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सचिन जीआईडीसी में पानी की किल्लत, उद्यमी त्रस्त

दो महीने में आधा रह गया उत्पादन, सिंचाई मंत्री को ज्ञापन

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सूरत.

सचिन जीआईडीसी क्षेत्र की औद्यगिक इकाइयां पानी की किल्लत से जूझ रही हैं। नहर मेंटेनेंस के कारण श्रमिकों को भी पीने का पानी नही मिल रहा है। पिछले दो महीने से यहां उत्पादन पचास प्रतिशत रह गया है। सचिन इंडस्ट्रियल कॉ. ऑप. सोसायटी ने सिंचाई मंत्री को ज्ञापन देकर पानी की व्यवस्था की मांग की है।


ज्ञापन में बताया गया है कि सचिन जीआईडीसी में जिस नहर से पानी आता है, उसे मेंटेनेंस के लिए 16 दिसंबर से तीन फरवरी तक बंद रखने का फैसला किया गया था, लेकिन अभी तक मेंटेनेंस का हवाला देकर पानी नहीं दिया जा रहा है। इससे सचिन जीआईडीसी की लगभग 2500 इकाइयों को परेशानी हो रही है। साथ ही यहां के ढाई लाख श्रमिकों भी पीने के पानी के अभाव से जूझ रहे हैं। यहां टैंकर से पानी मंगाकर काम चलाया जा रहा है। इससे उद्यमियों का खर्च बढ़ रहा है। एसोसिएशन के सेक्रेटरी मयूर गोलवाला ने बताया कि जीआईडीसी में जिस पाइपलाइन से पानी आता है, वह बन जाने के बाद भी सिंचाई विभाग पानी नहीं छोड़ रहा है। जीआईडीसी में कई यूनिट ऐसी हैं, जिन्हें उत्पादन के लिए ज्यादा पानी की आवश्यता होती है। वह प्रतिदिन 1200 से 1300 रुपए के पानी के दो-तीन टैंकर मंगाते हैं। इस तरह जीआईडीसी में रोज पांच लाख रुपए का पानी मंगाया जा रहा है। इसमें से आधा उत्पादन में और आधा श्रमिकों के लिए इस्तेमाल होता है। छोटे उद्यमी तो मिनरल वाटर खरीद कर काम चला रहे हैं। उद्यमियों का कहना है कि सिंचाई विभाग यदि एक महीने और पानी नहीं छोड़ेगा तो उद्योग बंद करने पड़़ेंगे। सचिन इंडस्ट्रियल कॉ. ऑप. सोसायटी ने सिंचाई मंत्री को ज्ञापन देकर पानी की व्यवस्था की मांग की है।


उल्लेखनीय है कि पिछले दो महीने से सचिन जीआईडीसी में पानी की किल्लत के कारण उद्यमी त्रस्त है। जीएसटी के कारण परेशान व्यापारियों को पानी की कमी ने और चिंतित कर दिया है।