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अपने ही रुपए के लिए पसीना बहा रहे सूरत के लोग

आरबीआई से सप्लाई रुकने से बैंकों में नकदी का टोटाकई बैंकों ने आरबीआई को मेल कर रुपए मांगे, लेकिन जवाब नहीं मिला
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सूरत

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Pradeep Devmani Mishra

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Updated: 18 Apr 2018, 1:01 AM IST

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सूरत

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से पिछले एक महीने से कुछ बैंकों को नकदी की सप्लाई नहीं किए जाने के कारण बैंकों में रुपयों का टोटा हो गया है। इस कारण एटीएम में भी नकदी का कमी चल रही है। फिलहाल बैंक अन्य शाखाओं से या अपनी डिपोजिट से काम चला रहे हैं, लेकिन आरबीआई ने शीघ्र रुपए नहीं भेजे तो दिक्कत और बढ़ सकती है।
सूरत शहर की कुछ राष्ट्रीयकृत बैंकों और को.ऑपरेटिव बैंकों में इन दिनों नकदी की कमी है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से राष्ट्रीयकृत बैंकों को रुपए नहीं भेजे जा रहे। इसका असर को.ऑपरेटिव बैंकों पर भी हो रहा है। शहर में राष्ट्रीयकृत बैंक और निजी बैंक की कुल सात चेस्ट शाखाएं हैं। कई बैंकों में तो स्थिति यह है कि मैनेजर रुपए की कमी को दूर करने के लिए अपने खास ख्रातेदारों से नकद डिपोजिट करने के लिए फोन कर बुला रहे हैं। नकदी की कमी के चलते कुछ बैंकों ने अपने एटीएम में रुपए डालने बंद कर दिए हैं। एक राष्ट्रीयकृत बैंक के अधिकारी ने बताया कि पिछले एक महीने से उनकी बैंक को रुपए के लिए दिक्कत उठानी पड़ रही है। इस बारे में उन्होंने आरबीआई को कई बार मेल किए, लेकिन न जवाब आया और न रुपए। उन्होंने कहा कि सरकार का यह रवैया समझ नहीं आ रहा। अन्य एक राष्ट्रीयकृत बैंक के उच्च अधिकारी ने बताया कि पिछले दो सप्ताह से बैंकों में जो रकम जमा हो रही है, उसी के आधार पर रोजमर्रा का काम चल रहा है। चेस्ट शाखा से रकम नहीं मिलने के कारण बैंकर्स की हालत खराब है। आरबीआई की ओर से कतिपय कारणों से सूरत समेत अन्य कई शहरों में नकदी की सप्लाई बंद की गई है। इसलिए दिक्कत आ रही है। बैंक में रुपए नहीं होने के कारण ग्रामीण या अन्य शाखाओं से भी रुपए मंगाकर काम चलाया जा रहा है। बैंक से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से हर बैंक को शिड्यूल के अनुसार रुपए दिए जाते हैं। पिछले दिनों कई राज्यों में चुनाव सहित अन्य कारणों से संभवत: एकाध बार रुपए सप्लाई में चूक होने के कारण बैंकों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा फिलहाल बैंक जैसे-तैसे काम चला रहे हैं, लेकिन एकाध सप्ताह तक और रुपए नहीं मिले तो बैंकिंग व्यवस्था डगमगा सकती है।
दक्षिण गुजरात में 45 को.ऑपरेटिव बैंक हैं, जो कि नकदी के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक के चेस्ट पर आधारित हंै। इन दिनों नकदी के अभाव में राष्ट्रीयकृत बैंक उन्हें बहुत कम रकम दे रहे हैं। इस कारण उनकी हालत पतली हो गई है। सूरत में ज्यादातर लूम्स कारखाना संचालकों और डाइंग प्रिन्टिंग संचालकों के अकाउंट को.ऑपरेटिव बैंक में होने से उद्यमी भी परेशान हैं। उन्हें श्रमिकों को वेतन देने के लिए नकदी चाहिए पर बैंक दे नहीं पा रहे।
साउथ गुजरात को.ऑपरेटिव बैंक एसोसिएशन के शरद कापडिय़ा ने बताया कि हमने पिछले दिनों आरबीआई को पत्र लिखकर को.ऑपरेटिव बैंक को रुपए देने की गुहार लगाई थी, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। सोमवार को अहमदाबाद में गुजरात के को.ऑपरेटिव बैंकर्स की बैठक थी, जिसमें आरबीआई के अधिकारियों ने बैंकर्स ने तत्काल में कितने रुपए की आवश्यकता है, यह जानकारी ली है। उन्होंने धीरे-धीरे परिस्थिति सुधरने का आश्वासन भी दिया।

ऑनलाइन को बढ़ावा देने की चर्चा
कुछ बैंकर्स ने बताया कि सरकार का उद्देश्य धीरे-धीरे कैशलेस आर्थिक व्यवहार पर हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से बैंक से नकदी निकालने का सिलसिला बढ़ गया था। नोटबंदी के दिनों में कई लोग ऑनलाइन सिस्टम अपनाने लगे थे, लेकिन फिर से कैश सिस्टम आ गया। संभवत: इस पर लगाम कसने के लिए यह कदम उठाया गया है।

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