
SURAT KAPDA MANDI: स्टॉक माल की कपड़ा व्यापारियों को होने लगी फिक्र
सूरत. मिनी लॉकडाउन में 23 दिन बंद रहने के बाद शुक्रवार से खुली सूरत कपड़ा मंडी के हजारों कपड़ा व्यापारियों को सबसे पहले फिक्र यहां-वहां स्टॉक माल की हुई और इसमें जॉबवर्कर्स के यहां से इन चार दिनों में ही 30 प्रतिशत रेडी माल मंगवाया भी जा चुका है। इसके अलावा कई करोड़ मीटर कपड़ा व्यापारी का अलग-अलग जगहों पर रखा है।
कोरोना महामारी की दूूसरी लहर ने देश के कई राज्यों में मार्च के दूसरे पखवाड़े से ही असर दिखाना प्रारम्भ कर दिया था और नतीजन महीना समाप्त होते-होते महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश, कर्नाटका आदि में हालात बेकाबू भी होने लगे थे। जिसके चलते अप्रेल में इन प्रदेशों के अलावा अन्य प्रदेशों में भी सरकारों को लॉकडाउन लगाना पड़ा और इधर गुजरात में बेकाबू कोरोना को नियंत्रण में लेने के लिए राज्य सरकार ने हार-थककर 28 अप्रेल से मिनी लॉकडाउन लागू किया। इस बीच सूरत कपड़ा मंडी के हजारों व्यापारियों की वर्ष के सबसे लम्बे लग्नसरा सीजन की तैयारियां पूरी हो चुकी थी और 25-30 फीसदी ग्राहकी भी ऑनलाइन-ऑफलाइन होने लगी थी कि एकदम सबकुछ जाम हो गया। मिनी लॉकडाउन में 23 दिन तक सूरत कपड़ा मंडी बंद रही और इस दौरान हजारों कपड़ा व्यापाारियों को स्टॉक माल की फिक्र रही और जैसे ही 21 मई शुक्रवार को कपड़ा बाजार खुला तो सबसे पहले व्यापारियों ने यहां-वहां जमा स्टॉक माल की सार-संभाल प्रारम्भ की।
-यहां-यहां जमा है स्टॉक
सूरत कपड़ा मंडी के व्यापारियों का कपड़ा कारोबार चेन सिस्टम आधारित है। इसमें पहला स्टॉक उनका वीवर्स के यहां जमा है जिन्हें उन्हें कुछ समय में डाइंग-प्रिंटिंग के लिए मिल में भेजना था। वहीं, डाइंग-प्रिंटिंग मिल में व्यापारी का कुछ कच्चा ग्रे माल तो कुछ पक्का फिनिश-डाइड माल स्टॉक है। इसके बाद जॉबवर्कर्स के यहां भी वेल्यू एडीशन वर्क के लिए कच्चा व रेडी माल का स्टॉक है। इन सबके बाद व्यापारी के गोदाम में तैयार माल व पार्सल के अलावा डिस्पेच किए गए पार्सल ट्रांसपोटर््र्स के यहां स्टॉक के रूप में जमा है। यह करोड़ों मीटर माल बताया जा रहा है।
-रेडी माल 30 फीसद से ज्यादा आया
सूरत कपड़ा मंडी खुलने के बाद इन चार दिनों में अधिकांश कपड़ा व्यापारियों ने स्टॉक माल में से सबसे पहले जॉबवर्कर्स के यहां से रेडी माल मंगवाना प्रारम्भ किया है और सोमवार तक यह 30 फीसद माल उनके पास लौट आया बताया है। इस माल को पहले मंगवाने की वजह में बताया गया है कि जॉबवर्कर्स के यहां रेडी माल अनावश्यक रूप से जगह घेर रखा है, यह हटेगा तो दूसरा माल तैयार होगा। इसके अलावा किसी भी मंडी से हल्की-फुल्की ग्राहकी भी चल निकली तो वहां भेजने के लिए व्यापारी के पास तैयार माल तो होना चाहिए। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण रेडी माल बाहर रहना रिस्कभरा है।
-यहां से डिलीवरी लेने का प्रेशर
सूरत कपड़ा मंडी खुलते ही डाइंग-प्रिंटिंग मिल में जमा कपड़ा व्यापारियों का करोड़ों मीटर फिनिश-डाइड माल की डिलीवरी लेने का प्रेशर होने लगा है। इस प्रेशर में पैमेंट का तकाजा भी खास तौर पर जुड़़ा है, जबकि कपड़ा व्यापारी फिलहाल इस माल की डिलीवरी लेने में बहुत-ज्यादा रुचि नहीं रख रहे हैं क्योंकि इसे तैयार करवाने में ही 15-20 दिन लग जाएंगे और उधर पैमेंट का प्रेशर भी बढ़ जाएगा। दूसरी तरफ कपड़ा व्यापारियों के पास निचली मंडियों से गतवर्ष की दीपावली व उसके बाद के मिनी लग्नसरा सीजन की ग्राहकी का भी पैमेंट अभी तक नहीं आया है।
-जब-जब आपदा आई, तब-तब रफ्तार बढ़ी
आज तक का इतिहास रहा है कि सूरत कपड़ा मंडी हर आपदाओं को झेल कर पुन: अपनी रफ्तार पकड़ लेती है। अब देखना यह है कि इस बार भी पहले जैसी रफ्तार बन पाएगी क्या, यह भविष्य ही बता पाएगा। इस बीच स्टॉक माल को संभालने का प्रथम कार्य अवश्य सभी कपड़ा व्यापारी कर रहे हैं।
किशन गाडोदिया, कपड़ा व्यापारी, मिलेेनियम-2 मार्केट
-कोरोना से सभी सपने हुए चकनाचूर
कोरोना की दूसरी लहर में बाहर की मंडियां बंद होने से माल का भराव, पैमेंट का अभाव, कपड़े की फैशन आउट होने के डर स्थानीय कपड़ा व्यापारी गहरी चिंता में है। गत वर्ष सीजन फेल होने की मार से व्यापारी उबर ही नहीं पाया था कि यह सीजन फिर से फेल होने से व्यापारियों के सभी सपने कोरोना से चकनाचूर कर दिए हैं।
सुनील गोयल, कपड़ा व्यापारी, न्यू टैक्सटाइल मार्केट
Published on:
24 May 2021 09:37 pm
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