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सिलवासा. पश्चिम रेलवे सिलवासा में रेल बुकिंग कार्यालय चलाने में रुचि नहीं ले रहा है। रेलवे में स्टाफ की कमी बताकर दो विंडो में से एक विंडो बंद कर दी है। ओआइडीसी भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है। एक आरक्षण कार्यालय पर विंडो कार्यरत रहने से औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले मजदूरों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। दोनों विंडो पर रेलवे को रोजाना 5 से 6 लाख की आमद होती है, जबकि एक विंडो चालू रहने से कमाई घटकर आधी रह गई है।
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श्रमिक व हेल्पर इ-टिकट सेवा से अनजान
रेलवे में इ-टिकट के बावजूद आरक्षण विंडो पर टिकटार्थियों की दिनभर भीड़ रहती हैै। औद्योगिक इकाइयों में श्रमिक व हेल्पर इ-टिकट सेवा से अनजान है। इ-टिकट का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि वेटिंग टिकट कन्फर्म नहीं होने की स्थिति में स्वत: रद्द हो जाती है, जिससे रेल में यात्रा नहीं की जा सकती है। आरक्षण विंडो पर प्राप्त वेटिंग टिकट, कन्फर्म नहीं होने पर भी यात्रा के लिए वैध रहती है। बिहार, उत्तरप्रदेश, ओडिसा, दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल जाने वाली अधिकांश गाडिय़ां विशेष अवसरों पर 120 दिन पूर्व ओपनिंग के समय फुल हो जती हैं। यात्रियों का कहना है कि रेलों में सीटें उपलब्ध नहीं रहने के बावजूद ज्यादातर श्रमिक वेटिंग टिकट लेकर रेलों में यात्रा करने को मजबूर हैं। आरक्षण खिडक़ी पर हमेशा भीड़ रहने के कारण औद्योगिक श्रम संगठनों ने पश्चिम रेलवे से सिलवासा के अलावा खानवेल में भी रेलवे बुकिंग कार्यालय खोलने की मांग की थी।
अब रेल प्रशासन सिलवासा में आरक्षण विंडो चलाने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। यहां सिर्फ एक विंडो ही चलती है। एक विंडो पर ओपनिंग व तत्काल टिकटार्थियों को पूरा फायदा नहीं मिल पाता है। ओआइडीसी ने रेल टिकट बुकिंग के लिए वर्ष 2004 में आरक्षण केन्द्र की शुरुआत की थी। उस समय आरक्षण केन्द्र चालू करने में सभी उद्योग संगठनों ने रुचि दिखाई थी। पश्चिम रेलवे इ-टिकट, मोबाइल व ऑनलाइन टिकट का बहाना बनाकर इसे बंद करने के मूड में है। पिछले दिनों जब विंडो का कलक्टर कार्यालय से तलाटी कार्यालय पर स्थानांतरण हुआ, तब रेलवे के अधिकारियों ने पर्दे के पीछे से बंद करने का एलान कर दिया था।
Published on:
02 Jan 2020 08:10 pm
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