रेलवे स्टेशन पर सैनिटाइजेशन एंव रैपिंग कियोस्क की जगह को लेकर खींचतान

- बड़ी जगह की मांग

- मुम्बई के बाद सूरत और बान्द्रा टर्मिनस में लगनी है कियोस्क मशीन

By: Sanjeev Kumar Singh

Published: 10 Feb 2021, 10:47 PM IST

सूरत.

मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर यात्रियों के सामानों के सैनिटाइजेशन एवं रैपिंग शुरू होने के बाद सूरत और बान्द्रा टर्मिनस स्टेशन पर भी यह व्यवस्था जल्द शुरू होनी थी, लेकिन कंपनी के लोगों ने सूरत स्टेशन पर निर्धारित जगह पर दिक्कत आने की बात कहते हुए प्रोजेक्ट टाल दिया है। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि वारंगल स्टेशन पर मशीन लगाने के बाद सूरत और बान्द्रा स्टेशन पर सुविधा शुरू होगी।

पश्चिम रेलवे में मुंबई डिविजन में पहला यात्रियों का सामान सेनेटाइजेशन एवं रैपिंग के लिए कियोस्क मशीन मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर लगाई गई है। मंडल रेल प्रबंधक जीवीएल सत्य कुमार ने 5 फरवरी को मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर यात्रियों के सामानों के सैनिटाइजेशन एवं रैपिंग के लिए कियोस्क मशीन का उद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा उपायों में वृद्धि की दृष्टि से मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के सामानों के सेनेटाइजेशन एवं रैपिंग के लिए कियोस्क सुविधा शुरू की गई है।

सूत्रों ने बताया कि सूरत रेलवे स्टेशन पर ग्राउंड फ्लोर पर प्लेटफार्म संख्या एक पर सीढिय़ों के नीचे (उत्तर में) जगह निर्धारित की गई थी। सर्वेयर ने अधिकारियों को बताया था कि साढ़े चार फीट की ऊंचाई और चौड़ाई 12 फीट व लम्बाई 15 से 17 फीट बताई थी। लेकिन मुम्बई में कियोस्क मशीन के उद्घाटन के बाद कंपनी के लोग सूरत स्टेशन पर मशीन लगाने के लिए निरीक्षण करने आए थे। लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने जगह को छोटी बताई है। छोटी जगह में यात्रियों तथा कर्मचारियों की मूवमेंट में दिक्कत आएगी। लेकिन हाल में जो जगह है वह काफी छोटी है।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि अब कंपनी ने साढ़े आठ फीट की ऊंचाई वाली जगह मांगी है। सूरत में उद्घाटन ऑफर के रूप में सेनेटाइजेशन की दर प्रति बैगेज 10 रु. होगी, जबकि सैनिटाइजेशन और रैपिंग दोनों की कीमत 50 रु. होंगे। यह सुविधा बुक बैगेज प्राइवेट लिमिटेड के अंतर्गत शुरू की गई है। इससे मुंबई सेंट्रल मंडल को प्रति वर्ष 18,24,000 रु. गैर किराया राजस्व प्राप्त होगा।


संक्रमण रोकता है

मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी सुमित ठाकुर ने बताया कि सामानों को अल्ट्रावॉयलेट रे टनल के जरिए गुजारते हुए सैनिटाइजेशन किया जायेगा। अल्ट्रावॉयलेट रे सैनिटाइजेशन सामानों के सतह पर रहने वाले रोगाणुओं को मारता है, इससे कोविड-19 एवं अन्य संक्रामक रोगों को फैलने से रोकता है। यह शुष्क एवं तीव्र विधि है, जो परम्परागत छिडक़ाव विधि से अधिक सुविधाजनक है। यात्रियों के पास पॉलिथीन कवर से सामानों की रैपिंग का भी विकल्प होगा। आने वाले समय में रैपिंग सामग्री को पॉलिथीन से बायो-डिग्रेडेबल पॉलीमर में बदलने की योजना है, जो पर्यावरण अनुकूल होगा।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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