
SURAT KAPDA MANDI: छोटी-छोटी इंडस्ट्री लगाने पर कपड़ा व्यापारियों का ध्यान केंद्रित
सूरत. एशिया की सबसे बड़ी सूरत कपड़ा मंडी कोरोना काल के बाद नए प्रयोग के दौर से गुजर रही है। इस नए प्रयोग में कपड़ा व्यापारी घाटे के बजाय फायदे का सौदा और रंग चौखा ही चौखा को ध्यान में रख दो-चार जनों के समूह में आधुनिक वीविंग मशीनों के माध्यम से छोटी-छोटी इंडस्ट्रीज लगाने पर जोर दे रहे हैं। सूरत कपड़ा मंडी में यह जोर भी ऐसा है कि मात्र सालभर में 15 प्रतिशत से ज्यादा कपड़ा व्यापारियों का इस तरफ मूव हो चुका है।
वैश्विक कोरोना महामारी ने मानव मात्र को अधिक कुशल और योग्य बनाने का कार्य भी किया है और यह देशभर में 80 फीसदी सिंथेटिक साड़ी-ड्रेस उपलब्ध कराने वाली सूरत कपड़ा मंडी में पिछले एक साल से खूब देखने को मिल रहा है। दादा-पापा के कपड़ा कारोबार में जब से युवा पीढ़ी ने प्रवेश किया है तब से ही कुछ नए प्रयोगों की व्यापारिक आजमाइश यहां जारी है और कोरोना काल ने इसे और अधिक पुख्ता कर दिया। बड़ी पूंजी लगाकर लम्बी उधारी के परम्परागत कपड़ा कारोबार से नई पीढ़ी धीरे-धीरे मुंह मोड़ रही है और कोरोना ने मानों इस युवा प्रवृत्ति पर गहरा रंग चढ़ा दिया, शायद तभी महज एक साल के भीतर सूरत कपड़ा मंडी के हजारों कपड़ा व्यापारियों में से 15 प्रतिशत कपड़ा व्यापारी आधुनिक मशीनों के जरिए छोटी-छोटी टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज लगाकर पूंजी और व्यापार दोनों को सुरक्षित करने की मानसिकता बना चुके हैं।
-छोटी इंडस्ट्रीज में आखिर आकर्षण कैसा?
काफी मेहनत, बड़ी पूंजी और लम्बी उधारी के कपड़ा कारोबार से छोटी-छोटी टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज की तरफ सूरत कपड़ा मंडी के खासकर युवा व्यापारियों का ध्यान खिंचने की कई वजहें हैं। दो-चार व्यापारियों की साझेदारी में कम लागत में यह फायदे का कारोबार इसलिए है, क्योंकि एडवांस टेक्नोलॉजी की शटललैस मशीनों (हाईस्पीड रेपियर जैकार्ड, रेपियर जैकार्ड, वाटरजेट, एयरजेट) पर कपड़े की बुनाई कम मानव श्रम व लागत से बेहतर होता है। फिर इन मशीनों पर जिस तरह का डिमांड ऑर्डर मिले, वैसा ही कपड़ा तैयार किया जा सकता है।
-यह सब बनते हैं
एडवांस टेक्नोलॉजी की वीविंग मशीनों पर साड़ी और ड्रेस ही तैयार नहीं होते बल्कि अन्य कई तरह के वे कपड़े भी बुने जाते हैं जिनकी मांग बाजार में सदैव रहती है। इनमें पर्दा, बेडशीट, शूटिंग-शर्टिंग, फर्निश्ड क्लॉथ, बेबी गारमेंट, लेडीज गारमेंट, दुपट्टा, डेकोरेटिव क्लॉथ, कुर्ता-शेरवानी क्लॉथ, रेपियर लेस और एक्सपोर्ट फैब्रिक्स आदि भी बनाकर बेचते है। दो-चार व्यापारियों के बीच 25 से 50 लाख की रकम की साझेदारी और शेष इंडस्ट्रीज प्रोजेक्ट का 70-80 फीसद बैंक लोन नई जनरेशन को छोटी-छोटी टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज की तरफ अधिक आकृष्ट कर रहा है।
