
SURAT KAPDA MANDI: भारत के पूर्वी प्रवेशद्वार से खुलेगी सूरत कपड़ा मंडी की ग्राहकी
सूरत. एक आसभरी व्यापारिक निगाह का जुलाई माह प्रारम्भ हो चुका है और सूरत कपड़ा मंडी के हजारों कपड़ा व्यापारी ही नहीं बल्कि कपड़ा उद्योग की साइकिल से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति हाथ जोड़ ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है कि बस अब कोरोना और अधिक नहीं। साल के दूसरे सीजन की शुरुआत चंद ही दिनों में भारत के पूर्वी प्रवेशद्वार असम से होने वाली है और इसके बाद यह ग्राहकी का सीजन धीरे-धीरे सम्पूर्ण भारतवर्ष में फैलेगा।
प्रत्येक वर्ष के अंतिम दिसम्बर महीने से अगले वर्ष मार्च-अप्रेल से प्रारम्भ होने वाले साल के सबसे बड़े लग्नसरा सीजन की तैयारियां सूरत कपड़ा मंडी के हजारों व्यापारी अपने व्यापार के मुताबिक शुरू कर देते हैं, लेकिन लग्नसरा ग्राहकी के मामले में 2020 थोड़ा-बहुत ठीकठाक मगर 2021 ने तो कई मुश्किलें पैदा कर दी है। नतीजा यह है कि 15 जुलाई से साल के दूसरे सीजन की शुरुआत होने वाली है मगर कपड़ा व्यापारियों ने कोई तैयारियां नहीं की है और बस जमा स्टॉक के भरोसे ही बैठे हैं। सूरत कपड़ा मंडी के 85 फीसदी से अधिक कपड़ा व्यापारियों के पास लग्नसरा सीजन की तैयारियों का स्टॉक अभी भी थोक में जमा है और सीजन प्रारम्भ होते ही उनका पहला प्रयास इस स्टॉक को निकालना है। भगवान ने चाहा तो जल्द ही उनके प्रयासों की व्यापारिक शुरुआत होगी और यह देश के पूर्वी प्रवेशद्वार असम की कपड़ा मंडियों से होना तय है। असम की मंडियों के व्यापारियों की संख्या सूरत कपड़ा मंडी में मात्र 100 के आसपास ही है, लेकिन धीरे-धीरे ग्राहकी का सैकंड सीजन सबकुछ ठीकठाक रहा तो स्थानीय मंडी के हंड्रेड प्रशेंट कपड़ा व्यापारियों तक पहुंच जाएगा।
-पूर्वी भारत का प्रवेशद्वार इसलिए है पहले
पूर्वी भारत के असम समेत अन्य राज्य मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालेंड, अरुणाचल प्रदेश आदि की कपड़ा मंडियों में पूरे साल की बड़ी ग्राहकी का सीजन 15 जुलाई के आसपास से रहता है। यहां की कपड़ा मंडियों में सूरत कपड़ा मंडी से मेखळा (चादर), थ्रीपीस साड़ी बड़े पैमाने पर इस सीजनेबल अवधि में जाती है और उसकी फौरी तौर पर तैयारियां पूर्वी भारत की कपड़ा मंडियों में कपड़ा व्यापार करने वाले सूरत कपड़ा मंडी के करीब एक सौ व्यापारियों ने कर रखी है। इसके बाद धीरे-धीरे देश के अन्य राज्यों की कपड़ा मंडियों में सैकंड सीजन खुलने का सिलसिला प्रारम्भ होता है जो कि वर्ष के अंत तक दिसम्बर में भी ज्यों का त्यों जारी रहता है।
-छत्तीसगढ़ का तीजा और फिर सीजन की वेव
असम समेत पूर्वी भारत के राज्यों की कपड़ा मंडियों का सीजन थमता भी नहीं है कि छत्तीसगढ़ का तीजा जोर पकड़ लेता है और तीजा के जोर पकडऩे के बाद सूरत कपड़ा मंडी में सैकंड सीजन की वेव सी चल पड़ती है। छत्तीसगढ़ के तीजा से मध्य व उत्तर भारत की अधिकांश कपड़ा मंडियों में राखी, लहरिया, तीज की ग्राहकी प्रारम्भ हो जाती है और दुर्गा पूजा के लिए बंगाल-बिहार की कपड़ा मंडियों से महंगे लहंगे की डिमांड उठने लगती है। दीपावली सीजन भी इसी दौरान आ जाता है और इस तरह से सूरत कपड़ा मंडी के कमोबेश सभी कपड़ा व्यापारियों के पास अपनी-अपनी मंडी के मुताबिक सैकंड सीजन में व्यापार निकल आता है।
-सभी की निगाहें टिकी है पूर्व की ओर
सूरत कपड़ा मंडी में भले ही कपड़ा व्यापारियों की संख्या हजारों में है, लेकिन स्थानीय कपड़ा उद्योग की साइकिल से लाखों लोग जुड़े हैं और इन सभी की नजरें फिलहाल जुलाई उत्तरार्ध में असम से प्रारम्भ होने वाले सैकंड सीजन पर टिकी है। इसमें सूरत कपड़ा उद्योग के छोटे-बड़े सभी व्यापारी लोग शामिल है। अब असम व पूर्वी भारत का व्यापार भले ही सूरत कपड़ा मंडी के एक सौ करीब व्यापारियों के पास रहेगा, लेकिन उसके बाद सैकंड सीजन की शुरुआत और उससे जुड़ी व्यापारिक गतिविधियों की चहल-पहल से ही सूरत कपड़ा मंडी के रिंगरोड कपड़ा बाजार, श्रीसालासर कपड़ा बाजार, मोटी बेगमवाड़ी कपड़ा बाजार, सारोली कपड़ा बाजार आदि गुलजार दिखाई देंगे।
-तैयारियां कुछ ज्यादा नहीं
असम समेत पूर्वी भारत की कपड़ा मंडियों में बिकने वाले कपड़े की सूरत कपड़ा मंडी के व्यापारियों की ज्यादा तैयारियां नहीं है। पहले तो स्टॉक का क्लीयरेंस और दूसरा जरूरत महसूस होने पर रेडी माल पहुंचाया जाएगा।
रोहित गोयनका, कपड़ा व्यापारी, मिलेनियम-2 मार्केट
-सैकंड सीजन से बंधी है पूरी उम्मीद
यह साल कपड़ा कारोबार के लिहाज से बेहद खराब साल साबित हो रहा है। कोरोना की वजह से सूरत कपड़ा मंडी का लग्नसरा सीजन पूरी तरह से बिगड़ा है और अब सभी व्यापारियों को सैकंड सीजन से ही व्यापार की पूरी उम्मीद बंधी है।
गिरीश फतनानी, कपड़ा व्यापारी, मिलेनियम-2 मार्केट
-बुरा समय है बीत ही जाएगा
कोरोना महामारी ने कपड़ा कारोबार ही नहीं बल्कि उससे जुड़े प्रत्येक छोटे-बड़े व्यवसाय को बुरी तरह से प्रभावित किया है। डेढ़ साल से व्यापारी वर्ग का कोरोना से संघर्ष जारी है और पूरी उम्मीद है कि यह बुरा समय भी बीत ही जाएगा।
अनिल पंसारी, कपड़ा व्यापारी, मिलेनियम-1 मार्केट
Published on:
05 Jul 2021 09:04 pm
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