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जिस यात्रा ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाई, उसके प्रवेश मार्ग की प्रशासन को सुध ही नहीं

सूरत में किया था रात्रि विश्राम, जिस रास्ते किया था प्रवेश, वहां पसरी रहती है गंदगी

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सूरत

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Vineet Sharma

Oct 02, 2018

patrika

जिस यात्रा ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाई, उसके प्रवेश मार्ग की प्रशासन को सुध ही नहीं

विनीत शर्मा, संदीप पाटिल

सूरत. ऐतिहासिक दांडी यात्रा के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जिस रास्ते से सूरत में प्रवेश किया था, वह जर्जर हाल है। पूरे रास्ते में जगह-जगह गंदगी पसरी हुई है। सौ मीटर से भी कम के इस रास्ते को दुरुस्त कर दांडी मार्च की यात्रा के रूप में सहेजने में स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार पूरी तरह विफल रहे हैं।

अंग्रेजी हुकूमत के नमक कानून के खिलाफ निकली दांडी यात्रा अधिकारों की सजगता के प्रति देश ही नहीं, दुनिया के महत्वपूर्ण आंदोलनों में शामिल है। समर्थकों के साथ नमक कानून तोडऩे के लिए 5 अप्रेल, 1930 को महात्मा गांधी साबरमती आश्रम से दांडी के लिए रवाना हुए थे। यात्रा एक अप्रेल को जिस रास्ते सूरत पहुंचीं, वह आज जीर्ण-शीर्ण हो गया है। हैरिटेज का हिस्सा बन चुका यह रास्ता कचरापात्र बन चुका है। स्वयंसेवी संस्थाएं यदा-कदा यहां साफ-सफाई कर बापू को याद कर लेती हैं। स्थानीय प्रशासन इस रास्ते को लेकर पूरी तरह उदासीन है। दांडी यात्रा की ७५वीं वर्षगांठ पर इसके यात्रा रूट को हैरिटेज में शामिल किया गया है।

बापू ने यहां से किया था प्रवेश

अमरोली से सूरत के रास्ते तापी नदी पर रेलवे ब्रिज के साथ पैदल नदी पार करने के लिए एक पतला रास्ता है। दांडी यात्रा के दौरान बापू ने इसी पैदल रास्ते से सूरत में प्रवेश किया था। इस मार्ग का सौ मीटर से भी कम का हिस्सा उपेक्षित है। मनपा ने यहां अश्वनी कुमार फ्लड गेट बनाया हुआ है। बापू ने दांडी यात्रा के दौरान सूरत में रात्रि विश्राम भी किया था। देश बापू की १५०वीं जयंती मना रहा है। यह आयोजन वर्षभर चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलक्ष में देशभर में स्वच्छता अभियान छेड़ा हुआ है। जब बापू की याद में पूरे देश में स्वच्छता अभियान का दावा किया जा रहा है, दांडी यात्रा का हिस्सा बना सूरत में यात्रा का प्रवेश मार्ग उपेक्षित है।

रास्ते को रखा जाए संरक्षित

गांधीवादी चाहते हैं कि सूरत में दांडी यात्रा के प्रवेश मार्ग को स्मारक बनाया जाए। लोगों ने इसके लिए मनपा प्रशासन और राज्य सरकार को पत्र भी लिखे हैं। इसमें रास्ते को व्यवस्थित करने के साथ ही आस-पास सघन पौधारोपण कर गांधी वन तैयार करने और यात्रा के दौरान गांधीजी से जुड़े संस्मरणों को डिस्प्ले करने की मांग की गई है। लोग चाहते हैं कि देश के व्यस्ततम रेल मार्ग दिल्ली-मुम्बई से सटे इस हैरिटेज रास्ते पर गांधीजी की प्रतिमा भी लगाई जाए, जिससे युवा पीढ़ी दांडी यात्रा को समझने के साथ ही यह भी जान पाए कि बापू नमक सत्याग्रह के लिए इसी रास्ते से होकर गुजरे थे।

नमक की लड़ाई थी दांडी यात्रा

यह नमक की लड़ाई थी, जिसके लिए बापू ने दांडी तक ऐतिहासिक मार्च निकाला था। मार्च की शुरुआत 12 मार्च, 1930 को हुई थी। इस मार्च को 'दांडी मार्च' और 'नमक सत्याग्रह' से भी जाना जाता है। बापू ने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से 24 दिन की यात्रा शुरू की थी। ३४० किमी लंबी यात्रा यात्रा दक्षिण गुजरात में समुद्र किनारे बसे दांडी में संपन्न हुई। यहां बापू ने औपनिवेशिक भारत में नमक बनाने के लिए अंग्रेजों के एकछत्र अधिकार वाला कानून तोड़ा और नमक बनाया था। उस वक्त बापू ने नमक हाथ में लेकर कहा था कि इसके साथ मैं ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को हिला रहा हूं।

मनपा लापरवाह

दांडी यात्रा और गांधी जयंती समेत अन्य अवसरों पर हमारी टीम यहां आकर साफ-सफाई करती है। हमने कई बार स्थानीय प्रशासन से इस रास्ते को व्यवस्थित करने की मांग की है। मनपा प्रशासन इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है।
हरीश गुर्जर, श्रीनाथजी यूथ नेशन, सूरत


दांडी मार्च : ऐसे बीता था चुनौतियों से भरा सफर
24 दिन में 340 किलोमीटर चले स्वतंत्रता सेनानी दांडी पहुंचे और सुबह 6.30 बजे नमक कानून तोड़ा।
8,000 भारतीयों को नमक सत्याग्रह के दौरान जेल में डाल दिया गया था।
सत्याग्रह आगे भी जारी रहा और एक साल बाद महात्मा गांधी की रिहाई के साथ खत्म हुआ।
गांधीजी ने नमक हाथ में लेकर कहा था कि इसके साथ मैं ब्रिटिश साम्राज्य की नींव को हिला रहा हूं।
इस आंदोलन ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर और जेम्स बेवल जैसे दिग्गजों को पे्ररित किया।
दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली आंदोलनों में शामिल है।