
RAMAYAN: इंडोनेशिया के 42 कलाकारों का दल सजाएगा संस्कृति की झांकी
सूरत. विश्व में सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया के 42 कलाकारों का दल शुक्रवार को सूरत में पहली बार रामायण बेले प्रम्बानन की अनूठी प्रस्तुति देगा। दल के कलाकार काकाविन रामायण में प्रभु श्रीराम व उनके जीवन चरित्र से जुड़े कई प्रसंगों की बिल्कुल हटकर प्रस्तुति देंगे। रामायण बैले प्रम्बानन का आयोजन 14 अक्टूबर की शाम सात बजे से डुमस रोड स्थित अवध उथोपिया में किया जाएगा।
कुछ समय पहले ही इंडोनेशिया के शिक्षा व संस्कृति मंत्री अनीस बास्वदेन भारत दौरे पर आए थे और तब भारत के संस्कृति मंत्री महेश शर्मा से मुलाकात के दौरान दोनों देशों की रामलीला का मंचन एक-दूसरे के देशों में आयोजित दो संस्कृतियों के मिलन पर सहमति बनी थी। इसके बाद देश में पहली बार कांस्यूलेट जनरल ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया, मुंबई व स्टीम हाउस, इंडिया के सयुंक्त उपक्रम में रामायण बेले प्रम्बानन का आयोजन किया जा रहा है। सोमवार को मुंबई के वायबी चव्हाण ऑडिटोरियम में इंडोनेशियन कलाकारों के दल ने इंडोनेशिया की काकाविन रामायण आधारित रामायण बैले प्रम्बानन की प्रस्तुति दी थी। सूरत में यह कार्यक्रम शुक्रवार को डुमस रोड स्थित अवध उथोपिया में आयोजित किया जाएगा। स्टीम हाउस, इंडिया के डायरेक्टर विशाल बुधिया ने बताया कि रामायण बैले प्रम्बानन के दौरान इंडोनेशियन कलाकारों का दल डांस-ड्रामे के साथ विभिन्न प्रसंगों की जीवंत प्रस्तुति देंगे। वहीं, इस अवसर पर जावानीज टेक्सटाइल और परिधान का प्रदर्शन भी फैशन शो के रूप में किया जाएगा। इस दौरान इंडोनेशिया की डिजाइनर घिया पनगाबीन द्वारा तैयार परिधान के साथ कलाकार फैशन शो में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि 14 अक्टूबर को सूरत में रामायण बैले प्रम्बानन के आयोजन के बाद 17 अक्टूबर को अहमदाबाद, 19 अक्टूबर को नई दिल्ली व 22 अक्टूबर को अयोध्या में आयोजन किया जाएगा।
-‘इस्लाम हमारा धर्म, रामायण हमारी संस्कृति’
इंडोनेशिया में रामायण की लोकप्रियता इस कदर है कि वहां के नौसेना अध्यक्ष को लक्ष्मण कहा जाता है। इंडोनेशियाई एयरलाइंस का लोग गरुड़ है। एक बार पाकिस्तान प्रतिनिधिमंडल इंडोनेशिया यात्रा पर गया तो उन्हें रामलीला देखने को मिली। प्रतिनिधिमंडल के सवाल पर वहां के राष्ट्रपति सुकर्णों ने कहा कि इस्लाम हमारा धर्म है और रामायण हमारी संस्कृति है। इंडोनेशिया में रामायण काफी लोकप्रिय है और इसे राष्ट्रीय काव्य ग्रंथ का दर्जा दिया गया है। उसके रचियता कवि योगेश्वर है। इंडोनेशिया के स्वतंत्रता दिवस 27 दिसंबर को राजधानी जकार्ता में सरकारी परेड में अनोमान (हनुमानजी) के रूप में हजारों युवा शामिल होते हैं। इंडोनेशिया की करेंसी पर गणेशजी की तस्वीर छपी हुई है। इंडोनेशिया में रामायण का इस कदर प्रभाव है कि हर साल यहां के शहरों में रामलीला के बड़े पैमाने पर आयोजन होते हैं।
Published on:
12 Oct 2022 05:05 am
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