इससे वापी व नजदीकी क्षेत्र के किसानों को भी आम लेकर अन्य एपीएमसी मार्केट में जाना पड़ रहा है।
सूरत के बाद सबसे तेज विकसित हो रहे वापी में आज भी कई सहूलियतों का अभाव है। हाल में आम की सीजन है। वलसाड, पारडी, उदवाडा , कपराडा, उदवाडा की एपीएमसी मार्केट में आम की आमद शुरु हो गई है। हर साल यहां व्यापक पैमाने पर आमों की खरीद-बिक्री होती है। इससे स्थानीय लोगों को भी आम वाजिब दर पर मिलते हैं। परंतु वापी में ऐसा नहीं होता है। ए ग्रेड की वापी नपा में न तो सब्जी मंडी है, न एपीएमसी मार्केट।
एपीएमसी मार्केट न होने से लोगों को आम तो मिल रहे हैं, मगर केमिकल से पकाए गए। जबकि एपीएमसी मार्केट में कच्चे आम की आमद रहने से लोग उसे ले जाकर घर पर पकाते हैं। पके आम व्यापारियों द्वारा अन्य स्थानों की अपेक्षा ज्यादा दाम में बेचे जा रहे हैं। आम के लिए लोगों को हाईवे किनारे करमबेला से लेकर भिलाड तक जाना पड़ता है।
एपीएमसी मार्केट बन गया गोदाम
करीब दो दशक पहले हाईवे से सटकर यहां एपीएमसी मार्केट बनाया गया थी। मगर आबादी से दूर हाईवे पर स्थित मार्केट की दुकानें गोदाम बनकर रह गई हैं। कोई व्यापारी यहां सामान नहीं बेचता। ज्यादातर लोगों को एपीएमसी मार्केट है भी या नहीं, यही पता नहीं है।
नहीं आते खरीदी करने
एपीएमसी मार्केट हाईवे किनारे होने से लोग यहां खरीदी करने नहीं आते हैं। इससे दुकानदार इनका उपयोग गोदाम की तरह कर रहे हैं। यदि यह मार्केट शहरी विस्तार में होता तो ग्राहक भी आते और आम के सीजन में कच्चे आम से यहां के मार्केट भी सजते।
राजेश शाह, सदस्य, एपीएमसी मार्केट
Published on:
27 Apr 2018 09:56 pm
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