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स्मीमेर एआरटी सेंटर को मिला स्टार एचीवर अवॉर्ड

- एक दिसंबर : विश्व एड्स दिवस थीम - ‘असमानताओं को समाप्त करें, एड्स का अंत करें’... - राजकोट में विश्व एड्स दिवस पर सूरत के कर्मचारियों को किया जाएगा सम्मानित

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स्मीमेर एआरटी सेंटर को मिला स्टार एचीवर अवॉर्ड

स्मीमेर एआरटी सेंटर को मिला स्टार एचीवर अवॉर्ड

सूरत.

दुनियाभर में हर साल एचआईवी संक्रमण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एक दिसंबर को ‘वर्ल्ड एड्स दिवस’ मनाया जाता है। शहर में महानगरपालिका संचालित स्मीमेर अस्पताल समेत दक्षिण गुजरात के तीन एआरटी जसेंटरों को स्टार एचीवर अवार्ड मिला है। गुजरात में राज्य स्तरीय कार्यक्रम राजकोट में आयोजित हो रहा है, जिसमें सूरत स्मीमेर अस्पताल के स्टाफ अवॉर्ड लेने के लिए पहुंचे हैं।
एड्स वर्तमान युग की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। एचआईवी एड्स एक प्रकार के जानलेवा इंफेक्शन से होने वाली गंभीर बीमारी है। मेडिकल भाषा में इसे ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) के नाम से जाना जाता है। जबकि आम बोलचाल में एड्स का मतलब एक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम कहा जाता है। इससे व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) पर हमला करता है। शरीर सामान्य बीमारियों से लडऩे में भी अक्षम होने लगता है। डब्लूएचओ ने वर्ष 2021 की थीम ‘असमानताओं को समाप्त करें, एड्स का अंत करें’ तय किया है। सूत्रों ने बताया कि महानगर पालिका संचालित स्मीमेर अस्पताल के एआरटी सेंटर को बेस्ट परफॉर्मेंस इन हाई लोड सेंटर कैटेगरी में स्टार एचीवर अवॉर्ड मिला है। जबकि अन्य दो अवॉर्ड भी दक्षिण गुजरात के दो अलग-अलग सेंटरों को दिए गए हैं। जीएमईआरएस वलसाड को बेस्ट परर्फोमेंस इन मीडियन लोड सेंटर तथा जनरल अस्पताल, व्यारा को बेस्ट परर्फोमेंस इन लोअर लोड सेंटर कैटेगरी में स्टार एचीवर घोषित किया गया है। गुजरात में विश्व एड्स दिवस पर स्टेट लेवल कार्यक्रम बुधवार को राजकोट शहर में प्रमुख स्वामी ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया है। इस कार्यक्रम में सूरत से नोडल ऑफिसर, मेडिकल ऑफिसर, काउंसलर, फर्मासिस्ट और डाटा मैनेजर को स्टार एचीवर अवार्ड लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
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सामान्य और गंभीर मरीजों के लिए अलग व्यवस्था :

एचआईवी और एड्स के मरीजों में नियमित खून में वायरस सस्पेक्टेड की जांच की जाती है। स्मीमेर अस्पताल में 95 फिसदी से अधिक टेस्ट किए गए और सबसे अच्छी रिपोर्ट सेंटर से मिली है। वहीं, स्मीमेर के एआरटी सेंटर में स्टेबल और नॉन स्टेबल मरीजों को अलग-अलग ओपीडी में बुलाने की व्यवस्था की गई है। इससे नॉन स्टेबल मरीजों पर चिकित्सक अधिक ध्यान दे पाते और उनका बेहतर इलाज संभव होता है। जबकि स्टेबल मरीजों को एक से दो माह में बुलाकर दवाएं देने की व्यवस्था है।