29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अब नहीं गा सकेंगे ‘आज पहली तारीख है…’

मनपा का फरमान : अन्य सरकारी दफ्तरों की तर्ज पर किया बदलाव, अगस्त माह से सात तारीख को जमा होगी कार्मिकों की तनख्वाह

2 min read
Google source verification

सूरत

image

Vineet Sharma

Jun 04, 2018

patrika

सूरत.किशोर कुमार की आवाज में 'पहली तारीख' फिल्म में कमर जलालाबादी का लिखा गीत 'खुश है जमाना आज पहली तारीख है...' सरकारी कर्मचारियों की जुबान पर रहता था। टीम मनपा भी महीने की पहली तारीख को इस गीत की धुन पर झूमती थी। आयुक्त के एक फरमान ने मनपा कर्मचारियों के वेतन की पहली तारीख को सात तारीख मेंं बदल दिया है। अगस्त से इस पर अमल शुरू हो जाएगा और पहली तारीख का आनंद इतिहास बन जाएगा।

अन्य सरकारी दफ्तरों की तर्ज पर मनपा में भी अधिकारियों-कर्मचारियों की तनख्वाह महीने की आखिरी तारीख को खातों में पहुंच जाती है। महीने की पहली तारीख उनके और परिवार के लिए खुशियों का दिन होता है। आयुक्त ने मनपा प्रशासन के सिस्टम में फेरबदल करते हुए वेतन की तारीख में बदलाव किया है। इस आशय का परिपत्र जारी हो चुका है। इसके मुताबिक अगस्त से कर्मचारियों-अधिकारियों का वेतन माह की सात तारीख को खातों में जमा होगा। आमतौर पर निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे लोगों का वेतन भी माह की सात तारीख को ही खातों में जमा होता है।

इसलिए पड़ी जरूरत

आयुक्त के निर्णय पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया तो खुलकर सामने नहीं आई, लेकिन जानकारों की मानें तो मनपा के कलेंडर को दुरुस्त करने के लिए आयुक्त ने अधिकारियों-कर्मचारियों का कलेंडर बिगाड़ दिया है। माह की अंतिम तारीख तक वेतन बनाने के लिए कार्मिक विभाग को सभी अधिकारियों-कर्मचारियों की डिटेल एक सप्ताह पहले अकाउंट विभाग को भेजनी होती है। इससे बाद के दिनों में छुट्टी पर गए अधिकारियों-कर्मचारियों की डिटेल गड़बड़ा जाती थी और उसे अगले महीने एडजस्ट करना पड़ता था। सात तारीख को वेतन के लिए माह की एक तारीख को जो डिटेल भेजी जाएगी, वह माह के अंतिम दिन तक का अपडेट रहेगी। इससे किसी के अवकाश पर रहने से मनपा का कलेंडर नहीं गड़बड़ाएगा।

वेतनभोगियों का बिगड़ेगा शिड्यूल

वेतन सात तारीख को खाते में डालकर मनपा प्रशासन अपना कलेंडर तो दुरुस्त कर लेगा, लेकिन वेतनभोगियों का शिड्यूल गड़बड़ा जाएगा। वेतनभोगी अधिकांश कर्मचारी-अधिकारी अपने ऋणों की किस्तें और अन्य खर्चे का शिड्यूल पांच तारीख तक बनाकर रखते हैं। इनकी सीधी कटौती खाते से हो जाती है। दस तारीख तक यह भी तय हो जाता है कि महीनेभर के कुल खर्च के बाद हाथ में क्या रहा गया। अब उन्हें पूरे शिड्यूल को रिशिड्यूल करना होगा। कई लोगों का मानना है कि यह मुश्किल पहले महीने ही होगी, उसके बाद सब कुछ शिड्यूल्ड हो जाएगा। जानकारी पहले से हो जाने के कारण कर्मचारी-अधिकारी इसकी व्यवस्था भी पहले से कर लेंगे।

Story Loader