-तीन सौ मशीनों का प्रतिमाह आयात
2001-02 में चीन से आयातित एम्ब्रोडरी मशीनों से सूरत कपड़ा मंडी के कपड़ा व्यवसाय ने तेज गति पकड़ी थी और कमोबेश वो ही स्थिति हाईस्पीड रेपियर जैकार्ड मशीनों से अब वीविंग उद्योग ने पकड़ी है। इसी का परिणाम है कि थोड़े ही समय में 10 हजार से ज्यादा एडवांस टैक्नोलॉजी की यह मशीनें सूरत में छोटी-छोटी टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के रूप में स्थापित हो चुकी है। प्रत्येक माह 300 करीब मशीनें यहां आ रही है और इनमें ज्यादातर चीन निर्मित है। जानकार बताते हैं कि 1800 से 2000 मशीनों की बुकिंग हैं और वे अगले 5-6 महीने में यहां छोटी-छोटी टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के रूप में लग जाएगी।
-रियल एस्टेट में भी बूम की बनी स्थिति
सूरत के सचिन, कड़ोदरा, पलसाना, पांडेसरा, जोलवा समेत अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में इस तरह की छोटी-छोटी टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज अधिक लगाई जा रही है। नतीजन इन जगहों पर रियल एस्टेट में बड़ा बूम देखने को मिल रहा है। इसे मात्र 8-10 महीने में ही दोगुना भाव के साथ देखा जा रहा है। वहीं, वैश्विक स्तर पर कोरोनाकाल के बाद चीन के बजाय भारत से फेब्रिक्स आयात के प्रति दुनिया के देशों का व्यापारिक झुकाव भी बढ़ा है जो कि इस इंडस्ट्रीज की तरफ युवा पीढ़ी को अधिक आकृष्ट कर रहा है। इसके अलावा अन्य कई तरह की व्यापारिक सहूलियतें भी इस टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज में शामिल है, जिसका भविष्य फिलहाल सुनहरा दिख रहा है।
-बदलते वक्त में हो गया जरूरी
बदलते वक्त के दौर में कपड़ा व्यवसाय में टिके रहने के लिए जरूरी हो गया था कि टेक्नोलॉजी के साथ कदम मिलाकर चलें। नई युवा पीढ़ी की पसंद भी इसमें शामिल है, यहीं वजह है कि यह व्यापार लोगों को खूब भा रहा है।
-अमित दोदराजका, युवा कपड़ा व्यापारी, नॉर्थ एक्सटेंशन मार्केट
-परेशानी थोड़ी कम, व्यापारिक सहूलियत अधिक
एडवांस टेक्नोलॉजी की मशीनों आधारित इस कपड़ा कारोबार में देखने जाए तो परेशानियां कम है और व्यापारिक सहूलियतें अधिक है। इंडस्ट्रीज शुरू होते ही जॉबवर्क की प्रचुर उपलब्धता रहती है, अब एक व्यापारी को इससे ज्यादा और चाहिए भी क्या?
-कमल टाटनवाला, युवा कपड़ा व्यापारी
-बाहरी मंडियों के व्यापारियों का भी निवेश
छोटी-छोटी टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के इस नए कारोबार में कई व्यापारिक सहूलियतें होने से अब स्थिति यहां तक बनने लगी है कि सूरत कपड़ा मंडी तो ठीक बल्कि बाहरी कपड़ा मंडियों के व्यापारियों ने भी इसमें निवेश प्रारम्भ कर दिया है।
-बंटी जालान, युवा कपड़ा व्यापारी, होजीवाला इंडस्ट्रीज एस्टेट, सचिन।
Published on:
27 Apr 2022 05:38 pm
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