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गुजरात के छह जिलों में रक्तपीत अनुपात एक प्रतिशत से कम लाने में मिली सफलता

- स्पर्श लेप्रसी जन जागरूकता अभियान... - नई सिविल अस्पताल में नर्सिंग विद्यार्थियों ने बैनर-पोस्टर लेकर ढोल-बाजे के साथ निकाली रैली  

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गुजरात के छह जिलों में रक्तपीत अनुपात एक प्रतिशत से कम लाने में मिली सफलता

गुजरात के छह जिलों में रक्तपीत अनुपात एक प्रतिशत से कम लाने में मिली सफलता

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सूरत और तापी जिलों में 30 जनवरी से 13 फरवरी तक "स्पर्श लेप्रसी जागरूकता अभियान" शुरू किया है। नई सिविल अस्पताल में बुधवार को जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। सूरत जिले में रक्तपीत रोगों का दर प्रति 10,000 जनसंख्या पर 0.48 प्रतिशत है। वहीं तापी जिले में 1.30 प्रतिशत है। जबकि गुजरात राज्य में रक्तपीत दर प्रति 10,000 जनसंख्या पर 0.33 है। दिसंबर 2022 तक 6 जिले वड़ोदरा, पंचमहल, नर्मदा, महिसागर, सूरत, वलसाड में रोग के अनुपात को 1 से नीचे लाने में सफलता मिली है।

विश्व में 30 जनवरी को रक्तपीत दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में रक्तपीत रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इसे रोकने के लिए संयुक्त प्रयास करना है। लंबे समय तक रक्तपीत को एक लाइलाज बीमारी माना जाता था लेकिन अब इसका पता लगाना और इलाज करना आसान हो गया है। कुछ लोगों का मानना है कि यह बीमारी छूने से फैलती है। हालाँकि, यह पूरी तरह से गलत है। रक्तपीत छूने से नहीं फैलता। भले ही यह छूत की बीमारी है, लेकिन यह छूने, हाथ मिलाने, खाने और साथ बैठने से नहीं फैलती है। राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्षों से रक्तपीत बीमारी को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय किए गए हैं। मरीजों की विकृतियों को दूर करने के लिए पिछले छह वर्षों में सूरत और तापी जिलों में क्रमश: 34 और 9 रीकन्स्ट्रक्टीव सर्जरी करके मरीजों की विकृति दूर की गई है। सूरत और तापी जिलों में वर्ष 2016-17 से 2022-23 तक कुल 5658 और 2710 रक्तपीत पीडि़तों, जिनके पैर बीमारी के कारण कट गए थे, उनको क्रमश: माइक्रो सेल्युलर रबर शूज (एम.सी.आर) दिए गए हैं। इससे टांगों में अल्सर वाले रक्तपीत पीडि़तों को ठीक न होने वाले अल्सर से बचाया जा सकता है।

नर्सिंग विद्यार्थियों और स्टाफ ने निकाली रैली

नई सिविल अस्पताल में बुधवार को रैली का आयोजन किया गया। इसमें सूरत जोन मंडल उप निदेशक डॉ. ज्योति गुप्ता ने रैली को हरी झंडी दिखाई। मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल पटेल, सिविल की अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. धारित्री परमार, त्वचा विभागाध्यक्ष डॉ. योगेश पटेल, आरएमओ डॉ. केतन नायक ने उपस्थित होकर रैली को सफल बनाया। इसमें नर्सिंग स्टाफ, नर्सिंग छात्र व पैरामेडिकल स्टाफ सहित लगभग 500 लोगों ने रैली में भाग लिया। रैली के समापन के बाद सभी नर्सिंग छात्राओं को रक्तपीत के प्रति जागरूक किया गया।

रक्तपीत बीमारी क्या है?

रक्तपीत माइक्रोबैक्टीरियम लेप्रसी नामक सूक्ष्म जीव के कारण होने वाली बीमारी है। इस रोग में शरीर की त्वचा और नसें प्रभावित होती हैं। यह बीमारी महिला और पुरुष दोनों को किसी भी उम्र में हो सकती है। समय पर इलाज न कराने पर यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सांस के जरिए फैल सकता है। प्रारंभिक निदान और नियमित मल्टीड्रग उपचार रक्तपीत के प्रसार और रोग के कारण होने वाली विकृति, अक्षमता को रोका जा सकता है।

रक्तपीत के लक्षण

- शरीर के किसी भी भाग में हल्के, सुस्त, बिना किसी संवेदना के दाने।

- नसों का मोटा होना और उनमें दर्द होना।