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स्कूलों की फीस पर अटके फैसले ने उड़ा रखी है कइयों की नींद

शैक्षणिक सत्र खत्म होने को आया, विवाद नहीं सुलझा, स्कूल वसूली पर आमादा, अभिभावकों का विरोध प्रदर्शन जारी

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सूरत. स्कूल फीस को लेकर विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। स्कूल संचालक फीस वसूलने पर आमादा हंै तो अभिभावक फीस के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। फीस के बारे में ठोस निर्णय नहीं होने के कारण स्कूलमनमानी फीस ले रहे हैं, जबकि अभिभावक फीस जमा नहीं करने पर अड़े हुए हैं। सूरत की फीस रेग्यूलेटर कमेटी (एफआरसी) के ढीले रवैए के कारण स्कूलऔर अभिभावक, दोनों परेशान हैं। कागजी आदेश पर अमल करवाना भी मुश्किल हो रहा है।
शैक्षणिक सत्र 2017-18 की शुरुआत में राज्य सरकार ने स्कूल फीस को लेकर बड़ा फैसला किया था। प्राथमिक स्कूल की फीस 15 हजार, उच्चतर माध्यमिक की 25 हजार और विज्ञान वर्ग की 30 हजार रुपए तय की गई थी। यह आदेश जारी होते ही राज्यभर में हंगामा शुरू हो गया। अभिभावक यही फीस देने के लिए स्कूलों के सामने विरोध प्रदर्शन करने लगे तो स्कूल संचालकों ने सरकार के आदेशानुसार फीस वसूलने से मना कर दिया। सरकार ने निजी स्कूलों पर अंकुश लगाने के लिए एफआरसी का गठन किया। निजी स्कूल संचालक इसके सामने भी नहीं झुके। मामला अदालत पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के नियम के अनुसार फीस वसूलने का आदेश दिया और एफआरसी में तब्दीली करने को कहा। इसमें भी सरकार की ओर से विलंब होने के कारण कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया। इससे मामला उलझता जा रहा है।

प्रोविजनल फीस पर स्पष्टता नहीं
विवाद सालभर की फीस का नहीं, प्रोविजनल फीस का भी है। प्रोविजनल फीस को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। राज्य सरकार ने प्रोविजनल फीस को लेकर नियम नहीं बनाए, इसलिए स्कूल मनमानी प्रोविजनल फीस वसूल रहे हैं। स्कूलों का कहना है कि जो फीस उन्होंने तय की है, वही प्रोविजनल फीस है। दूसरी ओर अभिभावकों का कहना है कि प्रोविजनल फीस काफी ज्यादा है। अन्य फीस जोडऩे से रकम और बढ़ जाती है।

एफआरसी में रुका हुआ फैसला
सूरत जिले के लिए बनाई गई एफआरसी कमेटी की बैठक समय पर नहीं हो रही है। कोई न कोई पदाधिकारी अवकाश पर होता है। इस वजह से फैसले में विलंब हो रहा है। एफआरसी की ओर से फैसला नहीं आने के कारण स्कूल मनमानी कर रहे हैं। जब भी एफआरसी की बैठक होती है, अभिभावकों को आश्वासन देकर शांत कर दिया जाता है।

डीईओ एफआरसी पर फोड़ रहे हैं ठीकरा
जिला शिक्षा अधिकारी इस मामले में सिर्फ शिकायतें सुन रहे हैं। शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वह भी एफआरसी के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। जब भी किसी स्कूल में विवाद बढ़ता है, जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से उस स्कूल में एक अधिकारी भेजकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जाता है।

स्कूलों पर हो चुका है अपहरण का केस
फीस को लेकर शहर की कई स्कूलों पर बच्चों के अपहरण तक के मामले थाने में दर्ज करवाए जा चुके हैं। आरोप है कि फीस नहीं देने पर बच्चों को स्कूल में कैद कर लिया गया। कई अभिभावकों ने पुलिस के साथ जाकर बच्चों को स्कूल से छुड़वाया। ऐसे मामलों में भी जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत की गई, लेकिन स्कूलों को मात्र नोटिस देकर जवाब मांगने की कार्रवाई हुई।

पूरा सिस्टम फेल
फीस के मामले को लेकर पूरा सिस्टम फेल साबित हो रहा है। फीस कमेटी की बैठक नहीं होने के कारण फैसला नहीं हो रहा है तो सरकार की ओर से सिर्फ आदेश दिए जा रहे हैं। सरकार के परिपत्र वेबसाइट पर जारी कर जिला शिक्षा अधिकारी अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं। आदेशों पर अमल हो रहा है या नहीं, इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है। सिस्टम की नाकामी के कारण अभिभावक दुविधा से घिरे हुए हैं और स्कूल मनमानी फीस वसूल रहे हैं।

जल्द होगा फैसला
फीस के मामले को लेकर जल्द कड़ा फैसला किया जाएगा। सभी स्कूलों को 21 मार्च तक प्रपोजल देने का आदेश दिया है। इसके बाद एफआरसी प्रोविजनल फीस और फीस तय कर देगी। पुरानी फीस को लेकर मामला अदालत में है। विवाद को जल्द सुलझाया जाएगा। निजी स्कूल एफआरसी के फैसले के बाद आदेश का पालन नहीं करेंगे तो जुर्माने के साथ मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जाएगी।
अशोक दवे, चेयरमैन, एफआरसी