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पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए सूरत कॉ-ऑपरेटिव बैंक को ग्रीन सर्टिफिकेट

दी सूरत डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक की पंजीकृत कार्यालय के ग्रीन बिल्डिंग को गुरुवार को हैदराबाद में आयोजित नेशनल ग्रीन बिल्डिंग कॉन्फ्रेंस में ग्रीन सर्टिफिकेशन से सम्मानित किया गया।

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Surat Co-operative Bank Green Certificate To Promote Environment

Surat Co-operative Bank Green Certificate To Promote Environment

बारडोली।दी सूरत डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक की पंजीकृत कार्यालय के ग्रीन बिल्डिंग को गुरुवार को हैदराबाद में आयोजित नेशनल ग्रीन बिल्डिंग कॉन्फ्रेंस में ग्रीन सर्टिफिकेशन से सम्मानित किया गया।
बैंक के चेयरमैन नरेश पटेल और वाइस चेयरमैन संदीप देसाई ने आइजीबीसी की ओर से दिए गए ग्रीन बिल्डिंग अवार्ड स्वीकार करते हुए बताया कि देश के बढ़ रहे औद्योगिकीरण के सामने वन और कृषि आधारित विकास की दिशा आने वाले दिनों में विश्व को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने में मदद करेगी।

उल्लेखनीय है कि वाइब्रेंट गुजरात और एमओयू के तहत सिर्फ एक साल में ही ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पूरा कर लिया गया था। सहकारी क्षेत्र में ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन पाने वाली यह देश की पहली बैंक है। बिल्डिंग में एनवायरनमेंट फ्रेंडली पैरामीटर्स के तहत जरूरी लैंड स्केपिंग, ऑक्सीजन उत्सर्जन करते इंडोर प्लांट्स, रूफ टॉप पर 36 किलो वॉट की सोलार पैनल लगाई जाएगी। इससे 30 से 35 फीसदी सौर ऊर्जा उत्पन्न होगी।

हर व्यक्ति एक पेड़ जरूर लगाए : स्वामी निर्मल शरण

डिंडोली प्रजापति समाज में आयोजित भागवत कथा में शुक्रवार को व्यासपीठ से स्वामी निर्मल शरण ने श्री कृष्ण द्वारा इन्द्र की पूजा रोके जाने का वृतांत सुनाया। उन्होंने कहा कि एक सुबह कृष्ण उठे तो उन्हें पकवानों की खुशबू आ रही थी। आंखें मलते हुए भगवान यशोदा के पास गए और पूछा कि मैया क्या बना रही है, मुझे भी खाने के लिए दे। मां ने कहा कि जब तक जय-जय नहीं हो जाएगी, तब तक खाने को कुछ नहीं मिलेगा। भगवान ने पूछा कि यह जय-जय क्या होती है? मां ने कहा कि जाओ, बाबा से पूछ लो।


भगवान नंद बाबा के पास गए तो नंद बाबा ने कहा कि हम इंद्र की पूजा करते हैं, जिससे खुश होकर भगवान इंद्र बारिश करते हैं, हमारी फसलें अच्छी होती हैं। कृष्ण ने कहा कि कर्म पर विश्वास रखना चाहिए। अगर हम इंद्र की पूजा नहीं करेंगे तो क्या बारिश नहीं होगी? नंद बाबा ने कहा कि इंद्र नाराज हो जाएंगे। भगवान ने कहा कि अगर आधे लोग पूजा करें और आधे न करें तो क्या इंद्र आधे लोगों के खेतों में बारिश करेंगे? कर्म से सुख और दुख मिलता है।

हम जैसा कर्म करते हैं, वैसा ही फल मिलता है। भगवान ने इंद्र की पूजा रुकवा दी और गोवर्धन बाबा की पूजा करवा दी। इंद्र की पूजा रुकवा कर भगवान ने प्रकृति की पूजा का नियम बनाया। स्वामी निर्मल शरण ने कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों ने वृक्ष पूजा को महत्व दिया है। पीपल, आम, नीम, बरगद इत्यादि वृक्षों की पूजा होती है। इससे पर्यावरण शुद्ध रहता है, शुद्ध हवा मिलती है, बारिश होती है। इसलिए हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक वृक्ष जरूर लगाना चाहिए। हरे-भरे पेड़ों को न काटा जाए। कथा में श्रद्धालुओं ने नंदलाल के जयकारे लगाए।