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रोज आने वाले 200 मरीजों में 60-70 का ऑक्सीजन लेवल 95 प्रतिशत से कम

- अनलॉक-2.0 में सूरत में सर्वाधिक 6,263 कोरोना मरीज मिले, 316 की मौत - मौत के मामले भी बढ़े, चिकित्सकों की बढ़ी चिंता - ऑक्सीजन घटने के बाद रिकवर होने में मरीज को लगते हैं 15 से 25 दिन,

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रोज आने वाले 200 मरीजों में 60-70 का ऑक्सीजन लेवल 95 प्रतिशत से कम

रोज आने वाले 200 मरीजों में 60-70 का ऑक्सीजन लेवल 95 प्रतिशत से कम

सूरत.

शहर में कोरोना मरीजों की संख्या बढऩे के साथ मौत के मामले बढ़ रहे हैं। मनपा आयुक्त ने शुक्रवार को शहरवासियों से फिर अपील की है कि ऑक्सीजन लेवल 95 से कम होने पर तुरंत अस्पताल में भर्ती होने चले जाएं। न्यू सिविल अस्पताल के कोविड-19 ओपीडी में आने वाले 200 मरीजों में से 60 से 70 संदिग्ध मरीजों में ऑक्सीजन लेवल की कमी देखी जा रही है। इनमें से 15 से 20 तो ऐसे मरीज होते हैं, जिनके शरीर में ऑक्सीजन लेवल 70-80 के बीच ही देखने को मिलता है।

आठवा, रांदेर, वराछा में सबसे अधिक

शहर में अब तक कोरोना मरीजों की संख्या 10,976 है। इनमें गंभीर 489 मरीजों की मौत हो चुकी है। अनलॉक-2.0 में सबसे अधिक 6,263 संक्रमित मिले और सर्वाधिक 316 मृत्यु हुई है। मनपा आयुक्त बंछानिधि पाणि ने बताया कि पिछले दिनों में अठवा, रांदेर और वराछा-ए जोन में सबसे अधिक संक्रमित मिले हैं। इसमें अठवा जोन में वरिष्ठ नागरिक अधिक संक्रमित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कितने लोग ऑक्सीजन लेवल 95 से कम होने के बाद भी अस्पताल में इलाज के लिए आने से घबराते हैं या फिर गंभीरता से नहीं लेते। ऐसे केसों में कोरोना मरीजों की मौत ज्यादा हो रही है। इसलिए शहरवासियों से अपील की है कि ऑक्सीजन लेवल 95 से कम हो तो बिना सोच विचार किए तत्काल अस्पताल आएं।


ऑक्सीजन सपोर्ट वाले मरीज बढ़े

राजस्थान पत्रिका ने न्यू सिविल अस्पताल के कोविड-19 हॉस्पिटल में कोरोना मरीजों का इलाज करने वाले सीनियर चिकित्सकों से ऑक्सीजन लेवल कम के साथ आने वाले मरीजों के बारे में बातचीत की। चिकित्सकों ने बताया कि कोविड-19 ओपीडी में प्रतिदिन 200 से 250 मरीज कोरोना इलाज के लिए आते हैं। इसमें 60 से 70 मरीजों में ऑक्सीजन लेवल की कमी देखने को मिलती है। इनमें से कुछ में तो ऑक्सीजन लेवल 70 से 80 के बीच देखने को मिलता है। ऐसे मरीजों की संख्या 15 से 20 के बीच होती है।

चिकित्सकों ने बताया कि ऑक्सीजन लेवल घटने के कारण संदिग्ध कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर भर्ती करना होता है। ऐसे मरीज बढ़े हैं। कितने ही मरीज ऐसे हैं, जिनमें उच्चतम 15 लीटर प्रतिदिन ऑक्सीजन दिया जा रहा है। इस लेवल को मेनटेन करने में चिकित्सकों को पन्द्रह से पच्चीस दिन लग जाते है। लेकिन कुछ गंभीर मरीजों की स्थिति अधिक बिगड़ जाती है जिसके चलते उन्हें बाइपेप या वेंटिलेटर सपोर्ट पर भर्ती करना होता है। इससे कोरोना मरीजों की मृत्युदर भी बढ़ रही है।

गौरतलब है कि, लिम्बायत, कतारगाम और सेंट्रल जोन के बाद अनलॉक-2.0 में कोरोना के सबसे अधिक मरीजों के साथ अठवा, रांदेर और वराछा-ए जोन हॉट स्पॉट बनकर उभरे है। हालांकि वराछा-ए तथा बी जोन में स्वास्थ्य विभाग कोरोना को काबू में करने के लिए एड़ी चोटी का जोड़ लगाए हुए है। लेकिन अब रांदेर और अठवा के हॉट स्पॉट बनने से स्वास्थ्य विभाग की परेशानी और बढ़ गई है।

अनलॉक-2.0 में सूरत में कोरोना की स्थिति

जोन- कोरोना मरीज

कतारगाम- 1110

रांदेर- 1000

वराछा-ए- 926

अठवा- 839

वराछा-बी- 732

सेंट्रल- 709

लिम्बायत- 526

उधना- 421

कुल- 6263