सूरत. एसटीएम मार्केट में व्यापारियो की मीटिंग व विरोध प्रदर्शन के दौरान सलाबतपुरा पुलिस भी मौके पर मौजूद रही। फोस्टा कार्यालय पर ताला लगाने के बाद थाना प्रभारी को व्यापारियों ने एक अर्जी भी सौंपी। जिसमें अपनी व्यथा का जिक्र करते हुए लिखा कि पिछले नौ वर्षो से संस्था निष्क्रीय है।
व्यापारी व चुने गए डिरेक्टर्स लंबे समय से चुनाव करवाने की मांग कर रहे है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। ताला लगवाने का उदेश्य मात्र यही है कि अध्यक्ष चुनाव नहीं करवा रहे है। ना ही कोई मीटिंग बुला रहे है, संस्था की बैंक डिटेल भी सार्वजनिक नहीं की जा रही है। वे कार्यालय में किसी तरह का परिवर्तन नहीं करे, इसलिए ताला लगा कर चाबी प्रशासन को सौंपी जा रही है।
शेम शेम के नारे लगाए
जेजे मार्केट के बाहर धरने पर बैठे व्यापारियों ने फोस्टा की निवर्तमान कार्याकारिणी, कार्यकारी अध्यक्ष मनोज अग्रवाल, चम्पालाल बोथरा, राजेश अग्रवाल शेम शेम के नारे लगाए। व्यापारी एकता जिन्दाबाद के नारे लगाए।
22 पर 7 हावी क्यों ?
व्यापारियों ने 31डिरेक्टरों को चुना था। वर्तमान में हालात यह है कि सिर्फ 7 डिरेक्टरों की मनमानी चल रही है। यह 7 डिरेक्टर शेष 22 पर हावी क्यों है। इस लोकतांत्रिक पद्धति में बहुमत लाचार क्यों है। डिरेक्टरों को मनमानी करने वाले 7 जनों को हटा कर संस्था की कमान अपने हाथ में लेकर चुनाव करवाने चाहिए।
– दीपचंद (अध्यक्ष, हरिओम मार्केट, बेगमवाड़ी)बिगड़ रही है कपड़ा बाजार की छवि
सूरत के कपड़ा बाजार का देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी एक अलग पहचान है। कपड़ा व्यापारियों की संस्था फोस्टा के चुनाव को लेकर पिछले कुछ समय जो नोटंकिया है, इससे अन्य व्यापारियों में बाजार व व्यापारियों की छवि बिगड़ रही है, लोग यह कह कर ताना मारते है कि आप कपड़ा व्यापारी एक चुनाव तक नहीं करवा पा रहे है। हमें इस दिशा में सख्त होने पड़ेगा और कड़ा निर्णय आज ही लेना होगा, तभी बात आगे बढेगी और कुछ काम होगा।
– महेन्द्रसिंह भायल (सचिव, जस मार्केट रिंगरोड)
चुनाव समिति पर डाला दबाव
निवर्तमान कार्यकारिणी द्वारा गठित चुनाव समिति ने चुनाव की रूपरेखा तैयार की थी। नियम बना कर चुनाव की तारीख भी तय कर ली थी। वे घोषणा करने ही वाले थे लेकिन कार्यकारिणी ने अडंगा लगाया। मनमानी करते हुए दबाव डाल कर चुनाव की तारीख की घोषणा नहीं करने दी।
-सावरमल बुधिया (एक्शन कमेटी)
चुनाव करवाने की मंशा नहीं
फोस्टा पर कब्जा जमा कर बैठे चार-पांच लोग अपनी मनमानी कर रहे है। हमने चुनाव करवाने के लिए 5-6 बार आंदोलन भी किए। फोस्टा की निष्क्रियता के चलते पिछले कुछ वर्षो के दौरान व्यापारिक हितों के लिए तीन चार नई संस्थाएं भी बनी।
-दिनेश कटारिया (एक्शन केमटी)
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