Surat news : सूरत पहुंचे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (RSS chief Mohan Bhagwat) ने अंग दाताओं के परिवारों को सम्मानित किया। अंग दाताओं के परिवार के सदस्यों के लिए डोनेट लाइफ द्वारा आयोजित कार्यक्रम एक सम्मान कार्यक्रम था। सूरत के एक इनडोर स्टेडियम में आयोजित हुए कार्यक्रम में दक्षिण गुजरात क्षेत्र के लगभग 70 अंग दाताओं (Organ donation) के परिवारों को सम्मानित किया गया।
इसमें अंग दाताओं एवं अंग प्राप्तकर्ताओं ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। डोनेट लाइफ संस्था पिछले 18 वर्ष से समाज में अंगदान की जन जागृति फैलाने और ब्रेनडेड व्यक्तियों के परिजनों को अंगदान का महत्व समझाकर यह करवाने से मरीजों को नया जीवन देने का कार्य कर रही है।
डोनेट लाइफ(donate life)द्वारा अंगों को समय से हॉस्पिटल पहुंचाने के लिए 106 ग्रीन कॉरिडोर बनाने के लिए पुलिस आयुक्त समेत अन्य अधिकारियों का भी सम्मान किया गया।
संस्था के प्रमुख नीलेश मांडलेवाला ने बताया कि अंगदाता परिवार के कारण सैकड़ों ऑर्गन फेल मरीजों को नया जीवन मिला है। उनके सम्मान के लिए डॉ. मोहन भागवत (Mohan Bhagwat)का सूरत आना गौरवपूर्ण है।
क्या रहा खास?
डाक विभाग द्वारा अंगदान विषय पर एक विशेष कवर लॉन्च किया गया।
भारत सरकार की ओर से डोनेट लाइफ(donate life)संस्थान के प्रपोजल पर पोस्ट विभाग ने स्पेशल लिफाफा जारी किया है। इसके लिए सूरत पोस्ट विभाग अधिकारी शिशिर कुमार का भी सम्मान किया गया। उपस्थित लोगों ने मरणोपरांत सभी अंगों व उत्तकों के दान की शपथ भी ली।
देश में सबसे छोटी उम्र जश संजीव ओझा के 15 दिसम्बर 2020 को मल्टीपल अंगों का दान(organ donation) करने वाले पिता संजीव ओझा ने लोगों को संबोधित किया। जश के अंग सात जरूरतमंद लोगों में ट्रांसप्लांट किए गए थे। यह अंग जिन्हें भी मिले थे उन सभी ने भी अंग मिलने के बाद अपने जीवन में आए बदलाव को लोगों के बीच साझा किया। उन्होने कहा अंगदत्त परिवार और अंगदत्त वास्तव में देवता हैं।
अंगदान का यह कार्य जुनून का नहीं बल्कि चेतना का कार्य है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (RSS Mohan Bhagwat)ने कहा कि देश के नागरिक सुख-दुख में शामिल हों यही देशभक्ति है. अंगदान देशभक्ति का एक रूप है। यदि मृत्यु के बाद भी शरीर किसी के काम आ सकता है तो अंगदान अवश्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शरीर छोड़ने के बाद जो कुछ है उससे कोई लगाव नहीं रहता। बहुत से लोग सोचते हैं कि यदि अंतिम संस्कार शरीर के किसी भी अंग के बिना किया जाए तो कोई गति नहीं होती, लेकिन ऐसा नहीं है। ऐसे कई व्यक्ति परिस्थितियों के कारण मर जाते हैं और उनका शरीर नहीं होता। उन्हें गति भी मिलती है. दधीचि ऋषि विश्व के प्रथम अंगदाता थे। गलत धारणा कायम नहीं रहनी चाहिए क्योंकि अंग दान(organ donation)का कार्य शास्त्रीय रूप से भी निषिद्ध नहीं है।
RSS chief Mohan Bhagwat attended the ceremony for organ donor families organized by Donate Life related to organ donation.