
covid19 : पांच हजार की बस्ती में, आता है सिर्फ दो हजार लोगों का खाना !
सूरत. प्रशासन द्वारा शहर में फंसे श्रमिकों को उनके गांव भेजने की पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाने के कारण श्रमिक भूखमरी का शिकार हो रहे हंै। उनके पास न भोजन के लिए रुपए हैं और न ही गांव जाने का किराया हंै। जो लोग यहां फंसे है, उन्हें प्रशासन दो वक्त का भोजन भी मुहैया नहीं करवा पा रहा है। सोमवार को पांडेसरा क्षेत्र में फिर भूखे श्रमिकों ने आवाज उठाई।
सुबह सिद्धार्थनगर में कई श्रमिक मास्क, गमछा आदि लगा कर एकत्र हो गए। इनमें कई महिलाएं भी थी। उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाई। श्रमिकों का कहना था कि यहां सिद्धार्थनगर में पांच हजार प्रवासी श्रमिक परिवारों की बस्ती है। लेकिन यहां सिर्फ दो हजार लोगों के लिए ही भोजन आता है। ऐसे में कई लोगों को भूखा रहना पड़ता हैं।
उनके पास रुपए भी नहीं हैं कि वे खुद अपने भोजन का इंतजाम कर सके। यदि सरकार हमें भोजन नहीं दे सकती तो हमें अपने गांव भेजने की व्यवस्था करे। ऐसी ही हालत रही कोरोना से मौत आएगी या नहीं लेकिन भूख कई लोग मर जाएगें। यहां गौरतलब हैं कि लॉक डाउन के पहले चरण में तो कई सामाजिक संस्थाएं भी श्रमिकों को भोजन व राशन पहुंचाने में सक्रिय थी।
लेकिन लॉक डाउन का दूसरा, तीसरा और चौथा चरण बहुत लंबा खींचने होने के कारण अधिकतर संस्थाओं भोजन वितरण कार्यक्रम बंद हो चुका है। प्रशासन कुछ बड़ी संस्थाओं के साथ मिलकर श्रमिक बस्तियों में भोजन वितरण करवा रहा है। यहां उल्लेखनीय है कि लॉक डाउन के चलते रोजगार छिनने के कारण पांडेसरा में पहले भी श्रमिक राशन व उन्हें गांव भेजने को लेकर अपनी आवाज उठा चुके हैं। उन्हें पुलिस के डंडे भी खाने पड़े और जेल भी जाना पड़ा।
नहीं हुआ कोई हंगामा
कुछ श्रमिक परिवारों को भोजन को लेकर समस्या थी। हमने यहां भोजन वितरण करने वाले महानगर पालिका के जिम्मेदार लोगों से बात करवाई हैं। कुछ लोगों गांव भेजने की भी मांग कर रहे हैं। उन्हें भी समझाया गया है। सिद्धार्थनगर में कोई हंगामा नहीं हुआ।
- आर.एम.वसैया, पुलिस निरीक्षक, पांडेसरा
Published on:
19 May 2020 10:46 am
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