सूरत. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ न्यास के कोषाध्यक्ष गोविंददेवगिरी महाराज ने कहा कि इस संसार का कोई भी जीवात्मा दुख नहीं चाहता, सब सुख चाहते हैं। सुख की संकल्पना सबकी अलग-अलग हो सकती है, लेकिन सभी को सुख की कामना रहती है। कोई श्मसान में सुख पा रहा है तो कोई परिवार त्याग कर, कोई संपत्ति प्राप्त कर सुख पा रहा है। सभी को सुख अखंड, असीम, स्वाधीन चाहिए। लेकिन सुख का प्रमुख स्रोत अपने भीतर ही है।
हम भीतर की ओर देखते ही नहीं, सुख हमारा स्वभाव है, हमारा ध्यान उधर जाता ही नहीं। अंतर्मुखी होकर भक्ति करने की जरूरत होती है। इसके लिए सत्संग करने की आवश्यकता होती है। हमारा मन चैतन्य परमात्मा की ओर न जाकर जड़ शरीर से चिपका रहता है। इससे पूर्व शहर के वेसू स्थित रामलीला मैदान में एकल श्रीहरि वनवासी विकास ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को मुख्य यजमान महेश मित्तल व मंजू मित्तल, रतनलाल दारुकावाला, अशोक टिबड़ेबाल, ललित सराफ, अंकुर बिजाका आदि ने व्यास पूजन कर महाराज से आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी एवं उद्योगपति गोविंद भाई ढोलकिया भी मौजूद रहे।