
मौसमी बीमारियों के मरीज बढ़े, न्यू सिविल अस्पताल में जमीन पर लगाने पड़े बिस्तर
सूरत. शहर में बारिश अपने साथ कई बीमारियां लेकर आती है। मानसून में पांच-छह बीमारियां ज्यादा फैलती हैं। इनमें मलेरिया, डेंगू, हैजा, टाइफाइड, पीलिया और चर्म रोग शामिल हैं। न्यू सिविल अस्पताल के ओपीडी में एक सप्ताह से मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। रोजाना भर्ती किए जाने वाले बीस मरीजों में पांच मलेरिया के और एक डेंगू का होता है। मरीजों की संख्या बढऩे के कारण उन्हें वार्ड में जमीन पर बेड लगाकर भर्ती किया जा रहा है।
बारिश के कारण मौसम में नमी, गड्ढों और छोटे तालाबों में जमा पानी में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। यही बैक्टीरिया और रोगजनित कीटाणु लोगों को बीमार कर देते हैं। बच्चों के बारिश में भीगने से तबीयत खराब होने की शिकायतें बढ़ जाती हैं। न्यू सिविल अस्पताल में मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. महेश शोलु ने बताया कि बारिश में जल भराव की समस्या सामने आती है। उसमें पैदा होने वाले मलेरिया और डेंगू के मच्छर लोगों को बीमार कर देते हैं। मनपा की ओर से कीटनाशक दवाओं के छिड़काव और फोगिंग मशीन से मच्छरों पर नियंत्रण के कदम जरूरी हैं। डॉ. शोलु ने बताया कि बारिश में बड़ी संख्या में मरीजों का ओपीडी में आना जारी है। बारिश से पहले मेडिसिन विभाग में सुबह और शाम की ओपीडी में करीब तीन सौ मरीज आते थे, लेकिन अब साढ़े तीन सौ से चार सौ मरीज आ रहे हैं। रोजाना भर्ती होने वाले बीस मरीजों में पांच मलेरिया और एक डेंगू का होता है। इसके अलावा सर्दी-खांसी, बुखार, पीलिया, टाइफाइड, चिकनगुनिया आदि के मरीज भी आ रहे हैं। मलेरिया के मच्छर घर के बाहर से आते हैं, लेकिन डेंगू के मच्छर साफ पानी में घर में ही पैदा होते हैं। बारिश के सीजन में मौसमी बीमारियों से बचने के उपाय करना अनिवार्य है।
दक्षिण गुजरात के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मानसून सीजन में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर मेडिसिन वार्ड में करीब दस मरीजों को जमीन पर बेड लगाकर भर्ती किया गया। उनको प्वॉइंट चढ़ाने के लिए जमीन पर बेड के नजदीक स्टैंड लगा दिया गया है। आम तौर पर एक वार्ड में चालीस मरीज भर्ती किए जाते हैं। इन दिनों पचास से अधिक मरीज भर्ती हो रहे हैं।
घर में सावधानी जरूरी
बारिश के मौसम में पीने का पानी का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पानी का क्लोरीन की टेबलेट डालकर ही उपयोग करना चाहिए। पीने के पानी को पहले उबाल लिया जाए। घर के आसपास जल भराव नहीं होने दें। चिकित्सकों ने बताया कि शहर में उधना, लिम्बायत, भेस्तान, पांडेसरा, सचिन क्षेत्र के स्लम क्षेत्रों से ज्यादा मरीज आते हैं। महानगर पालिका को बारिश के दौरान इन क्षेत्रों में विशेष अभियान छेडऩा चाहिए।
डेंगू के लक्षण
ठंड लगने के बाद अचानक तेज बुखार।
सिर, मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द, गले में हल्का दर्द।
आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और बढ़ जाता है।
कमजोरी महसूस करना, भूख न लगना, खट्टी डकार।
चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल-गुलाबी रंग की लाइनें।
ऐसे बचे डेंगू से
मच्छरों को पैदा होने से रोकना और उनसे बचाव करना।
घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा न होने दें।
पानी जमा हो तो उसमें पेट्रोल या केरोसीन डालें।
घर में टूटे-फूटे डिब्बे, टायर, बर्तन, बोतलें आदि में बरसाती पानी जमा नहीं होने दें।
-मच्छर साफ पानी में होते हैं, इसलिए पानी की टंकी को बंद रखें।
यह बीमारियां सबसे अधिक
मलेरिया : मलेरिया में निश्चित अंतराल से मरीज को बुखार आता है। हाथ-पैरों में दर्द के साथ कमजोरी महसूस होती है। सिरदर्द और कंपकंपी के साथ ठंड लगती है।
चिकनगुनिया : यह मच्छरों के काटने से होता है। मच्छर रुके हुए पानी में प्रजनन करते हैं और दिन में ही काटते हैं। बुखार, जोड़ों में दर्द आदि इस बीमारी के लक्षण हैं।
टायफायड : यह बीमारी पानी से पैदा होती है। इसके लक्षण सर्दी, गले में खराश, बुखार आदि हैं।
वायरल बुखार : वायरल बुखार बारिश के सीजन में होता है। इसमें मरीज को सर्दी-खांसी, बुखार और शरीर में दर्द हो सकता है, जो 3 से 7 दिन तक रहता है।
पीलिया : यह भी दूषित पानी और भोजन से होता है। इसके लक्षणों में पीला मूत्र, उल्टी, कमजोरी आदि हैं। इस सीजन में उबला पानी पीएं और बाहर का खाना छोड़ दें।
हैजा : यह गंभीर बीमारी दूषित भोजन और पानी के कारण होती है। उल्टी के साथ अधिक दस्त होना हैजे के सामान्य लक्षण हैं। स्वच्छता से इससे बचा जा सकता है।
पेट का संक्रमण : गैस, उल्टी-दस्त, डायरिया और पेट में दर्द। इससे बचने के लिए सड़क किनारे की लारियों पर खाने से बचें, उबला हुआ पानी पीएं
लेप्टोस्पाइरोसिस : दक्षिण गुजरात में लेप्टो के मरीज दिखाई देते हैं। यह बीमारी गंदे पानी या गंदगी के संपर्क में आने से होती है। सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, बुखार, कंपकंपाहट और सूजन इसके लक्षण हैं। इससे बचने के लिए पैरों को ढंककर रखें और हर प्रकार के घाव को अच्छी तरह साफ करें।
घरेलू उपचार से बचें
बारिश के मौसम में न्यू सिविल अस्पताल में सर्दी-खांसी, बुखार, मलेरिया, डेंगू, उल्टी-दस्त के मामले बढ़े हैं। सामान्य बुखार अधिक दिन तक रहे तो तुरंत चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए। घर पर दवाई लेने से बचना चाहिए। कई बार रिपोर्ट में बीमारी डिटेक्ट नहीं होती, लेकिन लक्षणों को ध्यान में रखते हुए उपचार करना होता है।
डॉ. महेश शोलु, एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, न्यू सिविल अस्पताल, सूरत
न्यू सिविल अस्पताल में ओपीडी (मेडिसिन) के मरीज
दिनांक नए पुराने कुल
१८ जुलाई १९० १४८ ३४८
१७ जुलाई १९२ १६५ ३५७
१६ जुलाई १९७ १६१ ३५८
१५ जुलाई १३३ ११६ २४९
१४ जुलाई १३० १३२ २६२
१३ जुलाई २०३ १९९ ४०२
१२ जुलाई १४७ १४७ २९४
Published on:
19 Jul 2018 08:50 pm
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