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वेकेशन के दौरान रेलवे पर जमकर बरसा धन

सूरत स्टेशन पर जनरल टिकटों की बिक्री से 10 दिन में 4.36 करोड़ की कमाई

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वेकेशन के दौरान रेलवे पर जमकर बरसा धन

सूरत.

दीपावली वेकेशन के दौरान रेलवे पर जमकर धन वर्षा हुई। धन तेरस से पहले के दस दिन में ही सूरत स्टेशन को सिर्फ करंट टिकटों की बिक्री से करीब चार करोड़ 36 लाख रुपए की आय हुई। आय के मामले में पश्चिम रेलवे के मुम्बई रेल मंडल में सूरत दूसरे नम्बर पर है। मुम्बई-अहमदाबाद तथा नई दिल्ली रेल मार्ग का सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन होने के कारण यहां यात्रियों की आवाजाही अधिक रहती है।

सूरत स्टेशन पर एक नवम्बर से ही यात्रियों की भीड़ बढ़ गई थी। यहां एक नवम्बर को 44 हजार 436 जनरल टिकट बिके, जिससे 51 लाख 78 हजार रुपए की आय हुई। इसी तरह दो नवम्बर को 48 हजार 819 टिकटों की बिक्री से 67 लाख 97 हजार रुपए, जबकि 3 नवम्बर को 55 हजार 475 टिकटों की बिक्री से 68 लाख 92 हजार रुपए की आय हुई।

एक टिकट पर अधिक से अधिक आठ पैसेंजर (चार फुल और चार हाफ) यात्रा कर सकते हैं। ऐसे में यात्रियों की संख्या बेचे गए टिकटों से कहीं अधिक होने के आसार हैं। आम तौर पर सूरत स्टेशन से रोजाना 3४ हजार से 38 हजार जनरल टिकट बेचे जाते हैं। छुट्टियों में यह संख्या बढक़र 55-60 हजार तक पहुंच जाती है।


दीपावली अवकाश के सीजन में टिकट निरीक्षकों की भी चांदी हो गई। मुम्बई रेल मंडल की वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक आरती सिंह परिहार के निर्देशानुसार टिकट निरीक्षक यात्रियों से जुर्माना वसूल कर टारगेट पूरा करने में जुटे हैं। सूत्रों ने बताया कि एक टिकट निरीक्षक प्रतिदिन 35 से 40 हजार रुपए की रसीद बना रहा है।

कई टिकट निरीक्षक प्रतिदिन पचास हजार से एक लाख रुपए तक जुर्माना वसूल रहे हैं। सूरत के अलावा दूसरे रेल मंडल के टिकट निरीक्षक भी रसीद बनाते हैं। प्लेटफॉर्म पर गाड़ी खड़े होते ही वह यात्रियों की रसीद बनाने में व्यस्त हो जाते हैं। ट्रेन में जगह है या नहीं, इससे इन्हें कुछ लेना-देना नहीं होता।

दीपावली अवकाश के दौरान जनरल टिकट खिडक़ी पर सूरत से यूपी-बिहार जाने वाले यात्रियों की भीड़ रात बारह बजे बाद से ही लग जाती है, जो सुबह ट्रेन रवाना होने तक रहती है। सूत्रों ने बताया कि जनरल टिकट तीन घंटे बाद रद्द नहीं होता। जो यात्री ट्रेन में नहीं चढ़ पाते, वह जब टिकट कैंसिल करवाने पहुंचते हैं तो इनकार कर दिया जाता है। ऐसे लोगों को अगले दिन यात्रा के लिए फिर नया टिकट खरीदना पड़ता है। पहले 500 किमी से अधिक दूरी का जनरल टिकट बारह घंटे तक रद्द होता था। इससे यात्रियों को रिफंड मिल जाता था।


जुर्माना भरकर स्लीपर में यात्रा
दीपावली अवकाश के दौरान कई ट्रेनों के रिजर्वेशन कोच की हालत जनरल डिब्बों जैसी रही। जनरल, दिव्यांग और महिला कोच की हालत इससे भी खराब थी। कन्फर्म टिकट नहीं मिलने के कारण कई यात्री जनरल टिकट लेकर स्लीपर कोच में चढ़ गए। ट्रेन शुरू होने से पहले ऐसे यात्रियों पर टिकट निरीक्षक जुर्माना कर रसीद थमा देते हैं। कई यात्रियों ने यही रसीद लेकर स्लीपर कोच में यात्रा की। 72 सीटों वाले कोच में डेढ़ सौ से दो सौ यात्रियों ने सफर किया। इससे आरक्षित टिकट वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।