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SURAT SPECIAL NEWS: महुवा में 1050 साल पुराना जैन मंदिर आस्था का केंद्र

मुगलकाल के दौरान महुवा नगर में श्रीविघ्नहर पार्श्वनाथ भगवान का 1050 साल पुराना जैन मंदिर आज भी पूरी मजबूती व धार्मिक आस्था के साथ खड़ा

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SURAT SPECIAL NEWS: महुवा में 1050 साल पुराना जैन मंदिर आस्था का केंद्र

SURAT SPECIAL NEWS: महुवा में 1050 साल पुराना जैन मंदिर आस्था का केंद्र

बारडोली. विश्व धरोहर दिवस मंगलवार को मनाया जाएगा। इस अवसर पर सूरत जिले के महुवा स्थित पार्श्वनाथ भगवान के प्राचीन जैन मंदिर का जिक्र स्वाभाविक है। मुगलकाल के दौरान महुवा नगर में श्रीविघ्नहर पार्श्वनाथ भगवान का 1050 साल पुराना जैन मंदिर आज भी पूरी मजबूती व धार्मिक आस्था के साथ खड़ा है।यहां 1050 साल पुरानी और 47 इंच ऊंची भगवान पार्श्वनाथ की मूर्ति और पौराणिक जिनालय दिगंबर जैन समाज में अद्वितीय आस्था का केंद्र है। देश-विदेश से जैन और गैर-जैन श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते है।

महुवा में पूर्णा नदी के तट पर स्थित इस मंदिर में पद्मासन की स्थिति में विराजमान भगवान पार्श्वनाथ के कोमल और दिगंबर रूप की पूजा बड़ी श्रद्धा से की जाती है। भक्तों के बीच एक दृढ़ विश्वास है कि धरणेंद्र, नुकीले चेहरे वाले भगवान, सभी बाधाओं को दूर करते हैं।प्रत्येक मास की शुक्ल प्रतिपदा, दसमी व पूर्णिमा के दिन में भक्त विशेष दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के ट्रस्टी अतुल शाह ने मंदिर के इतिहास का वर्णन करते हुए बताया कि भारत में दिगंबर जैनियों के सभी सिद्ध क्षेत्रों और तीर्थ स्थलों में सूरत जिले का महुवा क्षेत्र बहुत प्राचीन है। महुवा को प्राचीन काल में मधुपुरी नगरी के नाम से जाना जाता था। प्रारंभ में मंदिर को श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर के रूप में जाना जाता था। करीब1050 साल पहले मुगल सल्तनत के शासनकाल में संवत 1625 और संवत 1827 में इस जिनालय का जीर्णोद्धार किया गया था। यहां सालों पहले जैन आबादी के प्रमाण भी मिले हैं। गुजरात के पालिताना, गिरनार, तरंगा और पावागढ़ जैसे जैन तीर्थ स्थल पहाड़ियों पर स्थित हैं, जबकि महुवा क्षेत्र समतल मैदान में स्थित है। मंदिर में जैन धर्मशाला, कैंटीन आदि की विशेष एवं सुंदर व्यवस्था है।