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सूरती चायवाला पिलाता है फलों की चाय

15 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर विशेष

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सूरती चायवाला पिलाता है फलों की चाय

सूरत.

सुबह होते ही दिन की शुरुआत की कल्पना चाय के बिना अधूरी है। 90 प्रतिशत से अधिक लोग दिनभर में दो बार से ज्यादा चाय पीते हैं। हर्बल और दूध से बनी चाय सभी पीते हैं, लेकिन सूरत के नानपुरा क्षेत्र के चाय विक्रेता मनीष पच्चीगर पिछले 17 सालों से फलों से बनाई हुई चाय पिलाते हैं। एक-दो लोगों को पिलाने से शुरू हुआ चस्का आज बड़ी संख्या में लोगों को पसंद आ रहा है।
सूरत के नानपुरा क्षेत्र में मनीष पच्चीगर शायद सूरत के इकलौते चाय विक्रेता हैं, जो कि अलग-अलग फलों से बनी चाय बनाते हैं। वह 10 से 12 प्रकार की चाय बना लेते हैं। मनीष भाई का कहना है कि वह पिछले 20 साल से चाय के व्यापार से जुड़े हैं। चाय बेचते हुए उनके मन में कुछ नया करने की सोच थी, इसलिए उन्होंंने फलों से चाय बनाना शुरू किया। शुरू में अपने दोस्तों को ही चाय पिलाते थे, लेकिन बाद में इसका स्वाद अच्छा होने से यह व्यापार में बदल गया। वह केला, सेब, चीकू, अनन्नास तथा नाशपाती के फल से चाय बना सकते हैं। इसके अलावा चॉकलेट फ्लेवर, कोको फ्लेवर सहित अन्य कई प्रकार की चाय भी बना लेते हैं। देखने में एकदम सामान्य और एक लारी पर धंधा करने वाले मनीष के परिवार में दो लड़कियां और एक लड़का है। उन्होंने इस छोटे से व्यापार के माध्यम से ही सभी को उच्च शिक्षा तक पहुंचाया। पच्चीगर ने बताया कि जब वह फलों से चाय बनाने की शुरुआत कर रहे थे, तब उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह सफल हो जाएंगे। इसलिए अपने दोस्तों को ही पिलाकर अनुभव जानते थे, लेकिन अब बड़ी संख्या में लोग उनसे फल से बनी चाय की मांग करते हैं। दूर-दूर से लोग इसका स्वाद लेने आते हैं।
विश्व के कई देशों में चाय का चस्का
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस 15 दिसंबर को है। पहला इंटरनेशनल चाय दिवस वर्ष २००५ में नई दिल्ली में मनाया गया। इसके बाद से यह दिवस लगातार मनाया जा रहा है। चाय का अपना एक इतिहास है। चाय उत्पादक देशों में भारत के अलावा इंगलैण्ड, बांगलादेश, श्रीलंका, नेपाल, वियतनाम, इंडोनेशिया, कीनिया, मलेशिया, यूगांडा, तंजानिया सहित कई देश हैं। इन देशों में चाय पीना बेहद पसंद किया जाता है। भारत में चाय का कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। चाय की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए देश में टी बोर्ड भी बना हुआ है। चाय के सर्वाधिक बागान और मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा, मणिपुर आदि प्रदेशों में हैं। इस कारोबार से लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है।