
अंकलेश्वर में 150 से ज्यादा कंपनियों की स्थापना का खुला मार्ग
भरुच.
राज्य सरकार की नई उद्योग नीति से भरुच जिले की कंपनियों मे 13 वर्ष बाद खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है। अंकलेश्वर में 150 से ज्यादा कंपनियों की स्थापना का मार्ग खुल गया है। नई उद्योग नीति में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े कई नियमों को हल्का बनाया गया है, जिससे उद्योग जगत में हर्ष व्याप्त है। इसके साथ-साथ जीआइडीसी स्थित कंपनियों की ओर से छोड़े जाने वाले प्रदूषित पानी में भी इजाफा कर दिया गया है।
जिले के अंकलेश्वर और पानोली में पिछले 10 वर्ष से सीपीसीबी की धारा 18 (बी) 1 के कारण समस्या का सामना कर रहे कंपनियों के संचालकों को राज्य सरकार की नई उद्योग नीति से काफी लाभ पहुंचने वाला है। दोनों जीआइडीसी में प्रदूषित पानी की निकासी के लिए जत्थे को बढ़ा दिया गया है। अंकलेश्वर में 150 नई कंपनियों के आने का रास्ता नई नीति से खुल गया है। दोनों जीआइडीसी में रुके पड़े 15 हजार 500 करोड़ के निवेश से अब चार लाख लोगों को रोजगार मिल सकेगा।
दोनों जीआईडीसी में कंपनियों के विस्तारीकरण की अनुमति नहीं दी जा रही थी जिससे 15 हजार 500 करोड़ रुपए की पूंजी फंसी हुई थी। वाइब्रेंट गुजरात समिति से पहले राज्य सरकार ने नरम रुख अख्तियार किया। सरकार की नई घोषणा से जिले में नई कंपनियों के लिए मार्ग खुल गया है जिसका लाभ स्थानीय बेरोजगारों को भी मिलेगा।
अंकलेश्वर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रमुख महेश पटेल ने कहा कि अंकलेश्वर ऐसेट को पांच एमएलडी प्रदूषित पानी की निकासी करने की मंजूरी सरकार ने दी है। 13 साल बाद कंपनियों का विस्तार होगा। हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। सरकार की घोषणा से कंपनियों को काफी लाभ होगा। गुजरात अब औद्योगिक क्षेत्र में नंबर वन बनेगा।
पानोली में लग सकते हैं 50 से ज्यादा नए उद्योग
पानोली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रमुख बी.एस. पटेल ने कहा कि पानोली जीआइडीसी को भी 01 एमएलडी की मंजूरी दी गई है जिससे 50 पुराने और नए उद्योगों के लिए मार्ग खुल गया है। यहां पर दो से तीन हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
प्रदूषित पानी की निकासी में होगा फायदा
झगडिय़ा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रमुख अशोक पंजवाणी ने कहा कि कंपनियों के केमिकल युक्त पानी को शुद्धिकरण के बाद दरिया में दर तक छोडऩे के लिए ग्रांट की घोषणा सरकार ने की है। इससे झगडिय़ा जीआइडीसी से कंपनियों का पानी सीधे ही दरिया में पाइपलाइन से निकला जाएगा। इससे नई कंपनियों के साथ पुरानी कंपनियों को काफी लाभ होगा। उत्पादन बढऩे के साथ सरकार को राजस्व की प्राप्ति भी होगी।
Published on:
13 Dec 2018 09:54 pm
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