
SURAT SPECIAL NEWS: कपड़ा उद्योग ने बनाई गुजरात की खास ‘सूरत’
सूरत. सीखने की ललक और कमाने की धसक (चाह) किसी को भी कहीं देखनी है तो वह सूरत में आसानी से देख सकता है। तभी तो 60-70 के दशक में गली-मोहल्ले में घरेलू उद्योग तक सिमटा सूरत का कपड़ा उद्योग आज देश ही नहीं, दुनियाभर में अपनी विशिष्ट व्यापारिक पहचान बना चुका है। अब तो स्थिति यह हो गई है कि दुनियाभर के सबसे बड़े उत्पादक व निर्यातक देश चीन को कपड़ा व्यापार में कोई सीधी टक्कर दे रहा है तो वह भारत देश की सिल्कसिटी सूरत नगरी है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने भारत का मैनचेस्टर उत्तरप्रदेश के मऊ को कहा था। समय बीता और मऊ से कपड़ा उद्योग सिमटकर अहमदाबाद में फैला और भारत के मैनचेस्टर की उपमा भी उसे मिली। अब इस स्थिति में परिवर्तन आया और सूरत ने भारत के मैनचेस्टर के रूप में जगह ले ली है। एक समय में कपड़ा उद्योग का दुनियाभर में एपिक सेंटर मैनचेस्टर रहा और तब से ही कपड़ा उद्योग के लिहाज से यह भूमिका बार-बार समय व देशकाल के मुताबिक बदलती रही है। सूरत को मैनचेस्टर कहे जाने के पीछे बड़ी वजह यह भी है कि सिंथेटिक कपड़ा उत्पाद देशभर में पहुंचाने में सिल्कसिटी की भागीदारी 90 फीसदी है।
0 - 1613 में खुला था सूरत में पहला कारखाना :
ईस्ट इंडिया कंपनी का जहाज लेकर विलियम हॉकिंस 1608 में सूरत आए थे। इसके बाद तत्कालीन मुगल बादशाह जहांगीर से मंजूरी लेकर कंपनी ने पहला कारखाना सूरत में 11 जनवरी 1613 को खोला था। तब इस कंपनी को जॉन कंपनी के नाम से भी जाना जाता था।
0 - जरी व्यवसाय थी पहले पहचान :
सूरत में कपड़ा उद्योग विकसित होने से पहले 20वीं शती की शुरुआत से आजादी तक जरी व्यवसाय ही सूरत की पहचान थी। घरों में मशीनों पर सोने-चांदी के तार से जरी बनाने का काम तब बड़े पैमाने पर होता था। बाद में जरी उद्योग की जगह कपड़ा व्यवसाय ने ली।
- गिनती की मिलें और मार्केट :
60-70 के दशक में सूरत कपड़ा उद्योग की खास पहचान दादा मिल, मुल्ला मिल, हिमसन मिल, न्यू इंडिया, वखारिया मिल आदि तक सिमटी हुई थी। इसके अलावा कपड़ा कारोबार भी तब झांपा बाजार, बॉम्बे मार्केट, रेशमवाला मार्केट, सूरत टेक्सटाइल मार्केट तक ही सीमित था।
0 - तब और अब स्थिति में बड़ा परिवर्तन :
सूरत के कपड़ा उद्योग ने सर्वाधिक गति से विकास 21वीं शती की शुरुआती वर्ष 2000 से शुरू किया। विकास की इस गति में लगातार तेजी देखी जा रही है। इसी दौर में कपड़ा उद्योग में विशिष्ट तकनीकी एम्ब्रोडरी दौर आया, जिससे व्यवसाय ने नई उंचाइयों को छूआ।
0 - सूरत कपड़ा उद्योग पर एक नजर : -
- 7,00,000 लाख लूम्स मशीनें
- 2.5 लाख से अधिक वैल्यू एडीशन (एम्ब्रोडरी, डिजीटल प्रिंटिंग समेत अन्य) की मशीनें
- 3 करोड़ मीटर कपड़ा उत्पादन प्रतिदिन
- 400 से ज्यादा कपड़ा मिलें
- 225 से ज्यादा छोटे-बड़े टेक्सटाइल मार्केट्स
- 70,000 से ज्यादा कपड़ा दुकानें ऑफिस आदि
- 100000 करोड़ का सालाना टर्नओवर
- 15,000,00 से ज्यादा लोगों को रोजगार।
- तकनीक से ऊंची उड़ान :
कपड़ा कारोबार तकनीकी दौर में तेजी से ऊंची उड़ान की ओर अग्रसर है। निकट भविष्य में सूरत का कपड़ा उद्योग मेनमैड फाइबर के अलावा अन्य क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाकर सूरत व गुजरात की साख बढ़ाएगा।
- संजय सरावगी, युवा कपड़ा उद्यमी
0 0 - निकट भविष्य भी सुनहरा :
सूरत कपड़ा उद्योग की विशिष्ट पहचान और साख के बूते अब स्थिति यह आ गई है कि अकेला सूरत दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक चीन को टक्कर देने लगा है। अमरीका, यूरोप की बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन को छोड़ भारत खास सूरत को टटोलने लगी है। विस्तार अब नवसारी की ओरनवसारी के निकट पीएम मित्रा पार्क प्रस्तावित है। सूरत कपड़ा उद्योग भविष्य में विशाल आकार लेकर इस प्रस्तावित पार्क की ओर अग्रसर है। अभी डिमांड सर्वे में ही यहां एक हजार हेक्टेयर जमीन की बुकिंग बड़ी-बड़ी टेक्सटाइल कंपनियों ने कर ली है।
Published on:
02 May 2023 09:17 pm
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