
ज्ञान की देवी के जन्मोत्सव पर छाया उल्लास
सिलवासा. ज्ञान की देवी मां सरस्वती का जन्मोत्सव बसंती पंचमी के मौके पर धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने विद्या की देवी का पूजन किया तथा ज्ञान का वरदान मांगा। माघ माह के पांचवे दिन बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है।
बसंत पंचमी के पर घर, मंदिर, सार्वजनिक स्थान, औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मां सरस्वती की स्थापना हो गई हैं। पंडालों में सवेरे 10 बजे विधि-विधान से मां की प्रतिमा में प्राण डाले। वीणादेवी के मंदिरों में धूप, दीप, कलम, स्याही, किताब, अगरबत्ती, हल्दी, केसर, कुमकुम से रंगे चावल, इलायची, लौंग, काजू, पिस्ता, बादाम, गुलाब के फूल, चारौली, नारियल, गंगा जल और घी का प्रसाद चढ़ाकर स्त्रोत पाठ, यज्ञ-हवन व अनुष्ठान चालू हुए हैं। गायत्री मंदिर आमली में पंडितों की उपस्थिति में यजमानों ने ज्ञान की देवी का मंत्रोच्चारण किया। मंदिर परिसर में सार्वजनिक हवन हुआ, जिसमें ज्ञान की देवी के साथ गायत्री के उच्चारण किए। सार्वजनिक सरस्वती मंडलों में आयोजकों ने नए वस्त्र पहनकर मां का दरबार सजाया। डोकमर्डी गौशाला में गायों को गुड़, अनाज, घास आदि खिलाकर पूजा की। सरकारी कॉलेज में विद्यार्थियों के साथ प्रोफेसर और स्टॉफ सदस्यों ने देवी की प्रार्थना की।
इन्दिरा नगर, पिपरिया, आमली में जगह जगह सरस्वती देवी के मंदिर तीन दिन के लिए सज गए हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन व धार्मिक कार्यक्रम चालू हो गए हैं। मंडप में रोजाना हवन, विशेष पूजा-अर्चना, अनुष्ठान, भजन व महाप्रसाद का आयोजन रखा हैं। स्थापना के बाद माँ के दर्शनों के लिए भक्तों का आवागमन शुरू हो गया है। आमली सार्वजनिक सरस्वती मैया के दरबार में भजन-कीर्तन, अनुष्ठान, आरती में लोगों की खासी भीड़ देखी गई। गांवों में भी ज्ञान की देवी की स्थापना विधि विधान से की गई है। बिन्द्राबीन मंदिर में मां शारदे की स्थापना करके पूजा-अर्चना एवं हवन किया तथा भक्तों को तिलक लगाकार प्रसाद वितरित किया। पूजन से पूर्व पुष्प, धूप, दीपक व नैवेद्य लगाकर श्रद्धालुओं ने जाप किए। महिलाओं ने खीर एवं घी का प्रसाद चढ़ाकर सरस्वती पाठ किया। सोमवार से एक दिन के लिए स्थापित सरस्वती प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।
Published on:
10 Feb 2019 11:45 pm
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