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SHYAM JAGAT NEWS: गुजरात-राजस्थान सीमा पर बसे आदिवासी हो गए बाबा श्याम के मुरीद

-मुंबई से खाटूधाम की 2019 से लगातार पैदल यात्रा कर रहे श्याम भक्त चन्द्रप्रकाश ढांढण की श्याम भक्ति का च?ा रंग -आदिवासियों के गुरु वीरा भाई भी पैदल गए खाटूधाम, वहां से निशान ध्वज, तस्वीर लाकर की मंदिर में स्थापित

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SHYAM JAGAT NEWS: गुजरात-राजस्थान सीमा पर बसे आदिवासी हो गए बाबा श्याम के मुरीद

SHYAM JAGAT NEWS: गुजरात-राजस्थान सीमा पर बसे आदिवासी हो गए बाबा श्याम के मुरीद

सूरत. गुजरात और राजस्थान की सीमा पर अरावली की गोद में बसे सैक?ों गांवों के हजारों आदिवासियों में बाबा श्याम के नाम की अलख और भक्ति का रंग च?ाने में मुंबई के एक अनूठे श्याम भक्त की धार्मिक आस्था कारगर हो गई है। नतीजा यह है कि गांवों के आदिवासियों ने अपने गांव के ही मंदिर में खाटूधाम जाकर वहां से बाबा श्याम की तस्वीर और निशान ध्वज लेकर स्थापित कर दिया है और अब मंदिर में नित्य श्याम कीर्तन का दौर चलता है।

गुजरात-राजस्थान की सीमा पर घने जंगलों में रहने वाले आदिवासी कुछ समय पहले तक श्याम बाबा को नहीं जानते थे। मगर आज से तीन साल पहले मुंबई से खाटूधाम की पहली निशान यात्रा लेकर यहां से गुजर रहे चंद्र प्रकाश ढांढण को देखकर व उनसे बर्बरीक से श्याम बनने की कहानी सुन सब खाटू नरेश के मुरीद हो गए। एक छोटे से मंदिर में वहां के पुजारी व आदिवासियों के गुरू वीराभाई ने खाटू से बाबा श्याम की तस्वीर और निशान ध्वज लाकर पूजा-अर्चना शुरू कर दी। इसके बाद बॉर्डर पर स्थित मलिकपुर कस्बे के आदिवासी बहुल नानीराठ, मीरापुर और मोटाराठ गांव के ग्रामीण देखते ही देखते लखदातारी श्याम सरकार के हजारों की संख्या में भक्त हो गए हैं।

-बाबा श्याम की तस्वीर रखने पर चार गुना बढे भक्त

नानीराठ गांव में मंदिर के पुजारी व वीरा भाई ने बताया कि चंद्रप्रकाश से प्रेरित होकर खाटू जाने की ठानी थी और राजस्थानी भाषा समझने के लिए डूंगरपुर के आदिवासी इलाके सींगलवाड़ा के जानकार मित्र प्रवीण भाई को लेकर खाटूश्यामजी आए और दर्शन किए। वहां से श्याम बाबा की तस्वीर व निशान लाकर मंदिर में रखे और आने वाले हर भक्त को श्याम बाबा का इतिहास सुनाया। इसके बाद भक्तों की संख्या में चार गुना बढोतरी हो गई।

-वैवाहिक मनोकामना से ब?ा आदिवासियों का श्रद्धाभाव

आदिवासी लोगों में गुरु वीरा भाई बताते है कि मंदिर में आदिवासी श्रीफल चढाकर बाबा श्याम के समक्ष मनोकामना रखते है और इनमें सर्वाधिक वैवाहिक मनोकामना सफल हो रही है। कुछ ही समय में यहां आकर मन्नत मांगने वाले दो हजार करीब लड?े-लड़कियों की शादी हो चुकी है। सरपंच, नौकरी, संतान सहित अनेक कामना पूरी हुई है। इसके अलावा अन्य कई तरह की मुराद पूरी होने से लोगों की आस्था लगातार ब? रही है।

-आदिवासियों के घरों में भी बाबा श्याम का गुणगान

आदिवासियों के गुरु वीरा भाई ने बताया कि बाबा श्याम के निशान आने से मेरा ही नहीं क्षेत्र के हर आदिवासी का जीवन बदल गया। मुंबई के पैदल यात्री चंद्रप्रकाश को पहली बार यहां से देर शाम गुजरते देख रोका था और घर पर ही ठहराया। घर के बाहर पीपल के पेड़ के नीचे निशान ध्वज रख उसने सभी को बाबा श्याम की कहानी सुनाई सभी प्रेरित हुए। मेरे क्षेत्र का मैं पहला आदिवासी था, जिसे खाटू जाने का मौका सौभाग्य मिला। अब स्थिति यह हो गई है कि यहां के लोगों में बाबा श्याम के प्रति गहरी आस्था हो गई है व अधिकतर घरों में कीर्तन में बाबा श्याम का गुणगान होने लगा है।