26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ताप्ती गंगा एक्सप्रेस- स्लीपर में सीटें 72 और यात्री सफर करते हैं 300

अंत्योदय एक्सप्रेस में क्षमता से कम कोच, 18 डिब्बों की चलती है रैक

3 min read
Google source verification
surat photo

सूरत.

ग्रीष्मावकाश के चलते सूरत रेलवे स्टेशन पर उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली ट्रेनों में इतनी भीड़ हो रही है कि यात्री ट्रेन में चढ़ तक नहीं पा रहे हैं। एक कोच में ढाई सौ से तीन सौ यात्री यात्रा करने को मजबूर हैं। सोमवार को सूरत-छपरा ताप्ती गंगा एक्सप्रेस के कई यात्री चढ़ तक नहीं पाए। दूसरी तरफ उधना-जयनगर अंत्योदय एक्सप्रेस में क्षमता से छह डिब्बे कम लगाए जाने की जानकारी मिली है।

स्कूलों की परीक्षाएं खत्म होने के बाद से ही लम्बी दूरी की ट्रेनों में अधिक भीड़ देखने को मिल रही है। सबसे खराब स्थिति उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली ट्रेनों की है। इस ट्रेन के यात्रियों को कोच में चढऩे से लेकर सफर पूरा होने तक काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। सोमवार को १२९४५ सूरत-छपरा ताप्ती गंगा एक्सप्रेस में भी काफी भीड़ होने से कई यात्री ट्रेन में चढ़ नहीं पाए। रविवार को सूरत में ताप्ती गंगा तथा उधना स्टेशन पर उधना-जयनगर अंत्योदय एक्सप्रेस में नहीं चढ़ पाने वाले यात्री बड़ी संख्या में प्लेटफार्म पर ट्रेन का इंतजार करते हुए देखे गए थे। इन यात्रियों के लिए रेलवे के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी। सूत्रों के अनुसार सोमवार को रेलवे अधिकारियों ने विभागीय रिपोर्ट में मुम्बई रेल मंडल को बताया कि ताप्ती गंगा एक्सप्रेस के प्रत्येक स्लीपर कोच में करीब ढाई सौ से तीन सौ यात्री सफर करने को मजबूर हैं। जबकि जनरल कोच में लाइन में बिठाने की व्यवस्था होने के बाद भी करीब पांच सौ से सात सौ यात्री भीड़ होने के कारण ट्रेन में चढ़ नहीं सके। स्टेशन की रिपोर्ट में रेलवे अधिकारी रोजाना मंडल कार्यालय को फोटो व वीडियो भी भेजते हैं। लेकिन इन यात्रियों की सुध अब तक रेलवे ने नहीं ली है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि स्टेशन पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है।

अंत्योदय ट्रेन में क्षमता से कम कोच

रेलवे कर्मचारियों ने बताया कि नई शुरू हुई उधना-जयनगर अंत्योदय एक्सप्रेस को उद्घाटन के समय जयनगर से जब उधना स्टेशन लाया गया था तो कुल 22 डिब्बे थे। बाद में जबसे इस ट्रेन का नियमित परिचालन शुरू हुआ तो एक ट्रिप में 18 डिब्बे ही लगाए जाते हैं। जबकि अन्य चार डिब्बे उधना स्टेशन के यार्ड में ही रखे गए थे। बाद में उन्हें जयनगर वापस भेज दिया गया। पैसेंजर ट्रेन में कुल 24 डिब्बे लगाए जा सकते हैं। फिर भी सीजन में १८ डिब्बों की गाड़ी चलाई जा रही है।

इ-टिकट एजेंटों की लूट
कन्फर्म टिकट की मारामारी के बीच शहर में जगह-जगह सेन्टर खोलकर बैठे इ-टिकट एजेंट यात्रियों को वेटिंग टिकट बनाकर रुपए कमाने में जुटे हैं। टिकट चेकिंग स्टाफ द्वारा उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली ट्रेनों में जमकर रसीद बनाई जाती है। इसमें प्रमुख ताप्ती गंगा एक्सप्रेस, अवध एक्सप्रेस, श्रमिक एक्सप्रेस, उधना-दानापुर एक्सप्रेस समेत उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली अन्य ट्रेनें शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि इ-टिकट एजेंट जरूरतमंद यात्रियों को अधिक रुपए लेकर वेटिंग टिकट बेच देते हैं। टिकट वेटिंग रह जाने पर इ टिकट अपने आप रद्द हो जाती है। जबकि यात्री परिवार के साथ टिकट का प्रिंट लेकर सफर करता हुआ ट्रेन में मिलता है। टिकट चेकिंग स्टाफ ऐसे यात्रियों से पूरा किराया वसूलते हैं।

अंत्योदय के पैसेंजर पश्चिम एक्सप्रेस में
बान्द्रा टर्मिनस-गोरखपुर एक्सप्रेस प्रत्येक रविवार को ८.५० बजे सूरत आती है। इस रविवार को यह एक घंटे की देरी से ९.५० बजे आई थी। उधना-जयनगर, ताप्ती गंगा एक्सप्रेस की तरह गोरखपुर अंत्योदय के भी कई पैसेंजर भीड़ के कारण ट्रेन में चढ़ नहीं पाए थे। यह यात्री दिल्ली रूट पर जाने वाली जम्मूतवी एक्सप्रेस, फिरोजपुर जनता एक्सप्रेस और बान्द्रा टर्मिनस-अमृतसर पश्चिम एक्सप्रेस में गोरखपुर अंत्योदय एक्सप्रेस की टिकट लेकर यात्रा करते हुए मिले। रेलवे ने बताया कि अंत्योदय एक्सप्रेस का किराया पन्द्रह फीसदी अधिक होता है और जनरल टिकट पर ट्रेन का नाम भी लिखा होता है। इन यात्रियों से टिकट चेकिंग स्टाफ ने पूरा किराया वसूल किया है।

क्लोन ट्रेन की व्यवस्था कब?
रेलवे बजट में सीजन के दौरान यात्रियों की भीड़ देखते हुए प्रमुख ट्रेनों की क्लोन ट्रेन चलाने की बात कही गई थी। ताप्ती गंगा, अवध, उधना-दानापुर एक्सप्रेस ऐसी ट्रेनें हैं, जिसमें प्रतिदिन पांच सौ से सात सौ यात्री चढ़ नहीं पा रहे हैं। ऐसी स्थिति की रिपोर्टिंग भी नियमित मुम्बई मंडल प्रबंधक, सीनियर डीसीएम को की जा रही है, लेकिन शेष यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो रही है। रेलवे ने हाल में आरक्षित टिकट में विकल्प का ऑप्शन शुरू किया है। सूरत में यूपी-बिहार के लिए नई ट्रेन की बड़ी डिमांड होने पर भी कोई स्पेशल जन साधारण ट्रेन नहीं चलाई जाती है। यूपी-बिहार के लिए अब तक सुविधा ट्रेनें चलाई गई हैं जिसमें चार गुना अधिक किराया वसूल किया जाता है। स्लीपर का करीब २२ सौ से २५ सौ, तृतीय एसी में छह से सात हजार और द्वितीय एसी में आठ से नौ हजार रुपए किराया है।