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दिवाली की खरीद से भी नहीं मिली ऑक्सीजन

ईद और रक्षाबंधन की खरीद कमजोर रहने के बाद कपड़ा व्यापारियों को दिवाली की खरीद से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन इस बार भी उन्हें राहत नहीं मिली है। व्यापारियों का कहना है कि यदि दिवाली पर खरीद अच्छी रहती तो मंदी से पीडि़त कपड़ा उद्योग को ऑक्सीजन मिल जाती, लेकिन ऐसा नहीं होने से कारोबार डांवाडोल है।

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Oxygen not found even by Diwali

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सूरत।ईद और रक्षाबंधन की खरीद कमजोर रहने के बाद कपड़ा व्यापारियों को दिवाली की खरीद से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन इस बार भी उन्हें राहत नहीं मिली है। व्यापारियों का कहना है कि यदि दिवाली पर खरीद अच्छी रहती तो मंदी से पीडि़त कपड़ा उद्योग को ऑक्सीजन मिल जाती, लेकिन ऐसा नहीं होने से कारोबार डांवाडोल है।

जीएसटी लागू होने के बाद छोटे और मध्यम व्यापारी कारोबार घटने की शिकायत कर रहे हैं। उनका कहना है कि कपड़ा व्यापार में यही हालात रहे तो उन्हें व्यापार बदलना पड़ेगा। व्यापारियों को हर त्योहार और सीजन पर आस रहती है, लेकिन निराशा ही हाथ लगती है। दो-तीन महीने पहले व्यापारियों को उम्मीद थी कि ईद और रक्षाबंधन पर साड़ी तथा ड्रेस मटीरियल्स में अच्छी खरीद रहेगी, लेकिन कारोबार उनकी अपेक्षा से 30 प्रतिशत कम रहा। फिर उन्हें दिवाली की खरीद से ऑक्सीजन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वह भी धू्मिल हो गई।

इन दिनों दिवाली के लिए अंतिम दौर की खरीद चल रही है। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली पर जितने कारोबार की उम्मीद थी, उसका आधा भी नहीं हुआ। इसके अलावा रिटेल मार्केट में खरीद नहीं होने के कारण यह आशंका भी है कि यदि अन्य राज्यों में खरीद नहीं हुई तो रिटर्न गुड्स भी बढ़ जाएगा। उत्तर भारत के राज्यों में व्यापार करने वाले व्यापारियों का कहना है कि यूपी, बिहार और दिल्ली की मंंडी में खरीद ठीक रही, लेकिन अन्य मंडियों में खरीद कमजोर रहने से वह निराश हैं। दक्षिण के राज्यों में भी खरीद मध्यम रही। केरल में आई बाढ़ ने व्यापार को प्रभावित किया। यार्न की कीमत में उतार-चढ़ाव के कारण व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। यार्न की कीमत बढऩे पर जिन लोगों ने ज्यादा कीमत पर माल खरीदा था, वह अब यार्न की कीमत घटने पर माल वापस भेज रहे हैं और सौदा रद्द करवा रहे हैं।

कपड़ा व्यापारियों के सामने एक बड़ी समस्या पेमेंट की भी है। जीएसटी के बाद उन्हें लग रहा था कि रिटर्न फाइल करने की व्यवस्था के कारण उन्हें बाहर के व्यापारियों से हर महीने पेमेंट मिल जाएगा, लेकिन इसका उल्टा हो रहा है। अन्य राज्यों के व्यापारी छह महीने पहले पेमेंट नहीं कर रहे हैं। पहले 100-120 दिन में पेमेंट मिल जाता था, अब 200-225 दिन में भी पेमेंट नहीं मिल रहा है। एक ओर पेमेंट नहीं मिल रहा है तो दूसरी ओर मिल मालिक और एम्ब्रॉयडरी सहित अन्य उद्यमियों को पेमेंट करना पड़ रहा है। इससे व्यापारियों की हालत पतली है। यार्न की कीमत को लेकर चिंतित वीवर्स भी पेमेंट की समस्या से जूझ रहे हैं।

वीवर्स का कहना है कि यार्न की कीमत लगातार बढऩे और ग्रे की कीमत स्थिर रहने के कारण उनका लाभ घटता गया। यार्न व्यवसायी यार्न के सौदे पर कोरा चेक ले लेते हैं और समय पर पेमेंट नहीं करने पर ब्याज भी लेते हंैं, लेकिन वीवर्स यदि व्यापारी से पेमेंट मांगते हैं तो व्यापारी उनसे ग्रे खरीदना बंद कर देता है। बड़े वीवर्स तो निजी फाइनेंसरों से रकम लेकर काम चला रहे हैं, लेकिन छोटे वीवर्स के लिए आर्थिक संकट का माहौल खड़ा हो गया है।

अब लग्नसरा और पोंगल पर नजर

कपड़ा व्यापारियों की नजर अब लग्नसरा (नवंबर) और पोंगल (जनवरी) पर है। हालांकि नवंबर में कम तिथियां होने के कारण व्यापार कम ही रहेगा, फिर भी व्यापारियों को लग्नसरा से उम्मीद है। दक्षिण भारत में मनाए जाने वाले पोंगल के मौके पर साड़ी और ड्रेस की मांग रहती है। व्यापारियों को पोंगल पर भी अच्छी खरीद की उम्मीद है।

उम्मीद जैसी नहीं

दिवाली पर खरीद हुई, लेकिन व्यापारियों की उम्मीद जैसी नहीं रही। पिछले सभी त्योहारों पर खरीद कमजोर रही। व्यापारियों को दिवाली की खरीद से बड़ी उम्मीद थी, लेकिन निराशा मिली। हरीश साहू, व्यापारी