12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

SURAT KAPDA MANDI: 5 हजार करोड़ का सजेगा लहरिया कारोबार

-राजस्थान व मध्यप्रदेश की कपड़ा मंडियों के साथ-साथ इस बार यूपी-बिहार की मंडियों में भी डिमांडेबल-फॉइल सी पल्लू का नया ट्रेंड मुठड़ा व लहरिया पर आया, सिल्वर-गोल्ड गोटा पत्ती-किनारे से भी सजी साडिय़ां

3 min read
Google source verification
SURAT KAPDA MANDI: 5 हजार करोड़ का सजेगा लहरिया कारोबार

SURAT KAPDA MANDI: 5 हजार करोड़ का सजेगा लहरिया कारोबार

सूरत. लग्नसरा सीजन की बम्पर ग्राहकी के बाद अब सूरत कपड़ा मंडी में राखी के सीजन की तैयारियां होने लगी है, हालांकि लग्नसरा सीजन अभी बीता नहीं है मगर इसकी ग्राहकी शांत सी हो गई है। उम्मीद है कि कोरोना के दो साल बाद इस बार राखी के सीजन का कारोबार 5 हजार करोड़ के पार पहुंच जाए क्योंकि सीजन की विशेष पहचान लहरिया की डिमांड राजस्थान-मध्यप्रदेश के साथ-साथ उत्तरप्रदेश व बिहार की कपड़ा मंडियों से भी होने लगी है।
मार्च के दूसरे सप्ताह से जून के दूसरे सप्ताह तक सूरत कपड़ा मंडी में सबसे बड़ी लग्नसरा सीजन की अवधि रहती है और इसके कुछ समय बाद ही जुलाई-अगस्त-सितम्बर का राखी-तीज सीजन प्रारम्भ हो जाता है। इस बार स्थानीय बाजार में लग्नसरा ग्राहकी मई की शुरुआत में ही सुस्त हो गई और इस व्यापारिक सुस्ती के बीच अगले सीजन राखी की तैयारियां कपड़ा व्यापारियों ने प्रारम्भ कर दी है। मार्च से अप्रेल अंत तक लग्नसरा सीजन की बम्पर ग्राहकी सूरत कपड़ा मंडी में चली और उसे ध्यान में रख लहरिया कारोबार करने वाले कपड़ा व्यापारियों ने राखी के सीजन की तैयारियां अप्रेल के चौथे सप्ताह में ही प्रारम्भ कर दी थी और मंडी के कई व्यापारियों के यहां प्रिंटिंग मिलों से लहरिया, मुठड़ा व बंधेज साडिय़ां छपकर पहुंचने भी लगी है। कपड़ा कारोबार के जानकार बताते हैं कि इस बार राखी सीजन का लहरिया व्यापार 5 हजार करोड़ के पार जाने के आसार हैं।


-फॉइल सी पल्लू नया ट्रेंड


राखी सीजन पर ज्यादातर राजस्थान व मध्यप्रदेश की कपड़ा मंडियों में परम्परागत लहरिया साडिय़ों की डिमांड रहती है। इसमें बंधेज व मुठड़ा भी अब शामिल हो गए हैं और नए ट्रेंड के रूप में फॉइल सी पल्लू लहरिया व मुठड़ा इस बार बाजार में देखने को मिलने लगा है। इसमें साड़ी के पल्लू पर तीन तरफ फॉइल से डिजाइन की हुई है। इसके अलावा डिजीटल प्रिंटेड लहरिया भी राखी सीजन के दौरान इस बार खूब देखने को मिलेगा।


-चार-पांच ग्रे क्वालिटी पर अधिक छपाई


सावन-राखी-तीज के उपलक्ष में महिलाओं के परम्परागत परिधान लहरिया की साडिय़ां सूरत कपड़ा मंडी में ज्यादातर वेटलेस, 60 ग्राम, बटरफ्लाई शिफॉन, कॉटन जेकार्ड आदि ग्रे क्वालिटी पर ही मिलों में अधिक प्रिंट हो रहा है। व्यापारियों ने लहरिया को अधिक आकर्षक व उठावदार बनाने के लिए बॉर्डर पर सिल्वर-गोल्ड गोटा पत्ती लेस से वेल्यू एडीशन वर्क भी किया है। बताते हैं कि हॉलसेल बिक्री की मीठी शुरुआत भी हो चुकी है।


-प्रिंट मिलों में ज्यादातर यहीं जॉबवर्क


राखी सीजन की तैयारियां सूरत कपड़ा मंडी में होने लगी है और प्रिंटिंग मिलों में अब ज्यादातर लहरिया जॉबवर्क किया जा रहा है। लहरिया में इस बार डिजीटल प्रिंट समेत अन्य तरह का कुछ नयापन भी बाजार में दिखाई देगा।


कैलाश हाकिम, कपड़ा उद्यमी, रघुकुल टेक्सटाइल मार्केट।


-मीठी-मीठी ग्राहकी की शुरुआत


यह समय भले ही लग्नसरा सीजन का अंतिम दौर है, लेकिन राखी सीजन की मीठी-मीठी शुरुआत हो चुकी है। थोड़े समय बाद इसमें तेजी भी आएगी, लेकिन व्यापारी डिमांड मुताबिक ही माल बनाएंगे।


-गणेश गाडोदिया, कपड़ा व्यापारी, मिलेनियम मार्केट


-लहरिया लहंगा-चोली की मांग


यूपी-बिहार की कपड़ा मंडियों से लहरिया लहंगा-चोली की मांग आने लगी है, यहीं वजह है कि इस बार वहां की मंडियों से जुड़े व्यापारी भी राखी सीजन की तैयारियों में इन दिनों पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं।


गणेश अग्रवाल, कपड़ा व्यापारी, मिलेनियम-2 मार्केट

-राजस्थान-एमपी के अलावा यूपी-बिहार में भी मांग


राखी सीजन में लहरिया की मांग आम तौर पर राजस्थान की जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, सवाईमाधोपुर व शेखावाटी क्षेत्र की कपड़ा मंडियों के अलावा मध्यप्रदेश में इंदौर, उज्जैन, नीमच, रतलाम, मंदसौर आदि कपड़ा मंडियों में रहती है। लहरिया की मांग इस बार उत्तरप्रदेश व बिहार की परम्परागत कपड़ा मंडियों से भी स्थानीय व्यापारियों के पास आने लगी है। हालांकि इसमें भी लहरिया के लहंगा-चोली की मांग अधिक बताई गई है।