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Monsoon/ महाराष्ट्र में बारिश को जोर घटा, उकाई बांध अब भी रूल लेवल के पार

आउटफ्लो घटकर 53,590 क्यूसेक होने के बाद तापी का जलस्तर भी घटा

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Monsoon/ महाराष्ट्र में बारिश को जोर घटा, उकाई बांध अब भी रूल लेवल के पार

Monsoon/ महाराष्ट्र में बारिश को जोर घटा, उकाई बांध अब भी रूल लेवल के पार

सूरत. उकाई बांध के उपरी क्षेत्र महाराष्ट्र्र में बारिश का जोर घटने से उकाई बांध में हो रही पानी की आवक में कमी आई है। हालांकि बांध का जलस्तर अब भी 333.61 फुट के साथ रूल लेवल के पार है। जबकि इनफ्लो और आउटफ्लो दोनों में घटने से तापी नदी का जलस्तर भी शुक्रवार को घट गया।


उकाई बांध के गेज स्टेशनों में भारी बारिश के चलते उकाई बांध में पिछले कुछ दिनों से बड़ी मात्रा में पानी की आवक हो रही थी। गुरुवार से महाराष्ट्र में बारिश का जोर घटने से अब बांध में पानी आवक घटकर 96 हजार क्यूसेक रह गई है। हालांकि बांध का जलस्तर अब भी रूल लेवल के पार है। रूल लेवल को बनाए रखने के लिए शुक्रवार को भी 53,590 क्यूसेक आउटफ्लो जारी रहा। आउटफ्लो घटने से तापी नदी का जलस्तर भी घटने लगा है। शुक्रवार शाम सात बजे कोजवे पर तापी नदी 7.93 मीटर के जलस्तर के साथ बह रही थी।

मेडिकल पेपर्स में विसंगतता साबित नहीं कर पाई बीमा कंपनी


सूरत. मेडिकल पेपर्स में विसंगतता का कारण बताकर बीमाधारक का क्लेम नामंजूर करने वाली बीमा कंपनी को ग्राहक कोर्ट से झटका लगा है। बीमा कंपनी अपना पक्ष साबित नहीं कर पाई। जिस पर कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को ध्यान में रखते हुए क्लेम के 82,743 रुपए सात फीसदी ब्याज के साथ चुकाने का बीमा कंपनी को आदेश दिया।
परवत पाटिया डिम्पल नगर निवासी मोन्टू कुमार जितेन्द्र कुमार ठोकार ने अधिवक्ता विवेक इटालिया के जरिए मणिपालसिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस कपनी लिमिटेड के खिलाफ ग्राहक कोर्ट में शिकायत की थी। आरोप के मुताबिक मोन्टू ने बीमा कंपनी से मेडिक्लेम पॉलिसी खरीदी थी। पॉलिसी की लागू अवधि के दौरान उन्हें डेंगू हो गया और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उपचार के लिए 82,743 रुपए खर्च हुए थे। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने बीमा कंपनी में क्लेम किया था, लेकिन अस्पताल के मेडिकल पेपर्स में विसंगतता का कारण बताकर बीमा कंपनी ने क्लेम नामंजूर कर दिया था। मामला ग्राहक कोर्ट में पहुंचने पर बीमा कंपनी किस तरह की विसंगतता थी यह साबित नहीं कर पाई। अंतिम सुनवाई के बाद ग्राहक कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को ध्यान में रखते हुए बीमा कंपनी की ओर से ग्राहक सेवा में क्षति का मामला माना और क्लेम की राशि 82,743 रुपए याचिका दायर करने की तारीख से सात फीसदी ब्याज समेत चुकाने की बीमा कंपनी को आदेश दिया।