
Surat/ ऐसे बनी अन्वी रबर गर्ल : माता - पिता ने देखा उसे अंगों को मोड़ने में मजा आता है और योग क्लास में भर्ती किया
सूरत। राष्ट्रीय बाल पुरस्कार - 2022 पाकर सूरत और गुजरात का नाम रोशन करने वाली अन्वी झांझरूकिया बौद्धिक तौर पर 75 फीसदी दिव्यांग है, लेकिन योग में उसने छोटी सी उम्र में जो मुकाम हासिल किए हैं,उसके पीछे उसके माता पिता की दीर्घ दृष्टि और मेहनत है। गुजरात का गौरव बढ़ाने पर गणतंत्र दिवस पर सोमनाथ में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल अन्वी को सम्मानित करेंगे।
अन्वी के पिता विजय झंझारूकिया और माता अवनी झंझारूकिया ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि अन्वी जन्म से ही कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त है और वह ठीक से बोल नहीं पाती। गैस्ट्रिक समस्या से भी जूझ रही है। उसकी दिव्यांगता हमारे लिए चुनौती थी। हम ने शुरू से ही तय किया की उसमें ऐसा कुछ क्या खास है, उसे क्या पसंद आता है यह पता लगाना चाहिए। हमने देखा की उसे अंगों को मोड़ने में मजा आता था। यह देख उसे योग सिखाने का निर्णय किया और योग क्लास में भर्ती कराया। यहां अन्य बच्चों के मुकाबले समझने और सीखने में वह थोड़ी धीमी जरूर थी। मां अवनी भी उसके साथ योग सीखने जाने लगी और घर पर भी उसे योग सिखाती है, जिससे वह एक बाद एक आसान वह सिखती गई। इसके बाद वह स्थानीय योग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगी और जितने भी लगी। पहली बार उसने वर्ष 2019 में छत्तीसगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय योग चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। उसमें उसने सामान्य प्रतियोगियों को हराकर दो स्वर्ण पदक और एक कांस्य पदक जीते। अन्वी के पिता ने बताया कि दिसंबर महीने में जब उसे राष्ट्रपति के हाथों अवार्ड मिला वह सबसे बड़ी खुशी का दिन था और अब प्रधानमंत्री के हाथों राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिला जो हमारे जैसे माता - पिता के लिए गर्व के क्षण है। गौरतलब है कि अन्वी के माता पिता नगर प्राथमिक शिक्षण समिति की स्कूल में शिक्षक है और उसके दादा सेवा जिला शिक्षा अधिकारी है।
Published on:
26 Jan 2022 08:46 pm
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