
सूरत. भाई-बहन के पवित्र रक्षाबंधन पर्व पर इस बार बुधवार को भद्रा का साया दिनभर रहेगा। नतीजन रात्रि में भद्राकाल समाप्त होने के बाद ही बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधेगीं। श्रावण पूर्णिमा बुधवार सुबह 10 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर अगले दिन गुरुवार सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। इस वजह से ज्यादातर घरों में राखी का त्योहार बुधवार रात्रि में सवा नौ बजे से 11 बजकर 20 मिनट के श्रेष्ठ मुहूर्त में मनाया जा सकेगा। हालांकि कई लोग राखी का त्योहार गुरुवार को भी मनाएंगे।राखी के त्योहार पर इस बार श्रावण पूर्णिमा बुधवार सुबह सूर्योदय के बाद शुरू होगी और गुरुवार को सूर्योदय के कुछ देर बाद ही पूर्ण हो जाएगी। इससे रक्षाबंधन पर्व मनाने की तिथि व दिन को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उधर, ज्योतिष मत व हिंदू पंचांग के अनुसार, भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार हर वर्ष श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व हमेशा ही भद्रारहित काल में मनाया जाता है।
- अपराह्न काल में शुभ, मगर भद्रारहित जरूरी :
ज्योतिषी आचार्य घनश्याम भारद्वाज ने इस संबंध में बताया कि वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रक्षाबंधन पर्व श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि और अपराह्र काल में मनाना शुभ होता है, लेकिन इस दौरान भद्रा काल नहीं होना चाहिए। रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया रहे तो शास्त्र सम्मत भाई की कलाई में राखी नहीं बांधना चाहिए। हिंदू पंचांग की गणना के मुताबिक इस वर्ष 30 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा तिथि के साथ भद्राकाल शुरू हो जाएगी। 30 अगस्त को भद्रा रात 9 बजकर 02 मिनट तक रहेगी। इस तरह से 30 अगस्त को सुबह से देर शाम तक रक्षाबंधन का मुहूर्त नहीं रहेगा। भद्राकाल समाप्त होने के बाद रात 9 बजकर 15 मिनट से 11 बजकर 20 मिनट तक के श्रेष्ठ समय में राखी बांधी जा सकेगी।उधर, कुछ लोगों का मानना है कि रात्रि में राखी बांधना शुभ नहीं होता है। 31 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा तिथि सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगी और इस दौरान भद्रा का साया भी नहीं रहेगा। ऐसी स्थिति में कई लोग गुरुवार सुबह में भी राखी का त्योहार मनाएंगे।
Published on:
28 Aug 2023 09:13 pm

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