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हमारा सूरत जाएगा 500 वर्ग किमी के पार

आने वाले दिनों में सूरत शहर की सीमा से बाहर के कई गांवों को शहर बनाने की कवायद शुरू होगी। शहर की हद में शामिल होने के बाद इन गांवों पर सूरत मनपा के नि

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Ours will be around 500 sq km

Ours will be around 500 sq km

सूरत।आने वाले दिनों में सूरत शहर की सीमा से बाहर के कई गांवों को शहर बनाने की कवायद शुरू होगी। शहर की हद में शामिल होने के बाद इन गांवों पर सूरत मनपा के नियम-कायदे चलेंगे। राज्य सरकार की पहल के बाद मनपा प्रशासन ने भी अपना दायरा बढ़ाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं।

वर्ष २००६ में हुए विस्तार के बाद सूरत शहर का क्षेत्रफल ३२६ वर्ग किमी तक फैल गया था। एक दशक बाद फिर शहर के विस्तार की कवायद शुरू हुई है। विस्तार के बाद शहर का क्षेत्रफल पांच सौ वर्ग किमी से ज्यादा हो जाएगा। राज्य सरकार ने सूरत महानगर पालिका प्रशासन से शहर का एक्सपेंशन प्लान मांगा है।

चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से ऐन पहले राज्य सरकार ने एक परिपत्र भेजकर सूरत महानगर पालिका प्रशासन को इस दिशा में काम करने के लिए कहा था। आचार संहिता लगने के बाद यह काम होल्ड पर रखा गया था। चुनाव संपन्न होने के बाद मनपा टीम सक्रिय हुई और इस प्रस्ताव पर कवायद शुरू की गई। मनपा टीम ने शहर के विकास की संभावनाएं तलाशने के साथ ही इसके ड्राफ्ट पर काम शुरू कर दिया है।

आठ प्रवेश द्वार, गुंजाइशें अपार

फिलहाल आठ मुख्य रास्ते हैं, जिन्हें शहर के एंट्री गेट के रूप में समझा जा सकता है। तापी नदी के किनारे दोनों ओर (डूमस और भाटा) हैं। डूमस को मनपा पहले ही शहर में शामिल कर चुकी है और उसके आगे समुद्र होने के कारण विकास के रास्ते बंद हो जाते हैं। नदी पार भाटा की ओर के कुछ गांवों के बाद औद्योगिक पट्टी हजीरा शुरू हो जाती है। ऐसे में इस ओर विकास की खास संभावनाएं फिलहाल नहीं दिखतीं। नदी पार जहांगीरपुरा से आगे ओलपाड की ओर बढ़ते हैं तो सरोली और अन्य गांवों को शहर में शामिल किया जा सकता है। जिस तरह से शहर का विकास हो रहा है और बिल्डर लॉबी इस तरफ सक्रिय हुई है, विकास की संभावना देखी जा सकती है।

अमरोली-कोसाड से आगे सायण की तरफ भी शहर के विकास के रास्ते खुले हैं। डिंडोली से आगे खरवासा रोड भी विकसित हो चुका है। यह रास्ता और आगे तक जा सकता है। सरथाण से आगे की दिशा में कामरेज तक शहर के विस्तार को कई विकल्प मौजूद हैं। सहारा दरवाजा से आगे सारोली की तरफ कडोदरा तक का पूरा क्षेत्र शहर के विकास के उपयुक्त नजर आता है। सारोली में विकसित हो रहे कपड़ा मार्केट से इसे और बल मिल रहा है।

कडोदरा तक रोजाना बड़ी संख्या में लोग काम-धंधे के लिए आना-जाना करते हैं। उधना से आगे सचिन ग्राम पंचायत भी फिलहाल सूरत के अघोषित ट्विन सिटी के रूप मेें अपनी पहचान बना रही है। यहां बड़ी संख्या में उद्योग पैर पसार चुके हैं। शहर के हजारों लोग रोजाना नौकरी और व्यवसाय के लिए सचिन-सूरत के बीच आना-जाना करते हैं। यह क्षेत्र भी शहर की सीमा में शामिल होने के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।


चार साल पहले भी हुई थी कवायद

दस साल पहले जब मनपा ने अपना विस्तार किया था तो क्षेत्रफल बढक़र ३२६ वर्ग किमी हो गया था। मनपा ने इन क्षेत्रों में प्राथमिक सुविधाओं पर फोकस किया। मनपा के पास फिलहाल जो बड़े प्रोजेक्ट्स हैं, उनमें अधिकांश वर्ष २०२० तक पूरे हो जाएंगे। उसके बाद सूरत महानगर पालिका सेचुरेशन की हालत में होगी। ऐसे में मनपा के लिए भी जरूरी हो गया था कि शहर के विस्तार पर फोकस किया जाए। मनपा प्रशासन ने करीब चार साल पहले भी ऐसी कवायद शुरू की थी। उस वक्त मनपा ने विस्तार का ड्राफ्ट तैयार कर लिया था। बाद में किसी वजह से वह ठंडे बस्ते में चला गया और कवायद आगे नहीं बढ़ सकी। अब राज्य सरकार से मांगे जाने के बाद मनपा टीम एक बार फिर इस तरफ आगे बढ़ रही है।

तैयार होगा खाका

&शहर के विकास को लेकर खाका तैयार किया जाना है। इसके लिए मनपा टीम को लगाया है। सूडा के साथ मिलकर संबंधित अधिकारी ड्राफ्ट तैयार करेंगे। उसके बाद इस पर आगे बढ़ा जाएगा।
एम. थेन्नारसन, आयुक्त, सूरत मनपा

विनीत शर्मा