
डॉक्यूमेंट्री में निजी और सरकारी स्कूलों की लेबोरेटरी तथा लाइब्रेरी की भी तुलना की गई है। अनुदानित और कम फीस वाले स्कूलों की लेबोरेटरी और लाइब्रेरी की खस्ता हालत दिखाई गई है।

डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया है कि निजी स्कूलों में बच्चों को आधुनिक लेबोरेटरी और लाइब्रेरी की सुविधा मिलती है।

निजी स्कूलों ने यह डॉक्यूमेंट्री फीस वसूलने के उद्देश्य से बनाई है। वह अभिभावकों को जताना चाहते हैं कि अगर वह तगड़ी फीस वसूल रहे हैं तो इसकी एवज में उनके बच्चों को बेहतर सुविधाएं भी दे रहे हैं।

सात से आठ मिनट की डॉक्यूमेंट्री में ज्यादा फीस देने से क्या लाभ होता है, इस पर जोर दिया गया है।

डॉक्यूमेंट्री में बताया गया है कि निजी स्कूल में रसोईघर कैसा है, सरकारी और कम फीस वाले स्कूलों की रसोईघर की हालत दिखाई गई है। जमीन पर बैठकर खाने का वीडियो भी दिखाया गया है।

निजी स्कूल में बच्चों को प्रोटीन और हाइजेनिक खाना दिया जाता है, मेस में डाइनिंग टेबल पर बैठाकर खिलाया जाता है।

अभिभावक स्कूलों की ट्रांसपोर्ट फीस से भी नाराज हैं। उनका आरोप है कि स्कूल बस की फीस बहुत ज्यादा है। इस मामले को लेकर स्कूलों के बाहर कई बार अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन किया।

डॉक्यूमेंट्री में स्कूल बस और स्कूल ऑटो के बीच अंतर दिखाकर ज्यादा फीस को तर्कसंगत बताने की कोशिश की गई है।