
करोड़ों की धोखाधड़ी के अभियुक्त का रिमांड लेने में पुलिस नाकाम
सूरत. कपड़ा मार्केट से उठंतरी के बाद आठ साल से फरार अभियुक्त को पुलिस ने पकड़ तो लिया, लेकिन उसे रिमांड पर लेने में विफल रही। इससे करोड़ों रुपए की रिकवरी फंस गई है। कोर्ट ने पांच दिन के रिमांड की मांग नामंजूर करते हुए अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
मूलत: राजस्थान निवासी परबतसिंह शैतानसिंह राजपूत पर आरोप है कि वर्ष 2010 में उसने कपड़ा मार्केट से उठंतरी कर कई व्यापारियों को करोड़ों रुपए का चूना लगाया। व्यापारियों की शिकायत पर सलाबतपुरा थाने में उसके खिलाफ 4.72 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी। आठ साल बाद हाल ही वह सूरत लौटा तो मुखबिर की सूचना पर पूणा पुलिस ने उसे आई माता सर्किल के पास धर दबोचा और सलाबतपुरा पुलिस को सौंप दिया। सलाबतपुरा पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और पांच दिन का रिमांड मंजूर करने की मांग की। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता नरेश गोहिल ने रिमांड याचिका नामंजूर करने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने पुलिस की रिमांड की मांग नामंजूर कर दी और अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
जाली नोटों के मामले में दस साल की कैद
सूरत. नौ साल पहले २.08 लाख रुपए के जाली नोटों के साथ पकड़े गए पांच आरोपियों में से दो को कसूरवार ठहराते हुए कोर्ट ने दस साल की सामान्य कैद की सजा सुनाई है, जबकि अन्य तीन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
क्राइम ब्रांच ने २००९ में भूपत कुंभार, वीनू चावड़ा, महेश जमोद, विपुल मोरडिया और जगदीश डांगर को ५०० रुपए के ४१७ जाली नोटों के साथ पूणागाम थाना क्षेत्र के आईमाता रोड से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इनके खिलाफ आइपीसी की धारा ४८९ (क,ख,ग), १२० बी, ३४ और ११४ के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने भूपत कुंभार और वीनू चावड़ा को कसूरवार ठहराया और उन्हें दस साल की सामान्य कैद तथा दस हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं भरने पर दो महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
Published on:
13 Sep 2018, 8:47 PM IST
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